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राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र आज से; पहले ही दिन हंगामे के आसार, 10 कानून और मीडिया एंट्री का मुद्दा तैयार

राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र आज से; पहले ही दिन हंगामे के आसार, 10 कानून और मीडिया एंट्री का मुद्दा तैयार विधानसभा में जिन विधेयकों को दोबारा रखा जाना है, उनमें राजस्थान धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2008, राजस्थान लिंचिंग…

Hindustan के अनुसार20 अगस्त 2026 को 07:56 am बजे
राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र आज से; पहले ही दिन हंगामे के आसार, 10 कानून और मीडिया एंट्री का मुद्दा तैयार

सौजन्य से:- Hindustan

राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र आज से; पहले ही दिन हंगामे के आसार, 10 कानून और मीडिया एंट्री का मुद्दा तैयार

विधानसभा में जिन विधेयकों को दोबारा रखा जाना है, उनमें राजस्थान धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2008, राजस्थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक-2019, राजस्थान सम्मान और परंपरा के नाम पर वैवाहिक संबंधों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक-2019 और राजस्थान विद्युत शुल्क विधेयक-2023 शामिल हैं।

राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार, 20 अगस्त से शुरू होगा। सत्र के पहले ही दिन से सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर टकराव के आसार हैं। राजभवन की ओर से पुनर्विचार के लिए लौटाए गए 10 कानूनों को एक बार फिर विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा। इन विधेयकों पर सदन में दोबारा विचार कर इन्हें पारित कराने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। राजस्थान के विधानसभा इतिहास में यह पहली बार है, जब एक साथ 10 विधेयक राज्यपाल की ओर से पुनर्विचार के संदेश के साथ लौटाए गए हैं।

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने इन विधेयकों को विधानसभा को वापस भेजते हुए सदन से इन पर पुनर्विचार करने को कहा है। सरकार अब इन्हें दोबारा सदन में पेश करेगी। इन विधेयकों को लेकर विधानसभा सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस तेज होने की संभावना है।

इन 10 कानूनों पर होगा पुनर्विचार

विधानसभा में जिन विधेयकों को दोबारा रखा जाना है, उनमें राजस्थान धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2008, राजस्थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक-2019, राजस्थान सम्मान और परंपरा के नाम पर वैवाहिक संबंधों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक-2019 और राजस्थान विद्युत शुल्क विधेयक-2023 शामिल हैं।

इसके अलावा नाथद्वारा मंदिर संशोधन विधेयक-2023, व्यास विद्यापीठ विश्वविद्यालय जोधपुर विधेयक-2022, सौरभ विश्वविद्यालय हिंडौनसिटी विधेयक-2022, कृषक उपज व्यापार विधेयक-2020, कृषक कीमत आश्वासन, कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 और आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक-2020 भी सदन में दोबारा रखे जाएंगे।

सरकार की ओर से इन विधेयकों को सदन में रखने के बाद उन पर चर्चा और पुनर्विचार कराया जाएगा। इसके बाद इन्हें दोबारा पारित कराने की प्रक्रिया होगी।

1490 सवालों के जवाब बाकी

विधानसभा सत्र शुरू होने से एक दिन पहले तक विधायकों की ओर से लगाए गए करीब 1490 सवालों के जवाब नहीं आए हैं। ऐसे में प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष सरकार को घेर सकता है। विभागों से जुड़े सवालों के जवाब लंबित होने को लेकर भी सदन में हंगामा होने के आसार हैं।

विपक्ष कानून-व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, बारिश और जलभराव, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तथा प्रशासनिक फैसलों से जुड़े मुद्दे उठा सकता है।

कितने दिन चलेगा सत्र? कांग्रेस और सरकार आमने-सामने

सत्र शुरू होने से पहले ही विधानसभा की कार्यवाही कितने दिन चलनी चाहिए, इसे लेकर कांग्रेस और सत्ता पक्ष के बीच विवाद शुरू हो गया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सत्र को ज्यादा दिनों तक चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि विधानसभा की कार्यवाही कम से कम 15 और अधिकतम 25 दिन चलनी चाहिए।

कांग्रेस की ओर से विधानसभा सत्र को 20 से 25 दिन तक चलाने की मांग की जा रही है। वहीं, सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि सत्र 25 अगस्त तक ही चल सकता है। ऐसे में सत्र की अवधि को लेकर भी सदन के भीतर राजनीतिक खींचतान देखने को मिल सकती है।

स्कूलों में मीडिया की एंट्री का मुद्दा भी उठेगा

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने स्कूलों में मीडिया की एंट्री पर रोक के मुद्दे को भी विधानसभा में उठाने की बात कही है। जूली ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि स्कूलों में मीडिया की एंट्री पर रोक लगाने वाला आदेश वापस लेना पड़ेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों की कमियां सामने लाने वाले मीडिया कर्मियों पर कार्रवाई का डर दिखाया जा रहा है। जूली ने कहा कि सरकार को यह फैसला वापस लेना चाहिए और विधानसभा में इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिए।

पहले दिन से हंगामे के आसार

राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र में पहले दिन से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। 10 विधेयकों को दोबारा सदन में रखना, लंबित सवालों के जवाब, स्कूलों में मीडिया की एंट्री और सत्र की अवधि जैसे मुद्दे विपक्ष के प्रमुख हथियार होंगे।

वहीं सरकार की कोशिश रहेगी कि विधायी कामकाज को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरा किया जाए। ऐसे में राजस्थान विधानसभा का यह मानसून सत्र राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सत्र के दौरान कई अहम मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने नजर आ सकते हैं।

लेखक के बारे में

Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)

सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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