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राजस्थान वन विभाग की तबादला चूक: मृत वनपाल का तबादला कैसे?

राजस्थान वन विभाग ने जारी तबादला सूची में मृत वनपाल अखिलेश डूडी का नाम शामिल किया है, जिसने 7 अप्रैल को आत्महत्या कर ली थी। सूची में उनका नाम कैसे शामिल हुआ, इसके बारे में जानने के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट। सूत्र: दैनिक भास्कर

Hindustan के अनुसार12 जुलाई 2026 को 06:01 am बजे
राजस्थान वन विभाग की तबादला चूक: मृत वनपाल का तबादला कैसे?

सौजन्य से:- Hindustan

राजस्थान के अलवर में 3 महीने पहले सुसाइड कर चुके वनपाल का किया तबादला

वनपाल अखिलेश डूडी का शव 7 अप्रैल को अलवर जिले के अकबरपुर थाना क्षेत्र स्थित सिलीसेढ़ तिराहे पर उमरैण रेंज वन चौकी में मिला था। उस दिन सुबह ड्यूटी पर पहुंचे एक ठेका कर्मचारी ने कमरे का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद देखा।

राजस्थान वन विभाग की तबादला सूची में ऐसी बड़ी प्रशासनिक चूक सामने आई है, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग ने जिस वनपाल का तबादला किया, वह तीन महीने पहले ही आत्महत्या कर चुका था। शुक्रवार देर रात करीब 2 बजे जारी 125 वनपालों (फॉरेस्टर) की तबादला सूची में मृतक वनपाल अखिलेश डूडी का नाम भी शामिल मिला। मामला सामने आने के बाद विभाग की रिकॉर्ड प्रणाली और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं।

मृत वनपाल को सरिस्का वायरलेस कंट्रोल रूम में दी नई पोस्टिंग

वन विभाग की ओर से जारी ट्रांसफर लिस्ट में क्रम संख्या 101 पर वनपाल अखिलेश डूडी का नाम दर्ज है। सूची के अनुसार उनका वर्तमान पदस्थापन नाका उमरैण, रेंज अलवर बफर, उप वन संरक्षक, सरिस्का बाघ परियोजना, अलवर दर्शाया गया है। वहीं आदेश में उनका तबादला सरिस्का वायरलेस कंट्रोल रूम, उप वन संरक्षक, सरिस्का बाघ परियोजना, अलवर कर दिया गया।

हैरानी की बात यह है कि अखिलेश डूडी की मौत करीब तीन महीने पहले हो चुकी थी। इसके बावजूद उनका नाम तबादला सूची में शामिल होना विभागीय रिकॉर्ड के अपडेट नहीं होने और प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।

7 अप्रैल को कमरे में फंदे से लटका मिला था शव

वनपाल अखिलेश डूडी का शव 7 अप्रैल को अलवर जिले के अकबरपुर थाना क्षेत्र स्थित सिलीसेढ़ तिराहे पर उमरैण रेंज वन चौकी में मिला था। उस दिन सुबह ड्यूटी पर पहुंचे एक ठेका कर्मचारी ने कमरे का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद देखा। काफी देर तक कोई जवाब नहीं मिलने पर वह पीछे के रास्ते से कमरे में पहुंचा, जहां अखिलेश डूडी का शव फंदे से लटका मिला।

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और अकबरपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया और कमरे से शराब के पव्वे भी बरामद किए थे। इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर आत्महत्या के कारणों की जांच शुरू की गई थी।

तबादला उद्योग बना दिया - टीकाराम जूली

इस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का कहना है कि इन्होंने तबादला उद्योग खोल रखा है। ठसक निकालने के लिए तबादले कर रहे है जरूरत के आधार पर भी तबादले किए जाते है एक तरफ़ तो नरेंद्र मोदी ने कहा था की तबादलों से दूर रहना ये लोग उनकी बात ही नहीं सुन रहे ऐसा नहीं होना चाहिए।

आठ साल से उमरैण नाके पर थे तैनात

अखिलेश डूडी मूल रूप से खैरथल के रहने वाले थे। वे पिछले करीब आठ वर्षों से उमरैण नाके पर वनपाल के रूप में कार्यरत थे। उनके परिवार में तीन बच्चे हैं। उनकी मौत के बाद पूरे विभाग में शोक की लहर थी और विभागीय अधिकारियों ने भी घटना पर दुख जताया था।

ऐसे में तीन महीने बाद जारी ट्रांसफर सूची में उनका नाम शामिल होना कई सवाल खड़े कर रहा है। यदि कर्मचारी की मृत्यु के बाद भी विभागीय रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुआ, तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया की गंभीर खामी मानी जा रही है।

विभागीय रिकॉर्ड पर उठे सवाल

तबादला सूची में मृत कर्मचारी का नाम शामिल होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रांसफर सूची तैयार करने से पहले कर्मचारियों का रिकॉर्ड सत्यापित नहीं किया गया? आमतौर पर तबादला आदेश जारी करने से पहले संबंधित कर्मचारियों की सेवा स्थिति, पदस्थापन और विभागीय रिकॉर्ड का मिलान किया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिकॉर्ड समय पर अपडेट नहीं किए गए या सत्यापन प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई, तो इस तरह की गलतियां प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर असर डालती हैं।

पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी चूकें

राजस्थान में तबादला सूचियों में गड़बड़ियों के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। हाल ही में पटवारियों की तबादला सूची में भी नामों को लेकर विवाद हुआ था। अब वन विभाग की सूची में मृत वनपाल का नाम शामिल होने से एक बार फिर सरकारी विभागों की रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।

फिलहाल विभाग की ओर से इस मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। माना जा रहा है कि मामला उजागर होने के बाद संबंधित सूची में संशोधन किया जा सकता है। हालांकि इस घटना ने विभागीय कार्यप्रणाली, रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया और तबादला आदेश जारी करने से पहले होने वाली जांच की गंभीरता पर नई बहस छेड़ दी है।

लेखक के बारे में

Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)

सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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