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राजस्थान:एक झटके में 5,00,00,030 पार, WhatsApp की DP को 'बॉस' समझ अकाउंटेंट ने निकाला कंपनी का 'दिवाला'

राजस्थान में एक माइनिंग कंपनी के मालिक के साथ साइबर ठगों ने हैरान कर देने वाली साजिश रची। इसके जरिए आरोपियों ने एक ही झटके में 5 करोड़ 30 लाख रुपए पार कंपनी अकाउंट से पार कर लिए। इस मामले में पुलिस ने पुणे से आरोपी को गि…

Navbharat Times के अनुसार7 जुलाई 2026 को 03:19 pm बजे
राजस्थान:एक झटके में 5,00,00,030 पार, WhatsApp की DP को 'बॉस' समझ अकाउंटेंट ने निकाला कंपनी का 'दिवाला'

सौजन्य से:- Navbharat Times

राजस्थान में एक माइनिंग कंपनी के मालिक के साथ साइबर ठगों ने हैरान कर देने वाली साजिश रची। इसके जरिए आरोपियों ने एक ही झटके में 5 करोड़ 30 लाख रुपए पार कंपनी अकाउंट से पार कर लिए। इस मामले में पुलिस ने पुणे से आरोपी को गिरफ्तार किया है।

जयपुर: व्हाट्सएप पर दिखने वाली हर तस्वीर सच नहीं होती। ये बात राजस्थान में हुई एक घटना पर सटीक बैठती है। दरअसल , यहां साइबर ठगों ने करोड़ों की कंपनी के एक मालिक के कर्मचारी का भरोसा जीतने के लिए ऐसी साजिश रची, जिसे जान आप भी हैरान रह जाएंगे। बड़ी बात यह है कि यह घटना यह समझने के लिए जरूरी है किसोशल मीडिया की एक प्रोफाइल फोटो और भरोसे की एक छोटी सी चूक किसी कंपनी को कितना भारी नुकसान पहुंचा सकती है। यहां जानिए पूरा मामला

एक झटके में 5 करोड़ 30 लाख रुपए पार

हैरान करने वाला मामला राजस्थान और पुणे से जुड़ा है। राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम शाखा ने एक ऐसे अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने महज कुछ मिनटों में एक प्रतिष्ठित माइनिंग कंपनी के खाते से5 करोड़ 30 लाख रुपए पार कर दिए। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस ने महाराष्ट्र के पुणे से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।

कैसे हुआ 'व्हाट्सएप डीपी' का यह खेल?

पुलिस के अनुसार इसके लिए साइबर ठगों ने पूरी प्लानिंग की थी। ठगों ने पहले 'गैलेक्सी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड' कंपनी और उसके चेयरमैन दीपेंद्र सिंह राठौड़ की पूरी जानकारी जुटाई। इसके बाद सोशल मीडिया से चेयरमैन की फोटो निकालकर ठगों ने उसे एक नए नंबर की डीपी पर लगा दिया। इसके बाद ठगों ने कंपनी के अकाउंटेंट से व्हाट्सएप पर संपर्क किया। खुद को बॉस बताते हुए तत्काल भुगतान करने का दबाव बनाया।

अकाउंटेंट को भ्रमित कर लूट लिए करोड़ों

ठगों ने अकाउंटेंट को तुंरत दो बैंक खातों की डिटेल भेजी। पैसे जल्द से जल्द भेजने की बात की। वॉट्सएप पर बॉस की फोटो देखकर अकाउंटेंट को कोई शक नहीं हुआ। उसने तुरंत 5.30 करोड़ रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। बाद में सच सामने आने पर पीड़ित पक्ष ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।

दिहाड़ी मजदूर का निकला बैंक खाता

पूरे मामले की छानबीन में अभी पुलिस जुटी है। इस मामले में राजस्थान पुलिस डीआईजी (साइबर क्राइम) शांतनु कुमार सिंह और एसपी सुमित मेहरड़ा के सुपरविजन में टीम बनाई गई थी। तकनीकी जांच शुरू की, तो तार पुणे से जुड़े। पुलिस ने वहां से राहुल अशोक (32) को गिरफ्तार किया। पता चला है कि पकड़ा गया युवक मजदूरी करता है। पुलिस की सख्ती से पूछताछ ने कई राज का खुलासा हुआ है।

बैंक कर्मियों पर भी शक

राहुल कमीशन के लालच में साइबर अपराधियों को फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराता था। उसने पुणे के ही अमित सिंह के कहने पर फर्जी फर्म के नाम से करंट अकाउंट खुलवाया था। चौंकाने वाली बात यह है कि इस फर्जी खाते की क्रेडिट लिमिट मिलीभगत से 50 करोड़ रुपए तक बढ़ा दी गई थी। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इतनी बड़ी लिमिट मंजूर करने में किस बैंक कर्मी का हाथ था।

ये पुलिस टीम लाई सच बाहर

इस पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जयपुर के थानाधिकारी एवं उपाधीक्षक गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई थी। इसमें इंस्पेक्टर मुकेश, कांस्टेबल अमित और जयसिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्य आरोपी अमित सिंह की तलाश जारी है।

लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।

विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।

पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें

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