सरफेसी कानून: बैंक संपत्तियों की जब्ती के लिए पुलिस तय दरों से अधिक शुल्क नहीं ले सकती, राजस्थान हाईकोर्ट का निर्देश - Law Trend
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरफेसी (SARFAESI) कानून के तहत गिरवी रखी गई संपत्तियों को कब्जे में लेने के लिए बैंकों को सहायता प्रदान करने वाली पुलिस कानूनी नियमों में तय दरों से अधिक शुल्क नहीं वसूल सकती। कोर्ट…

सौजन्य से:- Law Trend
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरफेसी (SARFAESI) कानून के तहत गिरवी रखी गई संपत्तियों को कब्जे में लेने के लिए बैंकों को सहायता प्रदान करने वाली पुलिस कानूनी नियमों में तय दरों से अधिक शुल्क नहीं वसूल सकती। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक सर्कुलर या विभागीय आदेशों के माध्यम से पुलिस शुल्क में बढ़ोतरी नहीं की जा सकती।
जस्टिस समीर जैन की पीठ ने एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक द्वारा दायर मुख्य याचिका सहित याचिकाओं के एक समूह पर यह फैसला सुनाया। यह निर्णय 12 अगस्त को पारित किया गया था और 19 अगस्त को सार्वजनिक हुआ।
वैधानिक दरों के आधार पर नए बिल जारी करने का आदेश
हाईकोर्ट ने राजस्थान पुलिस नियम, 2008 के नियम 10 में तय सीमाओं से अधिक जारी किए गए सभी शुल्क मांगों को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे कानून में तय शुल्क तालिका का सख्ती से पालन करते हुए संशोधित बिल जारी करें।
हालांकि, पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश भविष्य की तिथियों से ही प्रभावी होगा। बैंक पुराने प्रशासनिक सर्कुलर के तहत पहले से किए गए भुगतानों का रिफंड मांगने या पिछले मामलों को दोबारा खोलने के हकदार नहीं होंगे।
मामले की पृष्ठभूमि और विवाद की वजह
यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब कर्ज न चुकाने वाले (NPA) उधारकर्ताओं से गिरवी रखी गई संपत्तियों का भौतिक कब्जा लेने में व्यावसायिक बैंकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सरफेसी एक्ट के तहत नोटिस देने के बाद भी कब्जा न मिलने पर बैंकों ने दीवानी मुकदमों के बिना संपत्ति जब्त करने के लिए मैजिस्ट्रेट से पुलिस सहायता के आदेश प्राप्त किए।
एक मामले में, लगभग 5.51 लाख रुपये के बकाया ऋण के लिए संपत्ति पर कब्जा लेने हेतु तीन पुलिसकर्मियों—एक सब-इंस्पेक्टर, एक हेड कांस्टेबल और एक कांस्टेबल—की तैनाती के एवज में पुलिस ने 1.29 लाख रुपये का शुल्क मांगा। यह मांग अपर पुलिस महानिदेशक (कल्याण) द्वारा 3 फरवरी 2026 को जारी एक प्रशासनिक सर्कुलर के आधार पर की गई थी।
याचिकाकर्ता बैंकों ने तर्क दिया कि कार्यकारी सर्कुलर बिना कानूनी आधार के वित्तीय दायित्व नहीं थोप सकते और न ही अदालती आदेशों के निष्पादन के लिए तय पुलिस शुल्क में बदलाव कर सकते हैं। इसके जवाब में राज्य के वकील ने तर्क दिया कि निजी वाणिज्यिक बैंकों को संपत्ति कब्जे में लेने में मदद करना एक सशुल्क सेवा है, जिसका उद्देश्य निजी वित्तीय हितों की रक्षा करना है।
कानूनी ढांचा और तय दैनिक दरें
हाईकोर्ट ने निजी वसूली मामलों में पुलिस सहायता के लिए यूजर चार्ज लेने के राज्य सरकार के अधिकार को स्वीकार किया। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की वित्तीय शक्तियां राजस्थान पुलिस अधिनियम की धारा 46 के तहत तय नियम-निर्माण प्रक्रिया से संचालित होती हैं।
राजस्थान पुलिस नियम, 2008 के नियम 10 के अनुसार पुलिसकर्मियों की दैनिक तैनाती दरें इस प्रकार निर्धारित हैं:
- कांस्टेबल: 536 रुपये प्रति दिन
- हेड कांस्टेबल: 644 रुपये प्रति दिन
- सब-इंस्पेक्टर, असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर या प्लाटून कमांडर: 875 रुपये प्रति दिन
- इंस्पेक्टर: 1,010 रुपये प्रति दिन
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक निर्देश कानूनी नियमों को निष्प्रभावी नहीं कर सकते। यदि तैनाती शुल्क में कोई भी बदलाव करना है, तो उसे नियमों में औपचारिक संशोधन के माध्यम से ही लागू करना होगा।
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