5 साल बाद फिर राजस्थान के खाते में BJP राष्ट्रीय महामंत्री का पद; माथुर- वसुंधरा राजे-भूपेंद्र के बाद अब पूनियां
5 साल बाद फिर राजस्थान के खाते में BJP राष्ट्रीय महामंत्री का पद; माथुर- वसुंधरा राजे-भूपेंद्र के बाद अब पूनियां राजस्थान के खाते में यह पद पहली बार ओमप्रकाश माथुर के रूप में आया। वे 2005 से 2008 तक करीब तीन साल राष्ट्री…

सौजन्य से:- Hindustan
5 साल बाद फिर राजस्थान के खाते में BJP राष्ट्रीय महामंत्री का पद; माथुर- वसुंधरा राजे-भूपेंद्र के बाद अब पूनियां
राजस्थान के खाते में यह पद पहली बार ओमप्रकाश माथुर के रूप में आया। वे 2005 से 2008 तक करीब तीन साल राष्ट्रीय महामंत्री रहे। इसके बाद मार्च 2010 में तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी की टीम में वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया। राजे करीब तीन साल नौ महीने इस पद पर रहीं।
भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम के ऐलान के साथ राजस्थान की सियासत में एक ऐसा अध्याय फिर खुल गया है, जिसका इंतजार करीब पांच साल से था। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में डॉ. सतीश पूनियां को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी मिलते ही राजस्थान एक बार फिर पार्टी के सबसे ताकतवर संगठनात्मक पदों में शामिल हो गया है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि पूनियां को नई जिम्मेदारी मिली है, बल्कि सवाल यह भी है कि राजस्थान से आखिर कौन-कौन इस मुकाम तक पहुंचा और पूनियां की एंट्री किस बड़े सियासी संकेत की ओर इशारा कर रही है?
राजस्थान की राजनीतिक-संगठनात्मक पृष्ठभूमि से सीधे राष्ट्रीय महामंत्री बनने वाले नेताओं की सूची अब चार नामों की हो गई है ओमप्रकाश माथुर, वसुंधरा राजे, भूपेंद्र यादव और डॉ. सतीश पूनियां। भाजपा में राष्ट्रीय महामंत्री का पद संगठन के सबसे प्रभावशाली पदों में गिना जाता है। रणनीति तय करने से लेकर राज्यों में संगठन को मजबूत करने तक महामंत्रियों की भूमिका बेहद अहम होती है।
2005 से 2026 तक… चार चेहरे, चार दौर
राजस्थान के खाते में यह पद पहली बार ओमप्रकाश माथुर के रूप में आया। वे 2005 से 2008 तक करीब तीन साल राष्ट्रीय महामंत्री रहे। इसके बाद मार्च 2010 में तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी की टीम में वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया। राजे करीब तीन साल नौ महीने इस पद पर रहीं।
इसके बाद 2014 में भूपेंद्र यादव राष्ट्रीय महामंत्री बने। उनका कार्यकाल सबसे लंबा रहा। जुलाई 2021 तक करीब सात साल वे भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को संभालते रहे। इसके बाद केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने पर उन्होंने संगठन का पद छोड़ दिया।
यहीं से राजस्थान की कहानी में करीब पांच साल का खालीपन आया। 2021 के बाद अब 17 अगस्त 2026 को डॉ. सतीश पूनियां के रूप में राजस्थान को फिर राष्ट्रीय महामंत्री मिला है।
एक नाम और… लेकिन राजस्थान के खाते में नहीं
इस पूरी कहानी में सुनील बंसल का नाम भी अक्सर सामने आता है। वे राजस्थान में एबीवीपी से जुड़े रहे और बाद में उत्तर प्रदेश भाजपा के संगठन में बड़ी भूमिका निभाई। अगस्त 2022 में उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया। हालांकि संगठनात्मक प्रतिनिधित्व की गणना में उन्हें राजस्थान के खाते में नहीं रखा जाता। वजह यह है कि उनकी राष्ट्रीय भूमिका मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश में लंबे संगठनात्मक कार्य के बाद बनी। इसलिए राजस्थान से सीधे जुड़े राष्ट्रीय महामंत्रियों की संख्या पूनियां के साथ चार मानी जा रही है।
भजन-कीर्तन चल रहा था… तभी आई खबर
डॉ. पूनियां की नियुक्ति का संयोग भी खास रहा। रानी सती नगर स्थित उनके आवास पर सावन के सोमवार के अवसर पर भजन-कीर्तन चल रहा था। परिवार धार्मिक आयोजन में जुटा था। इसी बीच भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान हुआ और खबर पहुंची कि पूनियां को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है।
कुछ ही देर में घर का माहौल बदल गया। धार्मिक आयोजन के बीच राजनीतिक खुशखबरी चर्चा का केंद्र बन गई। हालांकि भजन-कीर्तन को बीच में नहीं रोका गया और आयोजन तय समय तक चलता रहा।
राष्ट्रीय टीम के ऐलान के बाद पूनियां पहले भाजपा प्रदेश मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार सहित पार्टी के प्रमुख नेताओं से मुलाकात की। इसके बाद वे अपने आवास पहुंचे। करीब 4:30 बजे उनके पहुंचने के बाद भजन-कीर्तन का समापन हुआ।
खबर फैली तो घर पर जुटने लगे समर्थक
पूनियां की नई जिम्मेदारी की खबर जैसे-जैसे फैली, उनके आवास पर समर्थकों और नेताओं की भीड़ बढ़ती गई। पूर्व जिला प्रमुख राम चोपड़ा, पूर्व प्रदेश मंत्री अशोक सैनी, अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सादिक खान सहित कई नेता बधाई देने पहुंचे। देर रात तक शुभकामनाओं का सिलसिला जारी रहा।
अब असली सवाल यह है कि पूनियां को राष्ट्रीय संगठन में कितनी बड़ी भूमिका मिलती है और आने वाले दिनों में उन्हें किस राज्य या संगठनात्मक जिम्मेदारी का दायित्व सौंपा जाता है। लेकिन एक बात साफ है—करीब पांच साल बाद राजस्थान की आवाज फिर भाजपा के राष्ट्रीय संगठन के सबसे ताकतवर पदों में सुनाई देगी।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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