माइसेटोमा के इलाज के लिए जापानी ड्रग का जोधपुर में ट्रायल, जानिए क्या है ये बीमारी
माइसेटोमा के इलाज के लिए जापानी ड्रग का जोधपुर में ट्रायल, जानिए क्या है ये बीमारी जानिए क्या है किड़ीनगरा (माइसेटोमा बीमारी) और क्या हैं इसके लक्षण, कारण और उपचार... Published : July 16, 2026 at 8:32 AM IST जोधपुर : माइ…

सौजन्य से:- ETV Bharat
माइसेटोमा के इलाज के लिए जापानी ड्रग का जोधपुर में ट्रायल, जानिए क्या है ये बीमारी
जानिए क्या है किड़ीनगरा (माइसेटोमा बीमारी) और क्या हैं इसके लक्षण, कारण और उपचार...
Published : July 16, 2026 at 8:32 AM IST
जोधपुर : माइसेटोमा बीमारी, जिसके अधिकांश मरीज मारवाड़ के इलाके से आते हैं. इसे यहां स्थानीय रूप से किड़ीनगरा के नाम से जाना जाता है. इसके उपचार के लिए कोई आधिकारिक मेडिसिन नहीं है, लेकिन डब्ल्यूएचओ से जुड़ी संस्था डीएनडीआई (डग्स फॉर नेग्लेक्टेड डिजीज इनिशिएटिव) के प्रयास से जापान ने इसके लिए दवाई विकसित की है, जिसका ट्रायल भारत के साथ-साथ केन्या और पश्चिमी अफ्रीका के सेनेगल में शुरू हुआ है. भारत में इसके लिए जोधपुर के डॉ. एसएन मेडिकल के स्किन डिपार्टमेंट को चुना गया है. यहां ट्रायल की जानकारी मिलने के साथ ही मरीजों की संख्या बढ़ रही है.
मेडिकल कॉलेज को इसके लिए दो प्रोजेक्ट मिले हैं. एक में ट्रायल होगा, जबकि दूसरे में मरीजों का सर्वे होगा. मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य और चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. दिलीप कच्छवाह ने बताया कि प्रोजेक्ट मिलने के बाद से हमारे पास दिल्ली-पंजाब से भी मरीज आ रहे हैं. जैसे-जैसे DNDi के साथ हमारा एसोसिएशन होता गया, पेशेंट बढ़ते गए और अब आजकल तो ऐसा हो रहा है कि सात दिन में एक नया पेशेंट आ रहा है.
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अभी नहीं कोई दवा, जापान ने बनाई इसके लिए ड्रग : डॉ. कच्छवाह ने बताया कि माइसेटोमा की कोई भी परफेक्ट मेडिसिन नहीं बनी है. पहली जापान में एंटी फंगल ड्रग फोसरावुकोनाजोल बनी, उसके रिजल्ट्स अच्छे बता रहे हैं. इसका ट्रायल शुरू कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि माइसेटोमा एक इस तरह की बीमारी है, जिसके लिए आज तक दवाइयों की शोध जारी है. अगर यह दवाई असरदार होती है तो लोगों को काफी फायदा होगा. अभी फंगल संक्रमण के इलाज की सफलता दर 40% मानी जाती है.
पश्चिमी राजस्थान में सर्वाधिक मरीज : डॉ. कच्छवाह ने बताया कि हमारे रीजन में, इसके मरीज ज्यादा हैं. जागरूकता के साथ बीमारी में कमी हुई है, लेकिन फिर भी सालाना 20 से ज्यादा केस आते हैं. इनमें 4 के पांव काटने पड़ते हैं. इस प्रोजेक्ट में माध्यम से अभी भी हम यह देखना चाह रहे हैं कि वेस्टर्न राजस्थान में कितना बर्डन है तो उसी हिसाब से इलाज के लिए रिसोर्सेज डेवलप किए जाएंगे. एमडीएम के चर्म रोग विभाग में आए फलोदी जिले के मरीज 45 वर्षीय किसान रघुनाथ ने बताया कि पहले निजी अस्पताल में दिखाया, लेकिन ठीक नहीं हुआ. अब यहां 20 दिन से हैं. थोड़ा फर्क पड़ा है. इसी तरह से सांचौर से आए 65 साल के बाबूलाल ने बताया कि छह-सात साल पहले हुआ था, ठीक हुआ लेकिन वापस हो गया है.
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सूखे इलाके में पाया जाता है माइसेटोमा फंगस : जो लोग सूखे क्षेत्र में खेतों में या खुली जगहों पर काम करते हैं, वो इसकी चपेट में ज्यादा आते हैं. ज्यादातर मामलों में नंगे पांव काम करने वालों के कांटा चुभने की शिकायत होती है. माइसेटोमा का फंगस खेतों में जमीन के ऊपर, कांटों और झाड़ियों के ऊपर होता है. जब कांटा चुभता है तो इसके स्पोर बॉडी में चले जाते हैं. हालांकि, सबको यह नहीं होता है. लंबे अंतराल के बाद जहां कांटा चुभा था या चोट लगी थी, वहां एक छोटा सा नोड्यूल यानी छोटी सी गांठ, उभार होता है.
बजरी के दानों जैसे ग्रेन्स निकलते हैं : डॉ. कच्छवाह ने बताया कि छोटी गांठ के उभार में धीरे-धीरे रस्सी (पस) बनती है, जो बाद में गांठ के मुंह से ग्रेन्स के रूप में निकलती है. बजरी के जितने छोटे-छोटे दाने होते हैं. साथ ही पस भी निकलती है. इन दानों के कई तरह के कलर हो सकते हैं. अगर समय पर एंटी फंगल ड्रग नहीं दिया जाए तो धीरे-धीरे ये अंदर तक फैल जाता है. एक समय पर इतना ज्यादा संकम्रण फैल जाता है कि उस अंग को काटना पड़ता है. एंटी फंगल ड्रग से फैलना रुक सकता है खत्म नहीं होता है.
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दुनिया के प्रत्येक सूखे क्षेत्र में पाया जाता है : दुनिया में माइसेटोमा बहुत से देशों में पाया जाता है. उष्णकटिबंधीय और उप उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में आने वाले देशों में मामले आते हैं. अफ्रीका में बहुत ज्यादा मामले आते हैं. वहां अशिक्षा और गरीबी इसकी मुख्य वजह है. भारत में सबसे अधिक मामले राजस्थान में आते हैं. इसके बाद तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में आते हैं. पंजाब, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में भी इक्का दुक्का केस सालाना आते हैं.
क्या होता है कीड़ीनगरा : कीड़ीनगरा सामान्यतः राजस्थान में उस जगह को कहा जाता है, जहां पर जमीन पर एक छेद में से चींटियां निकलती रहती हैं. राजस्थान में चींटियों को कीड़ी कहा जाता है, नगरा का आशय उसका घर होता है. जमीन के छेद से जहां से उनका आना जाना रहता है. पंडित ज्योतिष की सलाह पर लोग अपने दोष दूर करने के लिए इनको भोजन करवाने के लिए आटा और शक्कर छेद पर डालते हैं.
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