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झुंझुनूं के 45 बैक वाले छात्रों को जयपुर में एक साथ बैठाकर पास कराने का प्लान; ऐसे पलटा खेल

झुंझुनूं के 45 बैक वाले छात्रों को जयपुर में एक साथ बैठाकर पास कराने का प्लान; ऐसे पलटा खेल पुलिस ने इस मामले में दोनों कॉलेजों से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें एस. करण कॉलेज के हेड ऑफ डिपार्टमेंट कृष्ण कुमा…

Live Hindustan के अनुसार30 जून 2026 को 10:26 am बजे
झुंझुनूं के 45 बैक वाले छात्रों को जयपुर में एक साथ बैठाकर पास कराने का प्लान; ऐसे पलटा खेल

सौजन्य से:- Live Hindustan

झुंझुनूं के 45 बैक वाले छात्रों को जयपुर में एक साथ बैठाकर पास कराने का प्लान; ऐसे पलटा खेल

पुलिस ने इस मामले में दोनों कॉलेजों से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें एस. करण कॉलेज के हेड ऑफ डिपार्टमेंट कृष्ण कुमार, लेक्चरर शंकर लाल, प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज के संचालक रामकृष्ण मंडीवाल और उनके भतीजे देव कृष्ण शामिल हैं।

झुंझुनूं के एस. करण कॉलेज के फर्स्ट ईयर में बैक आए 45 छात्रों को जयपुर के परीक्षा केंद्र पर एक साथ बैठाने की पूरी तैयारी थी। दावा है कि सभी को पास कराने के लिए लाखों रुपये का सौदा हुआ, लेकिन परीक्षा शुरू होने से पहले ही पूरी साजिश उजागर हो गई।

परीक्षा हॉल में आमतौर पर सन्नाटा होता है। छात्र अपनी कॉपी और सवालों में उलझे रहते हैं। लेकिन जयपुर के कालवाड़ रोड स्थित प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज में उस दिन माहौल बिल्कुल अलग था। यहां सिर्फ परीक्षा की तैयारी नहीं थी, बल्कि आरोप है कि 45 छात्रों को किसी भी कीमत पर पास कराने की पूरी पटकथा पहले से लिखी जा चुकी थी। योजना इतनी सुनियोजित थी कि सभी छात्रों को एक ही कमरे में बैठाकर सामूहिक नकल कराई जानी थी। लेकिन परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले पूरा खेल बिगड़ गया और कथित साजिश बेनकाब हो गई।

45 छात्रों की बैक, पास होने की बेचैनी और लाखों की डील

पुलिस जांच में सामने आया कि झुंझुनूं जिले के मुकुंदगढ़ स्थित एस. करण कॉलेज के 45 छात्रों के फर्स्ट ईयर में बैक लगी हुई थी। परीक्षा उनके लिए सिर्फ एक औपचारिक टेस्ट नहीं, बल्कि पूरे साल का भविष्य तय करने वाला मौका थी। आरोप है कि इसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए उन्हें पास कराने के लिए 5 लाख 50 हजार रुपये की डील तय की गई। योजना यह थी कि सभी छात्रों को एक ही कमरे में बैठाया जाएगा, ताकि सामूहिक रूप से नकल कराकर किसी को भी फेल न होने दिया जाए।

परीक्षा शुरू होने से पहले पहुंच गई पुलिस

इस पूरे मामले की भनक पुलिस कंट्रोल रूम को एक दिन पहले ही लग गई थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए खोराबीसल थाना पुलिस और डिस्ट्रिक्ट स्पेशल टीम ने पूरी रणनीति बनाई। परीक्षा शुरू होने से पहले टीम कॉलेज पहुंची और संदिग्ध गतिविधियों की जांच शुरू कर दी। शुरुआती पूछताछ में मिले सुरागों ने पूरे मामले की परतें खोलनी शुरू कर दीं। इसके बाद परीक्षा केंद्र पर चल रही कथित तैयारी धरी की धरी रह गई और छात्रों को एक साथ बैठाकर नकल कराने की योजना नाकाम हो गई।

एक कमरे में बैठाने की थी पूरी तैयारी

जांच में सामने आया कि परीक्षा केंद्र पर 45 छात्रों को एक ही कमरे में बैठाने की व्यवस्था पहले से कर ली गई थी। आरोप है कि यह कोई सामान्य संयोग नहीं था, बल्कि पूरी योजना का सबसे अहम हिस्सा था। मकसद था कि सभी छात्र एक-दूसरे की मदद से आसानी से प्रश्नपत्र हल कर सकें और किसी की परीक्षा खराब न हो। लेकिन पुलिस की कार्रवाई ने इस कथित प्लान को परीक्षा शुरू होने से पहले ही रोक दिया।

चार लोग गिरफ्तार, कई सवाल बाकी

पुलिस ने इस मामले में दोनों कॉलेजों से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें एस. करण कॉलेज के हेड ऑफ डिपार्टमेंट कृष्ण कुमार, लेक्चरर शंकर लाल, प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज के संचालक रामकृष्ण मंडीवाल और उनके भतीजे देव कृष्ण शामिल हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल थे, क्या यह पहली बार हुआ या पहले भी इसी तरह की व्यवस्थाएं की जाती रही थीं।

कार्रवाई के बाद परीक्षा केंद्र में मचा हंगामा

जैसे ही कार्रवाई की खबर परीक्षा केंद्र में फैली, माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। कई छात्र नाराज हो गए और कॉलेज परिसर में विरोध शुरू हो गया। देखते ही देखते टेबल और कुर्सियां फेंकी जाने लगीं। कॉलेज प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी होने लगी और पूरे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

यह मामला सिर्फ 45 छात्रों तक सीमित नहीं है। इसने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल नकल कराने की कोशिश नहीं, बल्कि मेहनत से परीक्षा देने वाले हजारों छात्रों के साथ अन्याय की कोशिश भी है। एक तरफ वे छात्र हैं जो महीनों की मेहनत के भरोसे परीक्षा हॉल तक पहुंचते हैं, वहीं दूसरी तरफ कथित तौर पर पैसे के दम पर सफलता खरीदने की कोशिश की जा रही थी।

फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि इस कथित डील के पीछे और कौन लोग थे, पैसा किस-किस तक पहुंचना था और क्या पहले भी इसी तरह से परीक्षाओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। अब इस जांच के जवाब ही तय करेंगे कि यह मामला सिर्फ एक परीक्षा केंद्र तक सीमित था या इसके तार कहीं और भी जुड़े हुए हैं।

लेखक के बारे में

Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)

सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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