राजस्थान निकाय चुनाव: दूसरे चरण की वोटिंग कल, 147 निकायों में डाले जाएंगे वोट
Sign In Advertisement X राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव का दूसरा चरण सभी सियासी दलों के लिए परीक्षा की घड़ी है. 11 सितंबर को 147 नगरीय निकायों के 4 हजार 774 वा…

सौजन्य से:- AajTak
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राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव का दूसरा चरण सभी सियासी दलों के लिए परीक्षा की घड़ी है. 11 सितंबर को 147 नगरीय निकायों के 4 हजार 774 वार्डों में मतदान होगा. करीब 87 लाख 61 हजार मतदाता 18 हजार 266 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे. दूसरे चरण में जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर और पाली जैसे 6 बड़े नगर निगम भी शामिल हैं. यानी ये सिर्फ पार्षद चुनने का चुनाव नहीं बल्कि शहरों में किस पार्टी का दबदबा है इसका भी इम्तिहान है.
बीजेपी के सामने सत्ता में रहते हुए शहरी जनाधार कायम रखने की चुनौती है तो कांग्रेस के सामने वापसी का संदेश देने का मौका भी है. 9 हजार 758 मतदान केंद्रों पर होने वाली वोटिंग के साथ अब नेताओं के दावों की असली परीक्षा होगी.
दूसरे चरण में जयपुर के 150 वार्ड, जोधपुर के 100, कोटा के 100, उदयपुर के 80, अजमेर के 80 और पाली के 65 वार्डों में मतदान होगा. 4 हजार 774 वार्डों में 87 लाख 61 हजार 884 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. 18 हजार 266 प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में बंद होगी. बता दें, मतदान के लिए 9 हजार 758 केंद्र बनाए गए हैं.
दूसरे चरण के चुनाव में शहरों में बीजेपी और कांग्रेस के राजनीतिक वर्चस्व की भी परीक्षा है. कई बड़े नेताओं की साख भी इस चुनाव में दांव पर है. बीजेपी की तरफ से मुख्यमंत्री ने खुद चुनाव प्रचार की कमान संभाली. जयपुर में मुख्यमंत्री ने चुनाव प्रचार के अंतिम दिन रोड शो किया. भजनलाल शर्मा ने जयपुर में विकास, पानी, बिजली और कानून-व्यवस्था के साथ लव जिहाद और डिस्टर्ब एरिया बिल जैसे मुद्दे भी उठाए.
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जयपुर में सांगानेर विधानसभा क्षेत्र मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विधानसभा क्षेत्र है तो विद्याधर नगर में उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी की परीक्षा होगी. दूसरे उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा की प्रतिष्ठा दूदू में दांव पर लगी है. उद्योग मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ के लिए झोटवाड़ा में बीजेपी का दबदबा बनाए रखने की चुनौती है.
जोधपुर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह क्षेत्र है और यहां भाजपा-कांग्रेस के बीच शहरी वर्चस्व की लड़ाई है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री के रोड शो पर सवाल उठाए. गहलोत ने सड़क, सीवरेज और स्थानीय समस्याओं को लेकर बीजेपी सरकार को घेरा. यहां बीजेपी के केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत जमकर पसीना बहाते दिखे. कोटा में लोकसभा ओम बिरला को बीजेपी का गढ़ बचाने की चुनौती है.
उदयपुर में भाजपा के मजबूत गढ़ को बचाए रखने की चुनौती है और मेवाड़ की राजनीति में नगर निगम का परिणाम खासा अहम माना जा रहा है. बीकानेर और अजमेर में भी भाजपा-कांग्रेस के बीच शहरी वर्चस्व की जंग है. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे झालावाड़ में बीजेपी का दबदबा बनाए रखने में लगी है.
दूसरे चरण में 6 नगर निगम के अलावा 24 नगर परिषद और 117 नगर पालिकाएं शामिल हैं. नगर परिषद और नगर पालिकाओं में भी कड़ा सियासी मुकाबला है. जयपुर संभाग में जयपुर के अलावा दौसा, लालसोट, कोटपूतली, बहरोड़, नीमराना, खैरथल और तिजारा पर नजर रहेगी. जोधपुर संभाग में जोधपुर के साथ बालोतरा, चौहटन, सिवाना, पोकरण और भीनमाल जैसे निकाय अहम हैं. कोटा संभाग में कोटा के साथ बूंदी, लाखेरी, छबड़ा, मांगरोल, अकलेरा और खानपुर में मुकाबला है.
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उदयपुर संभाग में उदयपुर के साथ सलूंबर, कानोड़, देवगढ़, भीम, निम्बाहेड़ा, कपासन और प्रतापगढ़ के नतीजे भी महत्वपूर्ण होंगे. बीकानेर संभाग में बीकानेर के साथ श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू के निकायों पर नजर रहेगी. अजमेर संभाग में अजमेर, किशनगढ़, पुष्कर, ब्यावर, मालपुरा, भीलवाड़ा, मेड़ता और डीडवाना-कुचामन में मुकाबला अहम है. भरतपुर संभाग में भरतपुर, बयाना, धौलपुर, बाड़ी, डीग, सवाई माधोपुर और हिंडौन सिटी के नतीजे भी राजनीतिक तस्वीर पर असर डालेंगे.
इस चुनाव में बागी और निर्दलीय प्रत्याशी भी कई वार्डों में समीकरण बदल सकते हैं. भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए बूथ मैनेजमेंट की परीक्षा है. स्थानीय मुद्दों के साथ सरकार के कामकाज पर भी मतदाताओं का फैसला आएगा. पहले चरण में सामने आए मतदान प्रतिशत के बाद अब दूसरे चरण में मतदाताओं के उत्साह पर भी निगाह है.
14 सितंबर को मतगणना के बाद तस्वीर साफ होगी कि भाजपा अपना दबदबा कायम रख पाती है या कांग्रेस वापसी का संकेत देती है. दूसरे चरण का जनादेश बड़े नेताओं के प्रभाव, पार्टियों के संगठन और बूथ स्तर की जमीनी ताकत का भी बड़ा संकेत देगा.
दूसरी तरफ टिकट वितरण के बाद सामने आए असंतोष और बागियों को मनाने के लिए बीजेपी के बड़े नेताओं को सक्रिय होना पड़ा. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने भी बागियों को मनाने में हस्तक्षेप किया.
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बीजेपी के लिए चुनौती अपने शहरी जनाधार को बनाए रखने की है. कांग्रेस के लिए चुनौती सत्ता विरोधी माहौल को वोट में बदलने की है. सियासी मुकाबले के साथ प्रशासन के सामने शांतिपूर्ण मतदान की चुनौती है. दूसरे चरण में 54 हजार 533 जवान और अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे. 9 हजार 758 मतदान केंद्रों पर सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं.
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जयपुर के जगतपुरा में वोट डालेंगे तो कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट जयपुर के सिविल लाइंस में वोट डालेंगे. उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी जयपुर में सीटी पैलेस के पास वोट डालेंगी और उद्योग मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ जयपुर के वैशाली नगर में वोट डालेंगे. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत जोधपुर में वोट डालेंगे.
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