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उदयपुर: मंदिर में प्रसादी कराने पर परिवार का हुक्का-पानी बंद, पंचायत ने लगाया 1.51 लाख का जुर्माना - udaipur family boycotted fined lakh by panchayat

उदयपुर: मंदिर में प्रसादी कराने पर परिवार का हुक्का-पानी बंद, पंचायत ने लगाया 1.51 लाख का जुर्माना उदयपुर के गोगुंदा में मंदिर में प्रसादी के आयोजन पर एक परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर 1.51 लाख का जुर्माना लगाया गया। समय…

jagran.com के अनुसार6 सितंबर 2026 को 03:33 am बजे
उदयपुर: मंदिर में प्रसादी कराने पर परिवार का हुक्का-पानी बंद, पंचायत ने लगाया 1.51 लाख का जुर्माना
 - udaipur family boycotted fined lakh by panchayat

सौजन्य से:- jagran.com

उदयपुर: मंदिर में प्रसादी कराने पर परिवार का हुक्का-पानी बंद, पंचायत ने लगाया 1.51 लाख का जुर्माना

उदयपुर के गोगुंदा में मंदिर में प्रसादी के आयोजन पर एक परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर 1.51 लाख का जुर्माना लगाया गया।

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

जागरण संवाददाता, उदयपुर। गोगुंदा क्षेत्र में सामाजिक बहिष्कार का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। गांव के मंदिर में प्रसादी का आयोजन करने से नाराज पंचायत ने एक परिवार पर एक लाख 51 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया।

परिवार ने रकम देने में असमर्थता जताई तो कथित तौर पर उसका हुक्का-पानी बंद कर समाज से अलग कर दिया गया। मामला इतना बढ़ा कि परिवार में मौत होने पर अंतिम संस्कार के लिए श्मशान जाने का रास्ता तक रोकने का आरोप है।

गांव भूताला निवासी गणेश सिंह ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया कि गत 24 मई को गांव के मंदिर में परिवार की ओर से प्रसादी का आयोजन किया गया था।

1.51 लाख लगाया का जुर्माना

आयोजन के बाद कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति जताई और अगले दिन पंचायत बुलाकर परिवार पर 1.51 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। रकम नहीं देने पर परिवार से सामाजिक संबंध खत्म करने का फरमान सुनाया गया।

विरोध किया तो मारपीट का आरोपपीड़ित परिवार का आरोप है कि पंचायत के फैसले के बाद गांव के लोगों को उनसे मेल-जोल और बातचीत नहीं करने की हिदायत दी गई। विरोध करने पर गाली-गलौज और मारपीट की गई।

मंदिर सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आने-जाने में भी बाधा डाली गई। सबसे गंभीर आरोप यह है कि 29 मई को परिवार में एक व्यक्ति की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के लिए श्मशान जाने वाला रास्ता भी बंद कर दिया गया।

पीड़ित ने बताया कि उसने स्थानीय पुलिस से लेकर उच्च अधिकारियों तक शिकायत की, लेकिन मामला दर्ज नहीं हुआ।

इसके बाद कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। एएसआई विनेश कुमार के अनुसार, कोर्ट के आदेश के बाद तीन सितंबर को पांच प्रमुख पंचों सहित कुल 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

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