साइबर ठगों ने भरोसे की छवि का इस्तेमाल करके जुटाई करोड़ों की रक़म
राजस्थान पुलिस ने एक हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी का पर्दाफाश करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला कि ठग ने व्हाट्सएप पर चेयरमैन की पहचान के एक नकली अकाउंट से अकाउंटेंट से संपर्क करके 5.30 करोड़ की रक़म ऑनलाइन ट्रांसफर कर ली।

सौजन्य से:- Hindustan
साइबर ठगों ने राजस्थान में व्हाट्सएप पर चेयरमैन बनकर करवा लिए 5. 30 करोड़ ट्रांसफर
राजस्थान पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की गहन तकनीकी जांच की। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस महाराष्ट्र के पुणे पहुंची, जहां राहुल अशोक (32) को गिरफ्तार किया गया।
सिर्फ एक व्हाट्सएप प्रोफाइल फोटो… और भरोसे की एक छोटी-सी चूक। यही दो हथियार एक ऐसे साइबर गिरोह के लिए काफी साबित हुए, जिसने कुछ ही मिनटों में एक प्रतिष्ठित कंपनी के खाते से 5 करोड़ 30 लाख रुपए दूसरे खातों में ट्रांसफर करवा लिए। न कोई हथियार चला, न ताले टूटे और न ही किसी ने दफ्तर में घुसकर वारदात की। यह पूरा खेल मोबाइल स्क्रीन पर खेला गया, जहां एक नकली चेयरमैन ने असली कर्मचारी के भरोसे को निशाना बना लिया।
राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम शाखा ने इस हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी का पर्दाफाश करते हुए महाराष्ट्र के पुणे से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद ठगी का मास्टरमाइंड नहीं था, बल्कि वह साइबर गिरोह को बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम करता था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है।
1930 हेल्पलाइन पर पहुंची करोड़ों की ठगी की शिकायत
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया कि 27 अप्रैल 2026 को गैलेक्सी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड की ओर से परिवादी दीपेंद्र सिंह ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने कंपनी के चेयरमैन दीपेंद्र सिंह राठौड़ के नाम और प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल करते हुए व्हाट्सएप पर अकाउंटेंट से संपर्क किया।
संदेशों में खुद को कंपनी का मालिक बताते हुए ठगों ने तत्काल भुगतान का दबाव बनाया और दो अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी भेज दी। बॉस की फोटो और नाम देखकर अकाउंटेंट को कोई संदेह नहीं हुआ। उसने निर्देशों को वास्तविक समझते हुए दोनों खातों में कुल 5 करोड़ 30 लाख रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। जब तक सच्चाई सामने आई, तब तक करोड़ों रुपए साइबर गिरोह के कब्जे में जा चुके थे।
भरोसे को बनाया सबसे बड़ा हथियार
जांच में पता चला कि अपराधियों ने पहले कंपनी और उसके चेयरमैन की पूरी जानकारी जुटाई। सोशल मीडिया और अन्य सार्वजनिक प्लेटफॉर्म से फोटो हासिल की गई। फिर उसी फोटो को नए व्हाट्सएप नंबर की डीपी बनाकर अकाउंटेंट से संपर्क किया गया। पूरा ऑपरेशन इस तरह अंजाम दिया गया कि कर्मचारी को एक पल के लिए भी यह एहसास नहीं हुआ कि स्क्रीन के दूसरी तरफ उसका बॉस नहीं, बल्कि साइबर ठग बैठा है।
तकनीकी जांच से पुणे तक पहुंची पुलिस
राजस्थान पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की गहन तकनीकी जांच की। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस महाराष्ट्र के पुणे पहुंची, जहां राहुल अशोक (32) को गिरफ्तार किया गया। महाराष्ट्र पुलिस के सहयोग से आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर जयपुर लाया गया।
दिहाड़ी मजदूर बना साइबर गिरोह की कड़ी
पूछताछ में राहुल ने स्वीकार किया कि वह साइबर अपराधियों को कमीशन लेकर बैंक खाते उपलब्ध कराता था। जांच में सामने आया कि राहुल पेशे से दिहाड़ी मजदूर है, लेकिन लालच में आकर उसने साइबर गिरोह के लिए काम करना शुरू कर दिया। उसने पुणे निवासी अमित सिंह के कहने पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक फर्जी फर्म रजिस्टर करवाई और उसी के नाम से बैंक खाता खुलवाया।
50 करोड़ की लिमिट वाला करंट अकाउंट बना ठगी का जरिया
पुलिस के अनुसार फर्जी फर्म के नाम पर खोले गए करंट बैंक खाते की क्रेडिट लिमिट कथित मिलीभगत से 50 करोड़ रुपए तक बढ़ा दी गई थी। इसी खाते का इस्तेमाल मार्च 2026 में हुई 5.30 करोड़ रुपए की साइबर ठगी के लिए किया गया। अब जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि इतनी बड़ी लिमिट स्वीकृत कराने में बैंक के भीतर किसने मदद की।
बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
राजस्थान पुलिस अब बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। यदि जांच में यह सामने आता है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खाते खोलने या असामान्य वित्तीय लिमिट मंजूर कराने में किसी बैंक कर्मी की मिलीभगत थी, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य आरोपी की तलाश जारी
पुलिस का मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि सुनियोजित अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क का हिस्सा है। मुख्य आरोपी अमित सिंह सहित गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। पुलिस ठगी में इस्तेमाल हुए अन्य बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके।
इस मामले की जांच उप महानिरीक्षक पुलिस (साइबर क्राइम) शांतनु कुमार सिंह के निर्देशन और पुलिस अधीक्षक सुमित मेहरड़ा के सुपरविजन में की जा रही है। कार्रवाई को स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, जयपुर के थानाधिकारी एवं उपाधीक्षक पुलिस गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने अंजाम दिया। टीम में पुलिस निरीक्षक मुकेश, कांस्टेबल अमित कुमार और कांस्टेबल जयसिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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