राजस्थान के सीकर में घूस लेते यूपी पुलिस के 4 पुलिसकर्मी गिरफ्तार, भागने के चक्कर में ACB की गाड़ी को मारी टक्कर
योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही है, लेकिन उसका खौफ खाकी वर्दी पर नहीं दिख रहा है। रोज घूसखोरी के मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला राजस्थान के सीकर से आया है। हेमेन्द्र त्रिपाठी, लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस में अलग…

सौजन्य से:- Navbharat Times
योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही है, लेकिन उसका खौफ खाकी वर्दी पर नहीं दिख रहा है। रोज घूसखोरी के मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला राजस्थान के सीकर से आया है।
हेमेन्द्र त्रिपाठी, लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस में अलग-अलग जिलों में तैनात कुछ पुलिसकर्मियों पर अक्सर घूसखोरी जैसे गंभीर आरोप लगते हैं, जिसके चलते उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े होने के साथ खाकी पर भी बड़ा दाग लगता है। खाकी को दागदार करने का नया मामला एक बार फिर सामने आया है। अयोध्या साइबर क्राइम थाने में तैनात 1 सब-इंस्पेक्टर और 3 सिपाहियों को राजस्थान की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी ACB की टीम ने सीकर में 2.80 लाख रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया।
बताया जाता है कि ACB के हत्थे चढ़ने के दौरान आरोपियों ने गाड़ी से भागने का प्रयास किया और ACB की सरकारी गाड़ी को भी जोरदार टक्कर मार दी। हालांकि, मुस्तैद टीम ने चारों को मौके पर ही धर दबोचा। इस मामले के सामने आने के बाद यूपी पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं।
मुकदमे से नाम हटाने के नाम पर मांगी थी 4 लाख की घूस
ACB के अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके भाई के खिलाफ अयोध्या के साइबर क्राइम थाने में साल 2024 से एक मुकदमा दर्ज है। इस मुकदमे से उसके भाई का नाम हटाने और केस रफा-दफा करने की एवज में अयोध्या साइबर सेल के पुलिसकर्मी घूस मांग रहे थे। बीते 17 अगस्त को ACB की ओर से शिकायत का गोपनीय तरीके से सत्यापन कराया गया, जिसमें कॉन्स्टेबल गौरव चारग द्वारा 4 लाख रुपये घूस के तौर पर मांगने की पुष्टि हुई। बताया जाता है कि बाद में आपस में मोलभाव के बाद 2.80 लाख रुपये में डील तय हुई।
रकम हाथ में आते ही ACB ने दबोचा
रिश्वत की पुष्टि के बाद राजस्थान के जयपुर ACB के डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन और सीकर ACB के एएसपी विजय कुमार व इंस्पेक्टर सुभाष मील के नेतृत्व में ट्रैप बिछाया गया। मंगलवार को तय योजना के तहत परिवादी जैसे ही 2.80 लाख रुपये लेकर पहुंचा, कॉन्स्टेबल सोहनलाल ने रकम अपने हाथ में ली। उसी वक्त एसीबी की टीम ने चारों तरफ से घेराबंदी कर दी। खुद को घिरता देख आरोपियों ने अपनी गाड़ी से एसीबी की गाड़ी को टक्कर मारकर भागने की कोशिश की, लेकिन टीम ने उन्हें दबोच लिया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में केस
सीकर एसीबी की ओर से गिरफ्तार किए गए चारों आरोपी उत्तर प्रदेश पुलिस के अयोध्या साइबर थाने में कार्यरत हैं। इनमें सब-इंस्पेक्टर यशवंत सिंह, कॉन्स्टेबल गौरव चारग, कॉन्स्टेबल सोहनलाल और कॉन्स्टेबल पवन त्रिपाठी शामिल हैं। एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) स्मिता श्रीवास्तव और आईजी एस. परिमला के निर्देशन में चारों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर गहन पूछताछ की जा रही है।
लेखक के बारे मेंविवेक मिश्राविवेक कुमार मिश्रा (Vivek Kumar Mishra) नवभारत टाइम्स ऑनलाइन (NBT.Com) में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर (Senior Digital Content Producer) हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीतिक-सियासी हलचल पर नजर रखते हैं। यूपी राजनीतिक विश्लेषण, उत्तर प्रदेश में हो रही घटनाओं पर नजर रखते हैं। उत्तर प्रदेश में अपराध, प्रशासन, डेवलपमेंट, यूपी सरकारी योजनाओं पर फोकस रखते हैं। उत्तराखंड की राजनीति हलचल, विश्लेषण, अपराध और घटनाक्रम पर भी विवेक कुमार मिश्रा फोकस रखते हैं।
अनुभव
यूपी के लखनऊ, मुरादाबाद, आगरा और नोएडा में हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक जागरण जैसे प्रिंट मीडिया में काम कर चुके हैं। दिसंबर 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन के साथ जुड़े हैं। पत्रकारिता में 10 साल से ज्यादा का अनुभव है। इसमें डेस्क और फील्ड दोनों में काम किया है।
शिक्षा
राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) में परास्नातक किया हुआ है। विवेक कुमार मिश्रा मूल रूप से यूपी के बाराबंकी जिले के रहने वाले हैं।... और पढ़ें
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