राजस्थान हाई कोर्ट ने पॉक्सो मामले में आरोपी को दी जमानत, 3 साल तक सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाई
राजस्थान हाईकोर्ट ने जमानत के एक मामले में कड़ी शर्तें भी लगाईं, जिनमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, थ्रेड और स्नैपचैट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर तीन साल की रोक शामिल है। मामला पॉक्सो से जुड़ा हुआ है। जोधपुर: राजस्थान…

सौजन्य से:- Navbharat Times
राजस्थान हाईकोर्ट ने जमानत के एक मामले में कड़ी शर्तें भी लगाईं, जिनमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, थ्रेड और स्नैपचैट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर तीन साल की रोक शामिल है। मामला पॉक्सो से जुड़ा हुआ है।
जोधपुर: राजस्थान हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐसे व्यक्ति को जमानत दे दी, जिस पर एक नाबालिग लड़की की फोटो को मॉर्फ करके सोशल मीडिया पर अपलोड करने का आरोप था। कोर्ट ने जमानत के साथ कड़ी शर्तें भी लगाईं, जिनमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, थ्रेड और स्नैपचैट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर तीन साल की रोक शामिल है। जोधपुर बेंच के जस्टिस अशोक कुमार जैन की सिंगल बेंच ने राजसमंद जिले के भीम पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 77 के तहत दर्ज मामले में आरोपी की जमानत याचिका मंजूर करते हुए यह आदेश दिया।
आरोपी तीन साल सोशल मीडिया यूज नहीं कर पाएगा
राजस्थान हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि आरोपी तीन साल की अवधि के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम, थ्रेड, स्नैपचैट आदि सहित किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग न करने के लिए ट्रायल कोर्ट के समक्ष एक वचन-पत्र जमा करेगा। अदालत ने आगे निर्देश दिया कि यदि यह पाया जाता है कि आवेदक-आरोपी अपने नाम या किसी फर्जी नाम से किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहा है तो ट्रायल कोर्ट द्वारा ही उसका जमानत आदेश वापस लिया जा सकता है।
पीड़िता की मां दर्ज करवाया था मामला
अदालत के आदेश में आरोपी को पीड़िता या उसके परिवार के किसी भी सदस्य से संपर्क करने से भी रोका गया है और निर्देश दिया गया है कि वह ट्रायल कोर्ट द्वारा आपराधिक मामले के निपटारे तक पीड़िता या उसके परिवार के किसी भी सदस्य से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क नहीं करेगा या संदेश नहीं भेजेगा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इसी साल फरवरी में एफआईआर नाबालिग पीड़िता की मां द्वारा दर्ज कराई गई थी। यह शिकायत 18 सितंबर और 16 अक्टूबर, 2025 के बीच हुई कथित घटना के संबंध में थी।
जांच के दौरान, पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया और बाद में बीएनएस की धारा 77, बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धारा 11 और 12 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67ए के तहत चार्जशीट दाखिल की।
अदालत ने दिया ये आदेश
अदालत के आदेश में दर्ज है कि पीड़िता का बयान पहले ही अभियोजन पक्ष के गवाह-1 के रूप में दर्ज किया जा चुका है, जबकि शिकायतकर्ता का बयान ट्रायल कोर्ट के समक्ष पीडब्यू-2 के रूप में दर्ज किया गया है। सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि उसे मामले में झूठा फंसाया गया है और जांच पूरी हो चुकी है, जिससे उसे आगे हिरासत में रखकर पूछताछ करने की आवश्यकता नहीं है। यह भी कहा गया कि आरोपी के खिलाफ एकमात्र आरोप यह था कि उसने पीड़िता की एक मॉर्फ्ड तस्वीर तैयार की थी और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड किया था।
वकीलों की ओर से की गई ये जिरह
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी 2 अप्रैल 2026 से हिरासत में है और यदि अदालत की यह राय है कि उसने ऐसे प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किया है तो वह सोशल मीडिया का उपयोग न करने का वचन देता है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि आरोपी एक युवा है जिसकी पीड़िता से दोस्ती थी और उन्होंने उसके लिए खुद को सुधारने का मौका मांगा। इस अर्जी का विरोध करते हुए, शिकायतकर्ता के वकील और सरकारी वकील ने कहा कि पीड़िता का बयान पहले ही ट्रायल कोर्ट के सामने दर्ज किया जा चुका है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद लिया गया यह निर्णय
दोनों पक्षों को सुनने के बाद, राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा कि मौजूदा आरोपी पर आरोप है कि उसने पीड़िता को बदनाम करने के लिए एक मॉर्फ्ड तस्वीर तैयार की। जस्टिस जैन ने कहा, 'आरोपी ने सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल किया है, इसलिए कम से कम तीन साल तक सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाना उचित है ताकि वह किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल न करने का सबक सीख सके।' कोर्ट के आदेश में जज ने आगे कहा कि पीड़िता और शिकायतकर्ता के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं, इसलिए किसी भी तरह के प्रभाव की कोई गुंजाइश नहीं है।
कोर्ट ने भरवाया पर्सनल बॉन्ड
जमानत देते हुए जस्टिस जैन ने आरोपी को निर्देश दिया कि वह ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के लिए 50,000 रुपए का पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही राशि की दो जमानत जमा करे। राजस्थान हाई कोर्ट ने आरोपी को सुनवाई के लिए तय तारीखों पर ट्रायल कोर्ट के सामने पेश होने का निर्देश भी दिया और स्पष्ट किया कि जमानत की शर्तों का कोई भी उल्लंघन होने पर जमानत रद्द की जा सकती है।
लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।
विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।
पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें
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