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राजस्थान का मोस्ट वांटेड तस्कर MP में बना कारीगर; जोधपुर से आए कारीगरों ने खोल दी पोल

राजस्थान का मोस्ट वांटेड तस्कर MP में बना कारीगर; जोधपुर से आए कारीगरों ने खोल दी पोल एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) को सूचना मिली कि विशनाराम मध्यप्रदेश में फर्नीचर का काम कर रहा है और उसने जोधपुर से भी कुछ कारीग…

Hindustan के अनुसार7 अक्टूबर 2026 को 05:04 am बजे
राजस्थान का मोस्ट वांटेड तस्कर MP में बना कारीगर; जोधपुर से आए कारीगरों ने खोल दी पोल

सौजन्य से:- Hindustan

राजस्थान का मोस्ट वांटेड तस्कर MP में बना कारीगर; जोधपुर से आए कारीगरों ने खोल दी पोल

एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) को सूचना मिली कि विशनाराम मध्यप्रदेश में फर्नीचर का काम कर रहा है और उसने जोधपुर से भी कुछ कारीगर बुलाए हैं। टीम ने इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए कारीगरों की गतिविधियों पर नजर रखना शुरू किया।

राजस्थान में मादक पदार्थ तस्करी के मामले में करीब दो साल से फरार चल रहा एक लाख रुपए का इनामी तस्कर पुलिस से बचने के लिए मध्यप्रदेश में पहचान बदलकर रहने लगा। बाड़मेर का विशनाराम मंदसौर में फर्नीचर कारीगर बनकर रह रहा था। वह स्थानीय लोगों के बीच इस तरह घुल-मिल गया था कि किसी को उसके अपराधी होने का शक तक नहीं हुआ। लेकिन जोधपुर से बुलाए गए कारीगरों की एक सूचना ने उसकी पूरी पोल खोल दी।

जोधपुर से कारीगर बुलाए, पुलिस को मिला सुराग

एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) को सूचना मिली कि विशनाराम मध्यप्रदेश में फर्नीचर का काम कर रहा है और उसने जोधपुर से भी कुछ कारीगर बुलाए हैं। टीम ने इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए कारीगरों की गतिविधियों पर नजर रखना शुरू किया।

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस की टीम मंदसौर जिले के पिपलियामंडी थाना क्षेत्र के उमरिया गांव तक पहुंच गई। यहां टीम को विशनाराम के छिपे होने का पता चला। पुलिस ने उसके ठिकाने की घेराबंदी की और मौका मिलते ही उसे दबोच लिया।

पार्टी के बीच पहुंची टीम, चारों तरफ से घेर लिया मकान

विशनाराम अपने एक तस्कर दोस्त के चाचा के मकान पर दोस्तों और कारीगरों के साथ पार्टी कर रहा था। उसे शायद अंदाजा भी नहीं था कि राजस्थान से पीछा कर रही एएनटीएफ टीम उसके बेहद करीब पहुंच चुकी है।

टीम ने मकान को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद दबिश देकर विशनाराम को गिरफ्तार कर लिया गया। करीब दो साल से फरार चल रहे आरोपी की गिरफ्तारी को एएनटीएफ की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

12 साल से अपराध की दुनिया में सक्रिय

एएनटीएफ आईजी विकास कुमार के मुताबिक, बाड़मेर के कुड़ला निवासी विशनाराम (32) पुत्र मदराम करीब 12 साल से अपराध की दुनिया में सक्रिय है। उसके खिलाफ राजस्थान के अलग-अलग थानों में डेढ़ दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज हैं।

इन मामलों में एनडीपीएस एक्ट के साथ मारपीट, हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट, चोरी और धोखाधड़ी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, विशनाराम का नेटवर्क राजस्थान के अलावा मध्यप्रदेश और हरियाणा तक फैला हुआ था।

पाइपलाइन कंपनी में ड्राइवर था, फिर तस्करी में उतर गया

विशनाराम पहले एक पाइपलाइन कंपनी में ड्राइवर का काम करता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात एक ऐसे तस्कर से हुई, जो मध्यप्रदेश से डोडा-पोस्त खरीदकर मारवाड़ में ऊंचे दाम पर सप्लाई करता था।

शुरुआत में विशनाराम उसके साथ खलासी के तौर पर जाने लगा। इस दौरान उसे तस्करी के पूरे नेटवर्क और कमाई का तरीका समझ में आया। धीरे-धीरे उसका लालच बढ़ा और उसने खुद मध्यप्रदेश के तस्करों से मादक पदार्थ खरीदकर राजस्थान में सप्लाई करना शुरू कर दिया।

जोधपुर में ठिकाने बदलता रहा, फिर राजस्थान छोड़ दिया

पुलिस से बचने के लिए विशनाराम जोधपुर में लगातार ठिकाने बदलता रहा। कभी किराए के मकान में तो कभी रिश्तेदारों के यहां छिपकर फरारी काटता था। एएनटीएफ की लगातार दबिश बढ़ी तो उसने राजस्थान छोड़ने का फैसला किया।

वह मध्यप्रदेश पहुंचा और पहचान छिपाकर फर्नीचर का काम शुरू कर दिया। यहां वह आम कारीगर की तरह रहने लगा, ताकि पुलिस और स्थानीय लोगों को उसके अतीत की भनक न लगे।

तीन राज्यों और छह जिलों तक फैला नेटवर्क

जांच में सामने आया कि विशनाराम ने शुरुआत स्थानीय तस्करों से की थी। बाद में उसके संपर्क मध्यप्रदेश और हरियाणा के तस्करों से भी हो गए। राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच उसने ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जिसके जरिए मारवाड़ क्षेत्र में बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ की सप्लाई की जाती थी।

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