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ओबीसी की 11 जातियों का ही राजनीति में दबदबा: आयोग की रिपोर्ट में खुलासा; अध्यक्ष बोले- अब 92 जातियों को फोकस करके रिपोर्ट बनाई - Jaipur News

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Dainik Bhaskar के अनुसार6 अगस्त 2026 को 04:15 am बजे
ओबीसी की 11 जातियों का ही राजनीति में दबदबा:  आयोग की रिपोर्ट में खुलासा; अध्यक्ष बोले- अब 92 जातियों को फोकस करके रिपोर्ट बनाई - Jaipur News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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ओबीसी की 11 जातियों का ही राजनीति में दबदबा:आयोग की रिपोर्ट में खुलासा; अध्यक्ष बोले- अब 92 जातियों को फोकस करके रिपोर्ट बनाई

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प्रदेश में ओबीसी की 92 में से 11 जातियों का ही राजनीति में दबदबा है। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 92 में से 11 जातियों के ही 1000 से ज्यादा लोगों को राजनीति में भागीदारी मिली है, या उनके जनप्रतिनिधि जीते हैं।

इसके अलावा ओबीसी की दूसरी जातियों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम मिला है। रिपोर्ट में OBC को निकाय और पंचायत चुनाव में सुप्रीम कोर्ट के सुझाए गए मापदंडों के हिसाब से आरक्षण देने की सिफारिश की है।

इस सिफारिश में ओबीसी की केवल जनसंख्या को ही नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन को भी आधार बनाया है।

ओबीसी आयोग ने बुधवार शाम को सीएम भजनलाल शर्मा से मिलकर रिपोर्ट सौंपी है। दो खंडों में करीब 900 पेज की रिपोर्ट में ओबीसी के क्वांटिफाइड डेटा सर्वे की डिटेल के साथ आयोग ने ओबीसी को आरक्षण देने की सिफारिश की है। ओबीसी की 92 जातियों को फोकस करके रिपोर्ट तैयार की गई है।

74.85 लाख ओबीसी परिवारों का सर्वे करके बनाई रिपोर्ट

राजस्थान ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जज मदनलाल भाटी ने रिपोर्ट सौंपने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के हिसाब से ओबीसी को निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं में रिजर्वेशन देने की सिफारिश के साथ रिपोर्ट दी है।

ओबीसी की सभी 92 जातियों को प्रतिनिधित्व मिले, यह सोचकर रिपोर्ट दी है। ओबीसी के 74 लाख 85 हजार परिवारों का सर्वे किया है।

बंद कमरों में बैठकर रिपोर्ट नहीं बनाई

रिटायर्ड जज मदनलाल भाटी ने कहा- हमने बंद कमरों में बैठकर रिपोर्ट तैयार नहीं की। सच का सामना करने के लिए जनता के बीच गए हैं।

सर्वे करके डेटा लिया है। प्रदेशभर में फील्ड विजिट कर आमजन से संवाद किया। सुझाव लिए और उनके आधार पर निष्कर्ष तैयार किए।

ओबीसी वर्ग से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए हैं और उम्मीद है कि इनका लाभ संबंधित वर्ग को मिलेगा। जनसंख्या 20 फीसदी बढ़ी है। हमने 19 पॉइंट पर सर्वे किया। ओबीसी की जातियों के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक पिछड़ेपन का भी आकलन करके ब्योरा दिया है।

ओबीसी के लिए किस निकाय में कौनसे वार्ड आरक्षित होंगे, सरकार तय करेगी

भाटी ने कहा- कौनसे वार्ड आरक्षित किए जाएंगे। इसका फैसला सरकार और प्रशासन करेंगे। रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा या नहीं, यह भी सरकार के अधिकार क्षेत्र का मामला है।

आयोग की रिपोर्ट के आधार पर सरकार स्थानीय निकायों में वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया और लॉटरी का फैसला करेगी।

पार्ट-ए के 450 पेज में सर्वे के आंकड़े

ओबीसी आयोग के पार्ट-ए की रिपोर्ट 450 पेज की है। इसमें जनाधार और सर्वे के आंकड़े, पिछले दो चुनावों में दिए गए ओबीसी आरक्षण का ब्योरा है। राज्य और केंद्र की ओबीसी कल्याण की योजनाओं और उनके लाभार्थियों का ब्योरा है।

रिपोर्ट में जातिवार राजनीतिक भागीदारी का ब्योरा

आयोग की रिपोर्ट में ओबीसी की 92 जातियों के राजनीतिक प्रतिधित्व का ब्योरा दिया गया है। एमबीसी की 5 जातियों को भी इसी में शामिल किया गया है।

जातिवार किसे कितना राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला है, उसकी संख्या दी गई है। जिन जातियों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला है, उसका भी साथ में ब्योरा दिया है।

सप्ताह भर में होगी आरक्षण की लॉटरी

आयोग की रिपोर्ट के बाद अब शहरी निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं में आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही ओबीसी के लिए वार्ड आरक्षित होंगे। सप्ताहभर में आरक्षण लॉटरी निकालने की तैयारी है।

15 से 17 अगस्त के बीच निकाय चुनावों की घोषणा संभव

निकायों में आरक्षण की लॉटरी का काम पूरा होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग 15 से 17 अगस्त के बीच स्थानीय निकाय चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है। हाईकोर्ट में राज्य निर्वाचन आयोग ने यही समय सीमा बताई थी।

हाईकोर्ट ने 5 अगस्त तक रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे

निकाय और पंचायत चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए समय सीमा तय की थी। ओबीसी आयोग को 5 अगस्त तक रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे।

हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार ओबीसी आयोग ने सरकार को रिपोर्ट दे दी, जिसके बाद निकाय और पंचायत चुनावों की बड़ी बाधा दूर हो गई है।

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