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राहुल गांधी पर विवाद, भाजपा सांसद ने पूछा कब कांग्रेस नेता ने राजस्थान सरकार से जवाब मांगा?

भाजपा सांसद डॉ. सतीश पूनियाँ ने कांग्रेस पर निशाना साधा कि उन्होंने राजस्थान में हुए पेपर लीक मामलों में कोई जवाब नहीं मांगा, जब कई बार पेपर लीक हुए थे।

Hindustan के अनुसार22 जुलाई 2026 को 03:41 pm बजे
राहुल गांधी पर विवाद, भाजपा सांसद ने पूछा कब कांग्रेस नेता ने राजस्थान सरकार से जवाब मांगा?

सौजन्य से:- Hindustan

राहुल गांधी तब कहाँ थे जब राजस्थान में 17 बार पेपर लीक हुए? कांग्रेस के प्रदर्शन पर गरजे सांसद डॉ. सतीश पूनियाँ

प्रधानमंत्री आवास के घेराव को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए डॉ. पूनियाँ ने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की आजादी देता है, लेकिन इस अधिकार की भी एक मर्यादा है।

प्रधानमंत्री आवास घेरने को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन पर सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता, राजस्थान के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद डॉ. सतीश पूनियाँ ने संसद परिसर में कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के दौरान हुए कथित पेपर लीक मामलों का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि “जब राजस्थान में 17 बार पेपर लीक हुए थे, तब राहुल गांधी आखिर कहाँ चले गए थे?”

डॉ. पूनियाँ ने कहा कि आज कांग्रेस युवाओं और लोकतंत्र की बात कर रही है, लेकिन जब राजस्थान में लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े पेपर बार-बार लीक हो रहे थे, तब कांग्रेस नेतृत्व पूरी तरह मौन था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय राहुल गांधी ने न तो राज्य सरकार से जवाब मांगा और न ही किसी तरह की सार्वजनिक नाराजगी जताई।

‘पहले अपनी सरकार से जवाब मांगते राहुल गांधी’

भाजपा सांसद ने कहा कि यदि राहुल गांधी वास्तव में युवाओं के हितैषी होते तो सबसे पहले अपनी ही पार्टी की तत्कालीन राजस्थान सरकार से जवाब मांगते। उन्होंने कहा कि उस दौर में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित किया, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाई।

पूनियाँ ने कहा, “आज जो लोग लोकतंत्र बचाने और युवाओं के अधिकारों की बात कर रहे हैं, वे उस समय चुप थे जब राजस्थान में बार-बार भर्ती परीक्षाओं पर सवाल उठ रहे थे। यह कांग्रेस का दोहरा चरित्र और राजनीतिक पाखंड है।”

PM आवास घेराव पर कांग्रेस को घेरा

प्रधानमंत्री आवास के घेराव को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए डॉ. पूनियाँ ने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की आजादी देता है, लेकिन इस अधिकार की भी एक मर्यादा है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक विरोध के नाम पर प्रधानमंत्री के आवास की सुरक्षा को चुनौती देना या सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बनाना उचित नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा किसी भी राजनीतिक आंदोलन से ऊपर है। विरोध का अधिकार लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने वाला कोई भी कदम स्वीकार्य नहीं हो सकता।

‘देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश’

डॉ. पूनियाँ ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा प्रदर्शन केवल राजनीतिक दिखावा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ऐसे आंदोलनों के जरिए देश में अस्थिरता और अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।

उनके मुताबिक, “यह कांग्रेस का पाखंड है। यह केवल फेस सेविंग की राजनीति है। ऐसे कदमों से देश में अस्थिरता और अराजकता पैदा करने के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा। जनता सब देख रही है और समय आने पर जवाब भी देगी।”

मीडिया और सुरक्षाबलों पर हमले की निंदा

प्रदर्शन के दौरान मीडिया और सुरक्षाबलों के साथ कथित धक्का-मुक्की और हमलों को लेकर पूछे गए सवाल पर भी डॉ. पूनियाँ ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक विरोध के दौरान हिंसा या अव्यवस्था की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है और सुरक्षाबल देश की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं। ऐसे में किसी भी प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों या सुरक्षा कर्मियों पर हमला करना पूरी तरह निंदनीय है।

पूनियाँ ने कहा, “अभिव्यक्ति की आजादी संविधान देता है, लेकिन उसकी भी सीमाएं हैं। देश की सुरक्षा पहले है, देश की स्थिरता सबसे पहले है। उपद्रवियों द्वारा मीडिया पर हमला हो, सुरक्षाबलों पर हमला हो या सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश—यह देश में अस्थिरता पैदा करने जैसा है। ऐसे आचरण को जनता भी देख रही है और लोकतंत्र में इसका उचित मूल्यांकन होगा।”

सियासत गरमाने के संकेत

कांग्रेस के आंदोलन और भाजपा के जवाबी हमलों के बीच यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप से और गर्माता दिखाई दे रहा है। एक ओर कांग्रेस केंद्र सरकार को घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है, तो दूसरी ओर भाजपा राजस्थान में पेपर लीक मामलों और कांग्रेस सरकार के पुराने रिकॉर्ड को सामने रखकर पलटवार कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने के संकेत हैं।

लेखक के बारे में

Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)

सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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