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साइबर ठगी का खूनिया गिरोह: कंपनी चेयरमैन की डीपी लगाकर 5.30 करोड़ की ठगी, आरोपी गिरफ्तार

राजस्थान साइबर क्राइम विंग ने आरोपी को पुणे से पकड़ा है. आरोपी ने कंपनी चेयरमैन के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर साइबर ठगी की वारदात को अंजाम दिया.

ETV Bharat के अनुसार7 जुलाई 2026 को 10:04 am बजे
साइबर ठगी का खूनिया गिरोह: कंपनी चेयरमैन की डीपी लगाकर 5.30 करोड़ की ठगी, आरोपी गिरफ्तार

सौजन्य से:- ETV Bharat

कंपनी चेयरमैन की डीपी लगा 5.30 करोड़ की ठगी, दिहाड़ी मजदूर की फर्म के खाते में रकम ट्रांसफर, आरोपी गिरफ्तार

राजस्थान साइबर क्राइम विंग ने आरोपी को पुणे से पकड़ा है.

Published : July 7, 2026 at 10:47 AM IST

जयपुर : राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम विंग ने कॉर्पोरेट जगत को निशाना बनाकर साइबर फ्रॉड करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. शातिर ठगों ने एक नामचीन कंपनी के चेयरमैन का नाम का इस्तेमाल किया और उनकी डीपी वाट्सएप पर लगाकर कंपनी के अकाउंटेंट से दो अलग-अलग खातों में 5 करोड़ 30 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए.

स्टेट साइबर क्राइम पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के पुणे से एक आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है. एडीजी साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले में पुणे निवासी राहुल अशोक सोपान को गिरफ्तार किया गया है. वह दिहाड़ी मजदूर है और उसने अमित सिंह नाम के शख्स के कहने पर बैंक खाता खुलवाया, जिसमें साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर की गई.

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कंपनी मालिक के नाम और फोटो का किया इस्तेमाल : मामले का खुलासा करते हुए बताया कि 27 अप्रैल 2026 को परिवादी दीपेंद्र सिंह ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर एक शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने बताया कि उनके नाम और फोटो का इस्तेमाल कर साइबर ठगों ने एक अज्ञात वाट्सएप नंबर से कंपनी के अकाउंटेंट को मैसेज भेजा. अपराधियों ने खुद को मालिक बताते हुए वित्तीय लेनदेन के लिए अधिकृत अकाउंटेंट को दो अलग-अलग बैंक खातों की डिटेल भेजी और बेहद जरूरी बताते हुए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए 5.30 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा कर धोखाधड़ी को अंजाम दिया.

वारदात से पहले जुटाई पूरी जानकारी : साइबर अपराधियों ने इस ठगी के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया. गिरोह के सदस्यों ने सबसे पहले कंपनी के चेयरमैन/डायरेक्टर की पूरी जानकारी और उनकी प्रोफाइल फोटो जुटाई. इसके बाद उस फोटो को एक नए वाट्सएप नंबर पर डीपी लगाकर कंपनी के अकाउंटेंट को मैसेज किया. कर्मचारी ने वाट्सएप पर अपने बॉस का नाम और डीपी देखी तो उसने बिना किसी संदेह के दिए गए बैंक खातों में 5.30 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए.

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पुणे से पकड़ा, ट्रांजिट रिमांड पर लाए जयपुर : उन्होंने बताया, इस वारदात को देखते हुए डीआईजी शांतनु कुमार सिंह के निर्देशन व एसपी सुमित मेहरड़ा के सुपरविजन में स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, जयपुर की एक विशेष टीम का गठन किया गया. टीम ने ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजैक्शन का गहनता से तकनीकी विश्लेषण किया. जांच के बाद आरोपी राहुल अशोक सोपान (32) निवासी जिला पुणे (महाराष्ट्र) की पहचान की गई. राजस्थान पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस के सहयोग से आरोपी को पुणे से दबोच लिया और वहां की अदालत से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त कर उसे जयपुर लेकर आई.

फर्जी फर्म बनाई, लिमिट 50 करोड़ करवाई : पूछताछ में आरोपी ने कबूला कि वह साइबर अपराधियों को मोटे कमीशन के आधार पर फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने और अवैध धनराशि के लेनदेन में सहयोग करता था. आरोपी असल में एक दिहाड़ी मजदूर है. उसने पुणे में ही अमित सिंह नाम के एक व्यक्ति के कहने पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक फर्जी फर्म रजिस्टर्ड करवाई थी. इस फर्जी फर्म से जुड़े चालू बैंक खाते की क्रेडिट लिमिट को मिलीभगत करके 50 करोड़ रुपए तक करवा दिया गया था.

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बैंक कर्मचारियों की लिप्तता की भी जांच : आरोपी ने इसी खाते का इस्तेमाल 5.30 करोड़ रुपए की ठगी में किया. आरोपी ने इस गिरोह के लिए तीन अन्य बैंक खाते भी खुलवा रखे थे. पुलिस अब इस मामले में फर्जी खाते खोलने वाले संबंधित बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता की भी गहनता से जांच कर रही है. स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, जयपुर के थानाधिकारी व उपअधीक्षक गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में पुलिस निरीक्षक मुकेश, कांस्टेबल अमित कुमार और कांस्टेबल जयसिंह ने मुख्य भूमिका निभाई. पुलिस फिलहाल मामले में प्रयुक्त अन्य बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है, ताकि अमित सिंह सहित इस संगठित गिरोह के अन्य सूत्रधार पकड़े जा सके.

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