गुजरात और राजस्थान में ओटला का नाजुक महत्व
गुजरात और राजस्थान के पुराने घरों में ओटला बनाया जाता था, लेकिन इसके पीछे व्यावहारिक और सामाजिक कारण थे।

सौजन्य से:- Jagran
पुराने समय में घर में ओटला क्यों बनाया जाता था? गुजरात के घरों की ये खासियत जानकर हैरान हो जाएंगे आप
राजस्थान और गुजरात के पुराने घरों में ओटला बनाया जाता था। इसका सामाजिक और रोजमर्रा के जीवन में काफी महत्व होता था। ...और पढ़ें
समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अगर आप गुजरात और राजस्थान के इलाकों के पुराने घर देखेंगे, तो उनके मुख्य दरवाजे के बाहर आपको ओटला जरूर नजर आएगा। पुराने घरों में ओटला जरूर बनाया जाता था, लेकिन क्यों?
दरअसल, पुराने जमाने में ओटला सिर्फ घर का एक बनावटी हिस्सा नहीं होता था। उस समय के समाज और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा होता है। आइए जानें क्यों गुजरात और राजस्थान में घर के बाहर ओटला बनाया जाता था?
लोगों से मिलने-जुलने की जगह
पुराने जमाने में न तो मोबाइल फोन हुआ करते थे और न इंटरनेट। इसलिए सोशलाइज करने के लिए लोगों को एक-दूसरे से मिला-जुला करते थे। इसमें ओटला काफी काम आता था। अगर कोई पड़ोसी या जान-पहचान का व्यक्ति सामने से गुजर रहा है, तो बिना घर के अंदर आए, वो ओटले पर बैठकर आराम से बातचीत कर सकता था।
साथ ही, शाम के समय मोहल्ले के बुजुर्ग, पुरुष और महिलाएं अक्सर ओटले पर जमा होते थे और दुनिया जहान की बातें किया करते। इसके अलावा, अगर कोई मेहमान अचानक आ गया है, तो पहले सीधे घर में ले जाने के बजाय बाहर ओटले पर ही मेहमानों को चाय-पानी पिलाने की परंपरा थी।
धूल-मिट्टी से बचाव
गुजरात और राजस्थान के धूल भरे इलाके में हवा के साथ रेत आसानी से घर के अंदर जा सकती है। इसलिए इसे रोकने के लिए दरवाजे के बाहर ओटला बनाया जाता था, ताकि धूल घर के अंदर न आए। इसी तरह के ये बारिश का पानी भी घर के अंदर आने से रोकता था।
खबरें और भी
रोज की व्यवहारिक जरूरतें
ओटले का इस्तेमाल सिर्फ बैठकर बातें करने के लिए नहीं होता था। पुराने जमाने में दूधवाले, सब्जी वाले या दूसरे कारीगर गलियों में घूम-घूमकर सामान बेचा करते थे। महिलाएं उन्हें ओटले पर ही रोका करती और यहीं मोल-भाव करके चीजें खरीदती थीं। इससे घर की प्राइवेसी भी बरकरार रहती और शॉपिंग भी हो जाती थी।
दोपहर के समय बच्चे घर के ओटले पर जमा होते और मिल-जुलकर खेल खेला करते थे। ओटला घर के दरवाजे से जुड़ा होता था। इसलिए घर वाले पास ही होते थे और बच्चे सुरक्षित तरीके से खेल पाते थे।
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

राजस्थान में बालिका सैनिक स्कूल की सौगात, अजमेर जिले के लिए यह क्या है इतना महत्वपूर्ण?

Bhajanlal Government : किससे लगाएं गुहार...ढाई साल बाद भी जनता से जुड़े संवैधानिक बोर्ड-आयोगों में नियुक्ति नहीं

राजस्थान बीएसटीसी सेकंड सीट अलॉटमेंट लिस्ट 2026 जारी (Rajasthan bstc second seat allotment list 2026 out)


