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राजस्थान में पंचायत चुनावों की स्थिति अबतक क्यों साफ नहीं, जानिए राज्य निर्वाचन आयोग की कहानी

राजस्थान में पंचायत चुनाव 31 जुलाई तक हो पाएंगे क्या? यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है। ओबीसी आयोग की सिफारिश पर आरक्षण तय होने की प्रक्रिया जारी है, जिसके बाद ही चुनाव की तैयारियां शुरू हो सकती हैं।

Navbharat Times के अनुसार8 जुलाई 2026 को 04:23 am बजे
राजस्थान में पंचायत चुनावों की स्थिति अबतक क्यों साफ नहीं, जानिए राज्य निर्वाचन आयोग की कहानी

सौजन्य से:- Navbharat Times

ओबीसी आयोग की सिफारिश पर होगा तय

आयोग ने स्पष्ट किया कि यह समयसीमा तब लागू होगी, जब राज्य सरकार अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और महिलाओं के लिए आरक्षण का निर्धारण कर दे। यह निर्धारण सरकार स्वयं या ओबीसी आयोग की सिफारिशों के आधार पर कर सकती है।31 जुलाई तक पंचायत और नगर निकाय चुनाव होने थे संपन्न

राजस्थान हाईकोर्ट ने 22 मई को दिए अपने आदेश में राज्य निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई तक पंचायत और नगर निकाय चुनाव संपन्न कराने का निर्देश दिया था।हालांकि, ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण की स्थिति अभी तक तय नहीं हो पाई है, जिससे निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव कराना मुश्किल माना जा रहा है। हाल ही में पंचायती राज विभाग ने निर्वाचन आयोग को बताया था कि ओबीसी आयोग अपनी आरक्षण संबंधी रिपोर्ट 14 अगस्त 2026 तक सौंप सकता है।90 दिन की आवश्यकता

इस रिपोर्ट के आधार पर विभाग 31 अगस्त तक सभी वर्गों के लिए आरक्षण तय करने की योजना बना रहा है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निर्वाचन आयोग चुनाव की तैयारियां शुरू कर सकेगा। अपने जवाब में राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा है कि आरक्षण तय होने और चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद पूरी चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के लिए उसे 90 दिन की आवश्यकता होगी।50 दिन लगेंगे अभी

आयोग के अनुसार, पंचायत चुनावों में लगभग 50 दिन लगेंगे और पंचायतों की संख्या अधिक होने तथा व्यवस्थागत कारणों से इन्हें चार चरणों में कराया जा सकता है। वहीं, शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों में करीब 40 दिन लगेंगे और इन्हें दो चरणों में आयोजित किए जाने की संभावना है। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने स्थानीय निकाय चुनावों में लगातार हो रही देरी की आलोचना की।उन्होंने आईएएनएस से कहा, 'भाजपा सरकार को हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, लोकसभा और संविधान की परवाह नहीं रह गई है। सरकार 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' की सोच पर काम कर रही है, इसलिए जानबूझकर चुनावों में देरी की जा रही है। निर्वाचन आयोग बिना आंकड़ों के चुनाव नहीं करा सकता और सरकार जरूरी आंकड़े उपलब्ध नहीं करा रही है।'

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