कहीं तबेले में पढ़ रहे बच्चे, कहीं पेड़ के नीचे लग रही क्लास... राजस्थान में सरकारी स्कूलों की स्थिति बदहाल - rajasthan govt schools students study in stables open air
कहीं तबेले में पढ़ रहे बच्चे, कहीं पेड़ के नीचे लग रही क्लास... राजस्थान में सरकारी स्कूलों की स्थिति बदहाल राजस्थान में सैकड़ों सरकारी स्कूल बदहाल स्थिति में हैं, जहां बच्चे झोपड़ों, पेड़ों के नीचे, मंदिरों और यहां तक क…

सौजन्य से:- Jagran
कहीं तबेले में पढ़ रहे बच्चे, कहीं पेड़ के नीचे लग रही क्लास... राजस्थान में सरकारी स्कूलों की स्थिति बदहाल
राजस्थान में सैकड़ों सरकारी स्कूल बदहाल स्थिति में हैं, जहां बच्चे झोपड़ों, पेड़ों के नीचे, मंदिरों और यहां तक कि तबेलों में पढ़ने को मजबूर हैं
समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नरेंद्र शर्मा, जयपुर। राजस्थान में सैकड़ों सरकारी स्कूल बदहाल स्थिति में हैं। पक्का भवन नहीं होने के कारण कहीं सरकारी स्कूल कच्चे झोपड़ों (छप्पर) में चल रहे हैं तो कहीं खुले में पेड़ और लोहे के टिन शेड़ के नीचे संचालित हो रहे हैं। कई सरकारी स्कूल मंदिरों और तबेलों में संचालित किए जा रहे हैं।
सबसे खराब स्थिति भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे बाड़मेर एवं जैसलमेर जिलों की है, जहां 42 से 46 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच बच्चों को खुले में पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ना पड़ रहा है। धूप और उमस के साथ मानसून की वर्षा के दौरान बच्चे भीगते हुए पढ़ने के लिए मजबूर हैं।
आदिवासी जिलों के सरकारी स्कूल तंबू और घास के छप्पर के नीचे संचालित हैं। राज्य सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, 3,768 सरकारी स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं। इनमें 2,558 भवनों को आधिकारिक रूप से जर्जर घोषित किया जा चुका है। शेष 1,210 स्कूलों की जर्जर स्थिति को लेकर औपचारिक घोषणा होना शेष है।
जर्जर भवनों में संचालित अधिकांश सरकारी स्कूलों को कच्चे झोपड़ों, टिन शेड़ या फिर तबेलों में स्थानांतरित किया गया है। सीमावर्ती जैसलमेर जिले में 14 और बाड़मेर में 23 सरकारी स्कूल झोपड़ों और पेड़ के नीचे संचालित हो रहे हैं। इनमें जैसलमेर जिले में थानाणी, बयानाड़ी, गणेशपुरा, भुर्जगढ़, आसल का ताला सहित कई गांवों के सरकारी स्कूल शामिल हैं।
बाड़मेर में गंगाला गांव का आजाद नगर, भाकरी, सराना, दुदाबेरी, बार्मर के प्राथमिक स्कूल झोपड़ों और पेड़ों के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। आदिवासी जिले प्रतापगढ़ में शकरकंद राजकीय प्राथमिक स्कूल तंबू में संचालित है। यहां वर्षा के दिनों में स्कूल या तो बंद कर दिया जाता है या फिर बच्चे कीचड़ में बैठकर पढ़ाई करते हैं।
आदिवासी डूंगरपुर जिले के खैपरल प्राथमिक स्कूल सहित कई सरकारी स्कूल कच्चे झोपडों में संचालित हो रहे हैं।
अभिभावक बोले- कोई नहीं सुनता
स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों व उनके अभिभावकों का कहना है कि नेता और अफसर कोई नहीं सुनता। कई बार पक्का स्कूल बनाने को लेकर आग्रह किया है। वर्षा में कई दिन तक स्कूल की छुट्टियां करनी पड़ती है। भविष्य बनाने की मजबूरी में तपते रेगिस्तान में बैठना पड़ता है।
जयपुर में तबेले और मंदिर में स्कूल
जयपुर के रामपुरा गांव में स्थित जिस कंवरपुरा राजकीय प्राथमिक स्कूल को देखने के लिए शुक्रवार को काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता आशुतोश रांका अपने कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे और ग्रामीणों ने उनके साथ मारपीट की, वह स्कूल तबेले में चल रहा है। लोहे के टिन शेड़ के नीचे एक हिस्से में स्कूल के 35 बच्चे पढ़ते हैं, वहीं दूसरी तरफ जानवरों का चारा भरा है।
पिछली कांग्रेस सरकार में स्कूल भवन निर्माण के नाम पर कोई राशि खर्च नहीं हुई थी। वर्तमान भाजपा सरकार ने जर्जर स्कूल भवनों को चिह्नित कर निर्माण कार्य प्रारंभ करने की योजना बनाई गई है। कोष का भी प्रविधान किया गया है।
- मदन दिलावर, शिक्षा मंत्री, राजस्थान
स्कूल के समय के बाद जानवर भी रखे जाते हैं। जयपुर जिला शिक्षा अधिकारी गिरिराज पारीक ने स्कूल में तबेला संचालित होने से इन्कार करते हुए कहा, भवन जर्जर होने के कारण ग्रामीणों के सहयोग से स्कूल टिन शेड के नीचे संचालित हो रहा है। नए भवन का निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा।
राजधानी जयपुर में 17 सरकारी स्कूल मंदिरों में संचालित हो रहे हैं। जयपुर के पुराने शहर में स्थित गुटिया हनुमान जी मंदिर, रामचंद्र जी का मंदिर, मुरली मनोहर मंदिर सहित कई मंदिरों में सरकारी स्कूल संचालित हैं।
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