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Dainik Bhaskar के अनुसार11 जुलाई 2026 को 05:29 am बजे
जयपुर में 12 जुलाई को रंग मल्हार उत्सव:  23 शहरों में होगा आयोजन,इस बार कैनवास की जगह संदूक पर चित्र बनाएंगे कलाकार - Jaipur News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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जयपुर में 12 जुलाई को रंग मल्हार उत्सव:23 शहरों में होगा आयोजन,इस बार कैनवास की जगह संदूक पर चित्र बनाएंगे कलाकार

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अच्छी बारिश, समृद्धि, सुख-शांति और मानवता के कल्याण की कामना को कला के माध्यम से अभिव्यक्त करने वाला राजस्थान का अनूठा कला उत्सव 'रंग-मल्हार' इस वर्ष अपने 17वें संस्करण के साथ 12 जुलाई, रविवार को आयोजित होगा।

वरिष्ठ चित्रकार विद्यासागर उपाध्याय की संकल्पना पर आधारित यह आयोजन जयपुर में राजस्थान ललित कला अकादमी परिसर में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम को राजस्थान ललित कला अकादमी, आईसीए गैलरी और धौरा के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

इस वर्ष रंग-मल्हार की थीम 'संदूक' रखी गई है। कभी हर घर की पहचान और विरासत का प्रतीक रही संदूक या पेटी को कलाकार अपनी कल्पनाओं और रंगों से नई अभिव्यक्ति देंगे।

विद्यासागर उपाध्याय का कहना है कि समय के साथ संदूक का स्वरूप भले बदल गया हो, लेकिन इसकी उपयोगिता और भावनात्मक जुड़ाव आज भी कायम है। इसी सोच को केंद्र में रखते हुए इस बार कलाकार संदूक को कैनवास बनाकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन करेंगे।

23 शहरों में होगा रंग-मल्हार

उन्होंने बताया कि जयपुर में करीब 100 से 150 कलाकार इस आयोजन में भाग लेंगे। वहीं राजस्थान के बीकानेर, जोधपुर, श्रीगंगानगर, उदयपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, टोंक सहित प्रदेश के करीब 23 शहरों में रंग-मल्हार आयोजित होगा।

इसके साथ ही राजस्थान से बाहर काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), बड़ौदा, मुंबई सहित कई शहरों में भी यह आयोजन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों स्वरूपों में किया जाएगा।

विद्यासागर उपाध्याय ने बताया कि लगभग 17 वर्ष पहले यह एक छोटे से प्रयास के रूप में शुरू हुआ था। पहले आयोजन में कलाकारों ने छाते को कैनवास बनाकर अच्छी वर्षा, खुशहाली, भाईचारे और समृद्धि की कामना की थी। तब से यह आयोजन केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। आज भी रंग-मल्हार का मूल उद्देश्य वही है, प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना और कला के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देना।

अच्छी बारिश की कामना के साथ शुरू हुई इस कला की शुरूआत

उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 में राजस्थान सहित देश के कई हिस्से भीषण सूखे की चपेट में थे। उस समय अच्छी बारिश की कामना के साथ इस अनूठे कला उत्सव की शुरुआत की गई थी। संयोगवश उसी वर्ष अच्छी वर्षा हुई और तभी से यह आयोजन हर वर्ष जुलाई माह में नियमित रूप से आयोजित किया जा रहा है।

कैनवास की जगह संदूक पर बनाएंगे कलाकृति

रंग-मल्हार की एक विशेष पहचान हर वर्ष अलग-अलग वस्तुओं को कैनवास बनाकर उन पर चित्रांकन करना रही है। पिछले वर्षों में कलाकारों ने छाता, हैट, मास्क, फिरकी, कार, ग्लोब, हेलमेट, साइकिल, लालटेन, बिजणी (हाथ का पंखा), कैरी बैग जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं पर अपनी कल्पनाओं के रंग बिखेरे हैं। हर वर्ष चुनी गई वस्तु समाज, संस्कृति और जीवन के किसी न किसी महत्वपूर्ण पहलू का प्रतीक होती है।

इस बार 'संदूक' के माध्यम से कलाकार स्मृतियों, विरासत, परंपरा और जीवन के संचित अनुभवों को रंगों में अभिव्यक्त करेंगे। आयोजकों का मानना है कि रंग-मल्हार केवल एक चित्रकला आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और समाज के प्रति सकारात्मक सोच को मजबूत करने वाला जन-आंदोलन बन चुका है, जिसमें हर वर्ष देशभर के कलाकार उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं।

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