बलात्कार भी राजनीतिक लिबास पहने हुए है!
राजस्थान की एक बेटी के साथ बलात्कार का मामला सामने आया है, जिसमें 32 लोग शामिल थे। यह घटना हमारी सामूहिक खामोशी के बीच घटी और न्याय भी मौन बना रहा। यह प्रश्न उठता है कि हमारे देश में जब 31 हजार बलात्कार के मामले दर्ज होते हैं और केवल 30 फीसद बलात्कारी दंडित होते हैं, तो क्यों नहीं हमारे नेता इस मुद्दे पर मजबूत आवाज उठाते हैं?

सौजन्य से:- Jansatta
राजस्थान की एक बेटी की कहानी सुनकर पिछले सप्ताह मुझे दुख और गुस्से से ज्यादा शर्मिंदगी महसूस हुई। कैसा देश है हमारा कि एक बच्ची के साथ बत्तीस दरिंदों ने पांच दिनों तक बलात्कार किया और किसी को पता तक नहीं लगा। बच्ची को एक होटल से दूसरे होटल में ले जाया जाता था, फिर भी न शहर के शासकों को खबर हुई और न पुलिस को।
कैसे? क्यों? बच्ची को आटो चालक ने अगवा करके किसी होटल मालिक को बेचा। उसने आगे कई और होटल मालिकों के हवाले बच्ची को किया और इंटरनेट पर उसकी फोटो डाल कर दरिंदों को आमंत्रित किया।
किसी तरह जब वह इस नरक से जान बचा कर भागी, तो उसका इतना बुरा हाल हो चुका था कि उसकी जान अस्पताल में भी कोई नहीं बचा सका। दरिंदों को पकड़ कर रस्सियों से बांध कर शहर की सड़कों पर पिटवाने की घटना तो चर्चा का विषय बनी, लेकिन आगे क्या होगा वह भी सुन लीजिए। उनको जेल भेजा जाएगा जरूर और जिनकी थोड़ी बहुत पहुंच है, उनकी जमानत भी शायद हो जाएगी।
उसके बाद कई साल उन पर मुकदमा चलेगा। इतने साल गुजर जाएंगे कि दुनिया भूल जाएगी कि उनका अपराध क्या था। क्या आप जानते हैं कि उस बच्ची के बलात्कारियों के साथ क्या हुआ था, जिन्होंने उस मासूम को जम्मू के एक मंदिर में बेहोश कर उससे बलात्कार किया था और जब मरने वाली थी, तो उसे मार डाला उसका सिर फोड़ कर? दंडित हुए भी हैं क्या? कोई नहीं जानता, क्योंकि उस बच्ची की कहानी हम बहुत पहले भूल चुके हैं।
राजस्थान की इस बच्ची की कहानी सुन कर कई नेता-अभिनेता दुख व्यक्त कर चुके हैं सोशल मीडिया पर, बिल्कुल वैसे जैसे जम्मू की उस छोटी-सी बच्ची की कहानी सुन कर हुआ था। दुख व्यक्त करने वाले हमारे देश में बहुत सारे लोग हैं, लेकिन इस किस्म के घिनौने अपराधों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने के लिए बहुत कम लोग सामने आते हैं।
क्यों नहीं दुख व्यक्त करने वाले ये लोग दबाव डालते हैं हमारे शासकों पर कि जब बच्चियों के साथ ऐसा होता है, तो खास अदालतों में मुकदमा चलना चाहिए, ताकि दशकों तक मुकदमा चलता न रहे? क्यों नहीं ऊंची आवाज में कहते हैं कि भारत का सिर शर्म से झुक जाना चाहिए कि रोज इस देश में बलात्कार के मामले दर्ज होते हैं। हर साल 31 हजार मामले दर्ज होते हैं, लेकिन जब अदालतों तक बात पहुंचती है, तो केवल 30 फीसद बलात्कारी दंडित होते हैं।
ऐसा क्यों है? यह सवाल हमको बार-बार पूछना चाहिए अपने राजनेताओं से, लेकिन हम इसलिए पूछते नहीं हैं, क्योंकि हम जानते हैं कि इन लोगों को ऐसी बातों की कोई परवाह नहीं है। उनका ध्यान रहता है बड़ी-बड़ी चीजों पर जैसे कि संसद में महिलाओं के लिए सीटों को आरक्षित करना। जैसे महिलाओं के वोट बटोरने के लिए उनको हर महीने पंद्रह सौ से दो हजार रुपए दिलवाना, जैसे शहर की बसों में उनके लिए मुफ्त यात्रा का इंतजाम करना, लेकिन जब हमारे देश में किसी शर्मनाक घटना के बारे में जानकारी मिलती है, तो हमारे नेता अपने बिलों में घुस जाते हैं, ताकि उनके पास कोई शिकायत लेकर न आए।
लोकसभा के अंदर कुछ महिला सांसद हैं जो आवाज उठाती हैं जब कोई बहुत ही शर्मनाक घटना घटती है, लेकिन उसके बाद कभी नहीं मालूम करने की कोशिश करती हैं कि न्याय हुआ है उस बच्ची के साथ या नहीं? बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ। नारा अच्छा है, बहुत अच्छा है। अपने प्रधानमंत्री ने एक अरसा पहले यह नारा देश की बेटियों को दिया था और कई कोशिशें अपनी तरफ से की थीं यह साबित करने के लिए कि उनके दिल में देश की बेटियों के लिए कितना प्यार है, लेकिन वास्तव में प्यार जताना होता, तो प्रधानमंत्री ऐसी घटनाओं के खिलाफ अपनी आवाज तो कम से कम उठाते। राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। इसलिए इतना तो हो सकता है न कि मुख्यमंत्री अपनी आवाज उठाएं।
सच यह है कि बलात्कार भी राजनीतिक लिबास पहने हुए है। जब कोई घटना घटती है किसी कांग्रेस शासित राज्य में, तो भाजपाई खूब हल्ला मचाते हैं और जब भाजपा शासित राज्यों में ऐसी घटनाएं होती हैं, तो हल्ला बोलते हैं कांग्रेस के लोग। इन नेताओं के आंसू घड़ियाली न होते, तो देश की बेटियों की किस्मत इतनी बुरी न होती। दरिंदों को रोकना है, तो सामाजिक स्तर पर काम होना जरूरी है और कानूनी स्तर पर भी। ये सारी चीजें तब होने लगेंगी, जब राजनेता नेतृत्व दिखाएंगे।
राजस्थान की उस बेटी के आंसू पोंछने चिराग पासवान पहुंचे थे, लेकिन अक्सर इतना भी हमारे नेता नहीं करते हैं। नतीजा यह कि पुलिस-प्रशासन को संदेश यही जाता है कि जिस सुस्ती से न्याय होता है देश में वैसे ही चलता रहे। और हम मीडियाकर्मियों ने इतनी बार इस तरह की शर्मनाक घटनाएं देखी हैं कि आदत डाल ली है इनको अनदेखा करने की। आखिर कितनी बार हम वही कहानी कहते रहेंगे? फलाने शहर में फलाने लोगों ने एक मासूम के साथ इतनी बार बलात्कार किया कि वह मर गई।
मीडिया की तरफ से मैं माफी मांगने के लिए तैयार हूं, लेकिन इससे आगे क्या कर सकती हूं अलावा इसके कि जब भी ऐसी घटनाएं सामने आएंगी, मैं उनके बारे में विस्तार से लिखूंगी, ताकि आपके दिलों में भी थोड़ा दर्द, थोड़ी शर्म और बहुत ज्यादा गुस्सा आए। इतना गुस्सा कि हम सब मिल कर इस देश की बेटियों की आवाज बन जाएं और अपने शासकों को याद दिलाएं कि सभ्य देशों में ऐसी चीजें नहीं होती हैं।
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