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राजस्थान पंचायत चुनाव में कांग्रेस ने 41 जिलों में पर्यवेक्षक लगाए; वैभव गहलोत को अलवर की जिम्मेदारी

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Hindustan के अनुसार10 अक्टूबर 2026 को 06:04 am बजे
राजस्थान पंचायत चुनाव में कांग्रेस ने 41 जिलों में पर्यवेक्षक लगाए; वैभव गहलोत को अलवर की जिम्मेदारी

सौजन्य से:- Hindustan

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By Sachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान

पार्टी की इस नियुक्ति को निकाय चुनाव के अनुभवों से जोड़कर देखा जा रहा है। निकाय चुनाव में कई जगह बहुमत मिलने के बावजूद बोर्ड नहीं बना पाने के बाद कांग्रेस इस बार किसी तरह की चूक नहीं करना चाहती। यही वजह है कि जिलेवार पर्यवेक्षकों के साथ पंचायत समितिवार प्रभारियों की भी नियुक्ति की गई है।

राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने चुनावी मैनेजमेंट को मजबूत करने के लिए 41 जिला पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। इनमें 5 सांसद और 7 विधायक भी शामिल हैं। कांग्रेस ने इस बार केवल टिकट वितरण और चुनाव प्रचार तक अपनी रणनीति सीमित नहीं रखी है, बल्कि मतदान के बाद पंचायत समितियों में प्रधान और जिला परिषदों में प्रमुख बनाने तक की जिम्मेदारी नेताओं को सौंपने की तैयारी की है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को अलवर जिले का पर्यवेक्षक बनाया गया है, जो नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का गृह जिला है।

पार्टी की इस नियुक्ति को निकाय चुनाव के अनुभवों से जोड़कर देखा जा रहा है। निकाय चुनाव में कई जगह बहुमत मिलने के बावजूद बोर्ड नहीं बना पाने के बाद कांग्रेस इस बार किसी तरह की चूक नहीं करना चाहती। यही वजह है कि जिलेवार पर्यवेक्षकों के साथ पंचायत समितिवार प्रभारियों की भी नियुक्ति की गई है। इसके अलावा कंट्रोल रूम बनाकर चुनावी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

कांग्रेस ने अलग-अलग जिलों में अनुभवी नेताओं को पर्यवेक्षक बनाकर संगठन और चुनावी समीकरण साधने की कोशिश की है। वैभव गहलोत को अलवर की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, सांसद मुरारीलाल मीणा को भरतपुर और डीग, विधायक रोहित बोहरा को उदयपुर और सलूंबर तथा विधायक रफीक खान को डूंगरपुर और बांसवाड़ा का पर्यवेक्षक बनाया गया है।

सेवादल के प्रदेश मुख्य संगठक हेम सिंह शेखावत को जोधपुर और फलौदी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूर्व विधायक डॉ. कृष्णा पूनिया नागौर और डीडवाना-कुचामन में चुनावी गतिविधियों पर नजर रखेंगी। पार्टी ने इन नेताओं को एक से अधिक जिलों की जिम्मेदारी देकर चुनावी प्रबंधन में उनकी भूमिका बढ़ाई है।

कांग्रेस ने पंचायतीराज चुनाव में अपने सांसदों और विधायकों को भी सक्रिय भूमिका में उतारा है। पर्यवेक्षक बनाए गए पांच सांसदों में मुरारीलाल मीणा, कुलदीप इंदौरा, भजनलाल जाटव, बृजेंद्र ओला और उम्मेदाराम बेनीवाल शामिल हैं।

वहीं, सात विधायकों को भी पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें रामकेश मीणा, रोहित बोहरा, अमीन कागजी, प्रमोद जैन भाया, डूंगरराम गेदर और अनिल शर्मा शामिल हैं। सातवें विधायक का नाम जारी सूची में अलग से स्पष्ट नहीं है।

जिला स्तर पर भी पार्टी ने कई वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी है। अजमेर में सुखराम बिश्नोई, अलवर में वैभव गहलोत, बाड़मेर और बालोतरा में करण सिंह उचियारड़ा, भीलवाड़ा में डॉ. रघु शर्मा, बीकानेर में उदयलाल आंजना और जयपुर में प्रमोद जैन भाया को पर्यवेक्षक बनाया गया है।

इसके अलावा झालावाड़ में डूंगर राम गेदर, कोटा में डॉ. जितेन्द्र सिंह, पाली में अनिल शर्मा, राजसमंद में अशोक चांदना, सिरोही में मनीषा पंवार, दौसा में अमीन कागजी, जालोर में गोविंद राम मेघवाल और झुंझुनूं में ममता भूपेश को जिम्मेदारी दी गई है। करौली में शकुंतला रावत, सीकर में परसादी लाल मीणा, बारां में प्रताप सिंह खाचरियावास और ब्यावर में हरसहाय यादव को पर्यवेक्षक बनाया गया है।

भरतपुर-डीग में मुरारीलाल मीणा, बूंदी में कुलदीप इंदौरा, चित्तौड़गढ़ में भजनलाल जाटव, चूरू में सारिका चौधरी, धौलपुर में महेंद्र चौधरी, श्रीगंगानगर में उम्मेदाराम बेनीवाल और हनुमानगढ़ में एमडी चोपदार को जिम्मेदारी सौंपी गई है। खैरथल-तिजारा में धर्मेंद्र राठौड़, प्रतापगढ़ में सुमित भगासरा, सवाई माधोपुर में शाले मोहम्मद, टोंक में बृजेंद्र सिंह ओला और जैसलमेर में प्रहलाद गुंजल चुनावी गतिविधियों पर नजर रखेंगे।

पर्यवेक्षकों की भूमिका सिर्फ चुनावी प्रचार तक सीमित नहीं रहेगी। ये नेता उम्मीदवारों के चयन, टिकट वितरण के बाद चुनाव चिह्न समय पर जमा कराने, प्रचार की रणनीति तैयार करने और मतदान के बाद की परिस्थितियों पर नजर रखेंगे। साथ ही प्रदेशाध्यक्ष को लगातार फीडबैक भी देंगे।

चुनाव परिणाम आने के बाद पंचायत समितियों में प्रधान और जिला परिषदों में प्रमुख बनाने के लिए राजनीतिक समीकरण साधना भी अहम रहेगा। जरूरत पड़ने पर निर्वाचित सदस्यों को एकजुट रखने और बाड़ेबंदी के प्रबंधन में भी पर्यवेक्षकों की भूमिका होगी।

कांग्रेस की नई रणनीति से साफ है कि पार्टी पंचायतीराज चुनाव में संगठनात्मक स्तर पर ज्यादा सतर्कता बरतना चाहती है। निकाय चुनाव में बहुमत के बावजूद बोर्ड गठन में आई मुश्किलों ने पार्टी को चुनाव के बाद की रणनीति पर भी ध्यान देने के लिए मजबूर किया है।

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)

सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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