जयपुर नगर निगम का मेयर कौन? कोठारी-कर्णावत समेत ये 5 नाम रेस में
ये हैं मेयर पद के प्रबल दावेदार सुनील कोठारी - कोठारी जेम्स एंड ज्वेलरी के बड़े कारोबारी हैं। जयपुर के सबसे अमीर प्रत्याशी भी यही हैं। कोठारी पिछले तीन दशक से भाजपा से जुड़े हैं। हालांकि वे फ्रंट फुट पर नहीं रहे लेकिन सं…

सौजन्य से:- Navbharat Times
ये हैं मेयर पद के प्रबल दावेदार
सुनील कोठारी - कोठारी जेम्स एंड ज्वेलरी के बड़े कारोबारी हैं। जयपुर के सबसे अमीर प्रत्याशी भी यही हैं। कोठारी पिछले तीन दशक से भाजपा से जुड़े हैं। हालांकि वे फ्रंट फुट पर नहीं रहे लेकिन संगठन में सक्रिय रहे। बताया जा रहा है कि वर्तमान में वे मुख्यमंत्री भजनलाल से करीबी लोगों में शामिल हैं। सीएमओ और सीएमआर से जुड़े अहम कार्यों में कोठारी की भूमिका रहती है। कोठारी ने वार्ड 112 से चुनाव जीत कर आए हैं। वे प्रदेश उपाध्यक्ष और जयपुर शहर भाजपा अध्यक्ष रह चुके हैं।शैलेन्द्र भार्गव - भार्गव संघ का जाना माना चेहरा हैं। वे भी पूर्व में भाजपा शहर अध्यक्ष रह चुके हैं। लंबे समय तक अखिल भारतीय छात्र संगठन से भी जुड़े रहे। भाजपा निर्विवाद चेहरे को महापौर की कुर्सी देना चाहती है। ऐसे में शैलेंद्र भार्गव का नाम आगे माना जा रहा है।
पुनीत कर्णावत - कर्णावत जयपुर नगर निगम के पूर्व उप महापौर रहे हैं। पहले वे पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी रहे हैं और पिछले तीन साल से वे मौजूदा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के करीबी हैं। पार्टी में लंबे समय से सक्रिय हैं और आक्रामक छवि के नेता हैं। कर्णावत लंबे समय तक अखिल भारतीय छात्र संगठन से भी जुड़े रहे हैं। पार्टी उन्हें जमीनी और टिकाऊ के साथ सबसे मजबूत नेता मान रही है। ऐसे में महापौर के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।
विमल अग्रवाल - जयपुर में वैश्य समाज भाजपा का बड़ा वोट बैंक है। ऐसे में अगर वैश्य समाज के व्यक्ति को मेयर बनाया जाता है तो विमल अग्रवाल का नाम आगे माना जा रहा है। अग्रवाल पूर्व में पार्षद रहे हैं और एबीवीपी से भी जुड़े रहे हैं। हालांकि कुछ वर्षों पहले उन्होंने घनश्याम तिवाड़ी के साथ भाजपा से बगावत कर ली थी। बाद में तिवाड़ी के साथ फिर से वे पार्टी में लौट आए।
भवानी सिंह - भाजपा अगर यूजीसी मामले में समीकरण साधना चाहेगी तो सवर्ण समाज के नेता को मेयर बना सकती है। इसमें भवानी सिंह राजावत का नाम आगे माना जा रहा है। यूजीसी को लेकर सवर्ण समाज की ओर से मुख्यतया राजपूत समाज की ओर से बड़ा आंदोलन किया गया था। अब राजपूत समाज से ही अगर किसी नेता को आगे लाने का प्लान है तो भवानी सिंह राजावत की किस्मत खुल सकती है। वे पूर्व में पार्षद रह चुके हैं।
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