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भाई 10 करोड़ की जमीन तेरी, मां को मरवा दे बस...सरकारी नौकरी के लिए 24 साल की आयुषी ने ऐसे रची साजिश

Sign In Advertisement X राजस्थान में जयपुर के एयरपोर्ट कॉलोनी में ढाई साल पहले कोर्ट में एलडीसी विजय वशिष्ठ उर्फ विजय शर्मा ने घर बनाया था जिसमें पत्नी निरज श…

AajTak के अनुसार9 जुलाई 2026 को 09:02 am बजे
भाई 10 करोड़ की जमीन तेरी, मां को मरवा दे बस...सरकारी नौकरी के लिए 24 साल की आयुषी ने ऐसे रची साजिश

सौजन्य से:- AajTak

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राजस्थान में जयपुर के एयरपोर्ट कॉलोनी में ढाई साल पहले कोर्ट में एलडीसी विजय वशिष्ठ उर्फ विजय शर्मा ने घर बनाया था जिसमें पत्नी निरज शर्मा, बेटी आयुषी शर्मा और मानसिक रूप से कमज़ोर बेटे के साथ रहता था. एक साल पहले विजय शर्मा की मौत हो जाती है. तब बेटी आयुषी शर्मा ने 12 th पास किया था. जब पिता की जगह अनुकंपा पर नौकरी करने की बारी आई तो बेटी ने कहा कि मुझे नौकरी दे दो. मां तैयार भी हो गई. लेकिन निरज शर्मा का भाई और आयुषी का मामा भी अपने जीजा जी के साथ लोअर कोर्ट में एलडीसी था उसने बहन को कहा कि तुम भी पढ़ी लिखी हो. तुम्हारी जिंदगी पड़ी है और 16 साल का बेटा मानसिक दिव्यांग है उसकी देख भाल कौन करेगा. बेटी को पढ़ा लिखा कर लायक बना देंगे. मां ने दिव्यांग बेटे के खातिर पति की जगह नौकरी कर ली.

चचेरे भाई के साथ रहने लगी आयुषी

इससे नाराज होकर 24 साल की बेटी आयुषी पिता के कल्याण कॉलोनी स्थित पुराने घर में जाकर रहने लगी और अपने ताऊ मोहन स्वरूप शर्मा के बेटे बलराम के साथ एलएलबी में एडमिशन ले लिया. दोनों चचेरे भाई बहन साथ रहने लगे. उसी दौरान आयुषी ने कहा कि मुझे अपनी मां को मारना है. अगर तुम मेरी मदद करोगे तो आगरा रोड की पांच करोड़ की पांच बीघा जमीन और भरतपुर के पांच करोड़ की चार बीघा जमीन तुझे दे दूंगी. मुझे मां के मरने के बाद नौकरी मिल जाएगी और जयपुर का दोनों घर मेरे पास हैं. डील तय होने के बाद दोनों ने निरज शर्मा के जेठ और बलराम के पिता मोहन को यह बात बताई.

मां को घर से बाहर लाने के लिए टोटके

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आयुषी ने प्लान बनाया कि मां को गाड़ी से कुचलकर मार देंगे और हादसे का रूप दे देंगे. इसके बाद निरज शर्मा के जेठ मोहन शर्मा ने भरतपुर में हेमंत शर्मा से संपर्क साधा. एक महीने पहले हेमंत ने थार गाड़ी से निरज को घर के बाहर कुचलने की कोशिश की मगर निरज बच गई. मगर उसे शक हो गया था. उसने यह बात अपने भाई को बताई और घर से निकलना बंद कर दिया. उसके बाद मां को घर से निकालने के लिए आयुषी ने नए नए टोना टोटके के तरीके अपनाना शुरू किया. निंबू - मिर्चा और लाल रंग फेंकना शुरू कर दिया. निरज समझ गई थी खतरा है तो उसने पूरे घर में जाली लगाकर बाहर चार सीसीटीवी कैमरे लगा दिए थे.

सुपारी किलर को दिए 7 लाख

आयुषी को मां को मारने की जल्दी थी उसने फिर से अपने ताऊ को कहा प्लान बनाओ. ताउ मोहन शर्मा ने भरतपुर के रूपावास के हेमंत शर्मा से संपर्क किया. हेमंत ने उनको प्लान दिया और उसके बदले 7 लाख रूपए मांगे. फिर हेमंत ने हरियाणा नंबर का स्कॉर्पियो भरतपुर से 35 हजार में किराए पर ली और निरजा को कुचलने के लिए आकाश शर्मा और अरविंद शर्मा को हायर किया. निरज के रैकी के लिए रोहित और मोहित को हायर किया गया.

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मामा से रोते हुए बोली- मां मर गई है

4 जुलाई को जब निरज अपने बेटे को लेकर फिजियोथैरेपिस्ट के यहां गई थी तो बेटी ने उसे जरूरी काम से घर आने के लिए कहा. निरज जब घर लौट रही थी तो 60 फीट पर रोड पर मोटरसाइकिल पर बैठे मोहित और रोहित ने इंतज़ार कर रहे स्कॉर्पियो में बैठे आकाश को इशारा किया. आकाश ने गाड़ी को सौ से ज्यादा की स्पीड से किनारे चल रही निरजा को टक्कर मारी जिससे वो 100 मीटर उछल कर गिरी और मौत हो गई. मां के मरने के बाद बेटी ने मामा को रोते हुए फोन किया कि मां का एक्सीडेंट हो गया और वो मर गई. ताउ तुरंत घर पहुंचा और शव को लेकर गांव रूपावास चले गए. मगर मामा को भांजी के हाव भाव को देखकर शक हुआ तो पुलिस से केवल इतना ही कहा कि एक्सीडेंट की जांच कर लो.

पुलिस ने जब सीसीटीवी को खंगालना शुरू किया तो देखा निरज शर्मा तो सड़क पर बिल्कुल हीं किनारे चल रही थी और 60 फीट की चौड़ी सड़क पूरी खाली थी. पुलिस को शक गहराया तो आसपास के दूसरे सीसीटीवी खँगालना शुरू किया तो देख कि कुछ दूरी पर स्कॉर्पियो काफी पहले से खड़ी थी. दो लड़के दो सड़कों पर खड़े थे.

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...रुके भी नहीं पास में मौजूद लड़के?

हादसे के बाद दोनों लड़के निरजा के शव को देखे बिना सीधे निकल जाते हैं और आगे जाकर एक मोटरसाइकिल सवार के साथ बैठकर निकल जाते है. पुलिस सीसीटीवी तलाशती आगे बढ़ी तो क्षतिग्रस्त स्कॉर्पियो मिला. जब स्कॉर्पियो के मालिक को पकड़ा तो उसने हेमंत शर्मा को किराये पर देना बताया. फिर हेमंत शर्मा को पकड़ा तो उसने आयुषी के ताउ मोहन शर्मा का नाम बताया. इस बीच चचेरा भाई बलराम भाग गया. पुलिस जब गांव रूपावास पहुंची तो कानून के छात्र आयुषी ने पुलिस को धमकाना शुरू कर दिया. फिर पुलिस ने भरतपुर के सेवर थाने के पुलिसकर्मियों और गांव वालों की मदद से आयुषी को उसके ताई के साथ थाने तक ये कहकर लाए कि बयान लेकर छोड़ देंगे. फिर ताई को घर भेजकर सीधे जयपुर लेकर आए जहाँ आरोपियों के सामने देख आयुषी ने सब क़ुबूल कर लिया.आयुषी को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है . पुलिस को उल्टे सीधे जवाब देती है. आजतक के कैमरे पर हमने उससे बहुत पूछना चाहा लेकिन बेहद शातिर आयुषी ने कुछ नहीं बोला.

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