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जोधपुर नगर निगम चुनाव 2026: अशोक गहलोत और गजेंद्र सिंह शेखावत की प्रतिष्ठा दांव पर

जोधपुर नगर निगम चुनाव 2026: अशोक गहलोत और गजेंद्र सिंह शेखावत की प्रतिष्ठा दांव पर गहलोत और शेखावत दोनों ने ही जोधपुर में अपनी–अपनी पार्टी का बोर्ड बनाने का दावा किया है. Published : September 10, 2026 at 8:09 PM IST जोध…

ETV Bharat के अनुसार10 सितंबर 2026 को 04:05 pm बजे
जोधपुर नगर निगम चुनाव 2026: अशोक गहलोत और गजेंद्र सिंह शेखावत की प्रतिष्ठा दांव पर

सौजन्य से:- ETV Bharat

जोधपुर नगर निगम चुनाव 2026: अशोक गहलोत और गजेंद्र सिंह शेखावत की प्रतिष्ठा दांव पर

गहलोत और शेखावत दोनों ने ही जोधपुर में अपनी–अपनी पार्टी का बोर्ड बनाने का दावा किया है.

Published : September 10, 2026 at 8:09 PM IST

जोधपुर: नगर निगम चुनाव के लिए शुक्रवार को मतदान होगा. एकीकृत जोधपुर नगर निगम के इस बार के चुनाव से पूर्व सीएम अशोक गहलोत, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल सहित कई विधायकों की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई हैं. प्रदेश की भजनलाल सरकार के लिए भी यह चुनाव अहम है, जिसके चलते यहां संगठन के बड़े नेता डेरा जमाए हुए हैं. सीएम ने भी रोड़ शो कर पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की है. गहलोत गुरुवार को यहां एक होटल में चुनाव के समीकरण बनाने में वयस्त रहे. वहीं शेखावत ने घर–घर जाकर लोगों से भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील की. गहलोत ने कांग्रेस के पक्ष में माहौल होने की बात कहते हुए बोर्ड बनाने का दावा किया है. वहीं शेखावत ने जोधपुर में ट्रीपल इंजन की सरकार बनने की बात कही है.

दोनों तरफ से इसलिए महत्वपूर्ण: अशोक गहलोत ने अपनी गत सरकार में जोधपुर नगर निगम के दो हिस्से किए थे, जिसमें नगर निगम उत्तर में कांग्रेस की मेयर थी, तो दक्षिण में भाजपा की मेयर थी. अब 100 वार्ड के एकिकृत नगर निगम के लिए चुनाव हो रहे हैं. ऐसे में दोनों पार्टियां अपना–अपना वर्चस्व बनाए रखना चाहती हैं. कांग्रेस की ओर उनकी पूर्व मेयर कुंति देवडा फिर मैदान में है. जबकि भाजपा की पूर्व मेयर वनीता सेठ चुनाव से कोसों दूर हैं. इसके अलावा अशोक गहलोत को कांग्रेस में अपना वर्चस्व रखने के लिए भी जोधपुर की जीत जरूरी है. भाजपा भी लगातार वर्चस्व के लिए इस चुनाव में मेहनत कर रही है.

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शेखावत विधायकों से आगे: स्थानीय निकाय चुनाव में जोधपुर नगर निगम में सरदारपुरा, जोधपुर शहर, सूरसागर विधानसभा और लूणी के कुछ हिस्से लगते हैं. गजेंद्र सिंह शेखावत पिछले कुछ दिनों से लगातार पूरे निगम क्षेत्र में तूफानी दौरा कर ज्यादा से ज्यादा वार्ड कवर रहे हैं. जबकि सूरसागर विधायक देवेंद्र जोशी, शहर विधायक अतुल भंसाली, लूणी विधायक जोगाराम पटेल और सरदारपुरा से प्रत्याशी रहे महेंद्र सिंह राठौड़ अपने–अपने क्षेत्र तक सीमित हैं. वार्ड संख्या 7 से चुनाव लड़ रहे रविंद्र सिंह मामडोली के चुनाव को तो व्यक्तिगत तक बताया हैं. जिसके वे गुरुवार को घर घर वोट मांगने गए.

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जिले के परिणामों पर भी रहेगी नजर : जोधपुर शहर के नगर निगम को लेकर जहां भाजपा व कांग्रेस में जोरदार मशक्क्त हो रही है. वहीं जिले की 6 नगर पालिकाओं के परिणामों पर भी नजर रहेगी. जोधपुर के विधायकों के साथ–साथ ग्रामीण क्षेत्र के विधायकों का कद भी इन परिणामों पर निर्भर होगा. इस बार जिले में चार नई नगर पालिकाओं के लिए चुनाव हुए हैं. ऐसे में उनके विधायकों की परर्फोमेंश पर दोनों पार्टियों के नेताओं की नजर रहेगी.

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गहलोत के लिए क्यों जरूरी?: अशोक गहलोत यूं तो कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं, लेकिन गत विधानसभा और लोकसभा चुनाव में उनके गृह जिले में कांग्रेस की करारी हार हुई है. ऐसे में अगर नगर निगम जीत जाते हैं, तो उनके लिए कांग्रेस में अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए जगह बनेगी. जोधपुर के वरिष्ठ पत्रकार सुरेश व्यास ने बताया कि गहलोत के लिए अब से पहले के निगम के चुनाव से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण इस बार का चुनाव है. क्योंंकि कांग्रेस नेतृत्व अब परिणाम पर नजरें रखने लगा है.

शेखावत के लिए इसलिए जरूरी: गजेंद्र सिंह शेखावत तीसरी बार सांसद बने हैं. हर सांसद की तमन्ना होती है कि वह राज्य की राजनीति में अपना कद बढ़ाए. जोधपुर निगम चुनाव में जिस तरह से गजेंद्र सिंह शेखावत ने मेहनत की है, उससे साफ पता चलता है कि वे राज्य की राजनीति में अपना कद बढ़ा करने की कवायद में हैं. राजनीतिक विश्लेषक पत्रकार प्रवीण धींगरा का कहना है कि अंतत शेखावत राज्य की राजनीति में आना चाहेंगे. ऐसे में उनके लिए यह बहुत सुनहरा मौका है. जिसमें वे यह बता सकें कि उनकी कितनी पकड़ है.

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