मानसून ब्रेक: दिल्ली समेत कई राज्यों का इंतजार बारिश का, पांच से सात दिनों में होगी राहत
देश के बड़े हिस्से में मानसून की रफ्तार धीमी हुई, जिससे कई राज्यों में बारिश का इंतजार लंबा हो गया। आईएमडी के अनुसार अगले पांच से सात दिनों तक उत्तर-पश्चिम के मैदानी क्षेत्रों समेत देश के बड़े हिस्से में बारिश की गतिविधियां कमजोर रहेंगी।

सौजन्य से:- Jagran
मानसून पर अचानक क्यों लगा ब्रेक? 5 दिन बाद दिल्ली समेत कई राज्यों में होगी राहत की बरसात, राजस्थान की भी बुझेगी प्यास
देश के बड़े हिस्से में मानसून की रफ्तार थम गई है, जिससे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली समेत कई राज्यों में बारिश का इंतजार लंबा हो गया है। ...और पढ़ें
HighLights
- देश के बड़े हिस्से में मानसून की रफ्तार धीमी हुई।
- खरीफ फसलों की बुआई में 16% की भारी कमी।
- 20-22 जुलाई के बाद अच्छी बारिश की उम्मीद।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। जुलाई की शुरुआत में जोरदार बारिश के बाद देश के बड़े हिस्से में मानसून की रफ्तार अचानक थम गई है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों से बारिश लगभग गायब है।
भारत मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार अगले पांच से सात दिनों तक उत्तर-पश्चिम के मैदानी क्षेत्रों समेत देश के बड़े हिस्से में बारिश की गतिविधियां कमजोर रहेंगी। इन क्षेत्रों में झमाझम बारिश के लिए 20 से 22 जुलाई तक इंतजार करना पड़ सकता है।
क्या है बारिश न होने की वजह?
आईएमडी के अनुसार यह मानसून का सामान्य 'ब्रेक' है, जो लंबा हो रहा है। अभी मानसूनी ट्रफ का पश्चिमी सिरा हिमालय की तराई की ओर खिसक गया है, जबकि बंगाल की खाड़ी में ओडिशा के पास बना कम दबाव का क्षेत्र पूर्वी भारत की ओर नमी खींच रहा है।
यही वजह है कि बिहार, झारखंड, बंगाल, ओडिशा, पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं उत्तर-पूर्वी राज्यों में अच्छी बारिश जारी है, लेकिन मध्य और पश्चिमी भारत का मैदानी क्षेत्र बारिश का इंतजार कर रहा है।
आईएमडी का अनुमान है कि पांच-सात दिनों में यह पश्चिम की ओर बढ़ सकता है। ओडिशा में 16 और 17 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात एवं दक्षिण भारत में जहां-तहां हल्की या गरज-चमक के साथ खंड वर्षा हो सकती है।
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खेती पर पड़ रहा मानसूनी ब्रेक का असर
इस मानसूनी ब्रेक का असर खेती पर दिखने लगा है। जून में देश में वर्षा सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम रही थी। जुलाई के पहले सप्ताह की अच्छी बारिश से यह कमी घटकर 19 प्रतिशत तक पहुंच गई, लेकिन उसके बाद फिर बारिश कमजोर पड़ने से खरीफ बुआई प्रभावित हुई है।
पिछले वर्ष दस जुलाई तक 632 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई हुई थी, जो इस वर्ष 16 प्रतिशत घटकर अभी 531 लाख हेक्टेयर रह गई है। सबसे ज्यादा कमी दलहन की है।
पिछले वर्ष की तुलना में दलहनों की बुआई 23 प्रतिशत, मोटे अनाज की 22 प्रतिशत, तिलहन की 21 प्रतिशत, कपास की 15 प्रतिशत और धान की 9 प्रतिशत कम हुई है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसान बुआई टाल रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने ऐसे क्षेत्रों में कम अवधि वाली मक्का, बाजरा और मूंग जैसी फसलों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उम्मीद जताई है कि स्थिति में सुधार हो सकता है। खरीफ बुआई का समय 15 अगस्त तक रहता है और 20 जुलाई के बाद अच्छी बारिश की संभावना है।
यदि पूर्वानुमान के अनुसार मानसून फिर सक्रिय होता है तो बुआई के रकबे में आई कमी की काफी हद तक भरपाई संभव है। फिलहाल देश के बड़े हिस्से की निगाहें अगले सप्ताह लौटने वाली मानसूनी बारिश पर टिकी हैं।
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