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अजमेर पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला: नाबालिग को खरीदने और दरिंदगी करने वाले 3 दोषियों को 10-10 साल की कठोर जेल

अजमेर पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला: नाबालिग को खरीदने और दरिंदगी करने वाले 3 दोषियों को 10-10 साल की कठोर जेल कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने जुर्म साबित करने के लिए 16 गवाह और 42 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए. Publi…

ETV Bharat के अनुसार27 सितंबर 2026 को 04:04 am बजे
अजमेर पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला: नाबालिग को खरीदने और दरिंदगी करने वाले 3 दोषियों को 10-10 साल की कठोर जेल

सौजन्य से:- ETV Bharat

अजमेर पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला: नाबालिग को खरीदने और दरिंदगी करने वाले 3 दोषियों को 10-10 साल की कठोर जेल

कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने जुर्म साबित करने के लिए 16 गवाह और 42 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए.

Published : September 27, 2026 at 9:11 AM IST

अजमेर: पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत संख्या-एक ने नाबालिग लड़की की खरीद-फरोख्त और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में तीन दोषियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. कोर्ट ने तीनों अभियुक्तों पर 1 लाख 11 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है. अदालत ने अपने फैसले में मानव तस्करी को मानवता के खिलाफ एक संगठित और जघन्य अपराध बताते हुए इसे आधुनिक समाज का सबसे क्रूर चेहरा करार दिया.

मामला वर्ष 2024 का है, जिला बाल संरक्षण समिति ने पुलिस थाने में प्रकरण दर्ज करवाया था. नाबालिग को दूसरी बार जिसे बेचा गया, वह उसके साथ जबरन दुष्कर्म करता और उसके साथ मारपीट भी करता था. नाबलिग ने गूगल पर सर्च कर चाइल्ड हेल्पलाइन को फोन कर उस पर हो रहे अत्याचार की सूचना दी थी, पुलिस की मदद से नाबालिग लड़की को छुड़वा लिया गया था.

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विशिष्ट लोक अभियोजक प्रशांत यादव ने बताया कि यह मामला एक मासूम बच्ची की बेबसी और सुनियोजित मानव तस्करी का दिल दहला देने वाला उदाहरण है. 12 जनवरी 2024 को जिला बाल कल्याण समिति के निर्देश पर जब पीड़िता को अजमेर के बालिका गृह लाया गया, तब काउंसलिंग के दौरान उसने अपनी दर्दनाक आपबीती सुनाई. पीड़िता जब महज आठ वर्ष की थी, तब उसके पिता शराब पीकर मां के साथ मारपीट करते थे. पारिवारिक कलह के चलते मां उसे छोड़कर किसी अन्य व्यक्ति के साथ ओडिशा के पुरी चली गई. बच्ची भुवनेश्वर में अपनी दादी और पिता के पास रह रही थी. दादी ने उसे पढ़ाई के लिए सेवासदन स्कूल में दाखिल कराया, जहां वह पांच साल तक रही. पिता की मृत्यु के बाद वह फिर दादी के पास लौटी, लेकिन कुछ समय बाद मां अचानक आई और घुमाने के बहाने उसे अपने साथ ले गई.

काउंसलिंग के दौरान उसने बताया कि ढाई वर्ष तक वह अपनी मां के साथ रही थी. उसने बताया कि वह पढ़ना चाहती थी लेकिन उसकी मां ने उसे पढ़ने नहीं दिया और वह उसे घर में बंद रखती थी. उसे सारा घर का काम करवाती थी और तीन पालतू कुत्तों की देखभाल भी करवाती थी. मुकदमा दर्ज होने से 2 महीने पहले मां ने उससे कहा कि तेरी शादी करवानी है, लेकिन मैने मना कर दिया. मेरे मना करने पर मां और अन्य घर वालों ने मुझे बहुत मारा इसलिए मुझे शादी के लिए हां करनी पड़ी. इसके बाद मां और उसके रिश्तेदार बच्ची को राजस्थान के बूंदी ले आए, जहां सोनू उर्फ आदित्य नामक व्यक्ति को 45 हजार रुपये में उसे बेच दिया गया. सोनू ने उसे बूंदी में लड्डू बनाने के एक कारखाने में बंधुआ मजदूर की तरह रखा और काम करवाया. इसके बाद सोनू ने उसे महेंद्र नाम के शख्स को सौंप दिया. महेंद्र ने उस पर और ज्यादती करते हुए दर्जनों अनजान लोगों से मिलवाया, जिससे बच्ची मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गई.

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सोनू और महेंद्र बच्ची को बूंदी से जहाजपुर होते हुए केकड़ी ले गए, जहां विष्णु नामक युवक को डेढ़ लाख रुपये में उसका सौदा कर दिया गया. विष्णु ने उसे अपने घर में बंधक बना लिया. आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे पहचान पत्र में उसकी उम्र 18 वर्ष दर्ज करवा दी और अजमेर ले जाकर विष्णु के साथ उसकी जबरन कोर्ट मैरिज करा दी. इसके बाद विष्णु लगातार उसके साथ मारपीट करता था.

चाइल्ड हेल्पलाइन से मिली जिंदगी : लगातार जुल्म सह रही बच्ची ने हिम्मत नहीं हारी. एक दिन जब विष्णु उसके साथ जबरदस्ती कर रहा था, तो बच्ची के जोर-जोर से चिल्लाने पर पकड़े जाने के डर से विष्णु मौके से भाग निकला. भागते वक्त विष्णु का मोबाइल वहीं छूट गया. बच्ची ने तुरंत उस फोन से गूगल पर सर्च कर 'चाइल्ड हेल्पलाइन' का नंबर निकाला और अपनी आपबीती बताते हुए मदद की गुहार लगाई. सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई, बताए गए पते पर दबिश देकर बच्ची को सुरक्षित मुक्त कराया और अजमेर बालिका गृह भेजा.

16 गवाह और 42 दस्तावेज कोर्ट में किए पेश : यादव ने बताया कि जिला बाल संरक्षण समिति की शिकायत पर सांवर थाने में प्रकरण दर्ज किया गयाय उसके बाद पुलिस ने दुष्कर्म और पोक्सो की धारा के अलावा अन्य कई धाराओं में मामला दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया. अभियोजन पक्ष की ओर से 16 गवाह और 42 दस्तावेज कोर्ट में प्रदर्शित किए गए. कोर्ट ने आरोपी सोनू उर्फ आदित्य, महेंद्र और विष्णु को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 1 लाख 11 हजार रुपए के आर्थिक दंड से दंडित किया है.

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अदालत की सख्त टिप्पणी : सजा सुनाते हुए अदालत ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि मानव तस्करी व्यक्ति की स्वतंत्रता, गरिमा और मौलिक अधिकारों को कुचलने वाला अपराध है. यह केवल एक व्यक्ति का शोषण नहीं, बल्कि पूरे समाज की नींव खोखली करने वाला एक सिंडिकेट है, जो मासूमों को जबरन मजदूरी और देह व्यापार के अंधेरे में धकेल देता है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्याय के उद्देश्य और सामाजिक सुरक्षा के लिए ऐसे कृत्यों के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाना अनिवार्य है. साथ ही, अदालत ने मामले के तत्कालीन जांच अधिकारी की लापरवाही पर भी गहरी नाराजगी जताई. कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच अधिकारी ने निष्पक्ष व गहरी जांच के बजाय केवल खानापूर्ति की, जिसके चलते आरोपियों को कानूनी तौर पर कुछ धाराओं का अनुचित लाभ मिल गया.

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