राजस्थान में प्रसूताओं की मौत से हड़कंप! भीलवाड़ा-बांसवाड़ा केस पर एक्शन में सरकार, मंत्री करेंगे दौरा
Sign In Advertisement X राजस्थान में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में प्रसूताओं की मौत के मामलों ने सरकार को…

सौजन्य से:- AajTak
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राजस्थान में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में प्रसूताओं की मौत के मामलों ने सरकार को एक्शन मोड में ला दिया है. हेल्थ डिपार्टमेंट ने साफ कर दिया है कि इन दोनों घटनाओं की सिर्फ औपचारिक जांच नहीं होगी, बल्कि मौत की असली वजह तक पहुंचने के लिए विशेषज्ञों की टीम मौके पर भेजी जाएगी.
सबसे ज्यादा चर्चा भीलवाड़ा मामले की हो रही है, जहां अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में इन्फेक्शन की आशंका जताई जा रही थी. हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि शुरुआती जांच में ओटी में इन्फेक्शन की पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन सरकार ने यह भी साफ किया है कि शुरुआती रिपोर्ट को अंतिम सच नहीं माना जाएगा. हर पहलू की गहराई से जांच होगी और उसके बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा.
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इसी सिलसिले में सोमवार को प्रदेश के गायनिक विशेषज्ञों की बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में दोनों मामलों की समीक्षा होगी और यह देखा जाएगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था में क्या बदलाव किए जा सकते हैं. यानी सरकार सिर्फ जांच तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सिस्टम में सुधार की भी तैयारी कर रही है.
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यह भी पढ़ें: राजस्थान: भीलवाड़ा में 6 दिन में 5 और बांसवाड़ा में 4 प्रसूताओं की मौत से हड़कंप, जयपुर से एक्सपर्ट टीम जांच को रवाना
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंगलवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री खुद भीलवाड़ा पहुंचेंगे. वह अस्पताल का जायजा लेंगे, अधिकारियों से रिपोर्ट लेंगे और जांच की समीक्षा करेंगे. स्वास्थ्य विभाग ने यह भी दोहराया है कि अगर जांच में किसी डॉक्टर, कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल दोनों मामलों की विस्तृत जांच जारी है.
भीलवाड़ा और बांसवाड़ा हो चुकी हैं कई मौतें
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (एमसीएच) में छह दिनों में पांच प्रसूताओं की मौत हो चुकी है. इनमें संगीता जीनगर, शिमला गुर्जर, फोरी देवी, ईशा पांडे और दिव्या शामिल हैं. सभी महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी और ऑपरेशन के बाद तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. हर मामले में परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए. मार्च से अब तक अस्पताल में प्रसूताओं की मौत का आंकड़ा नौ तक पहुंच चुका है, जिनमें से पांच मौतें सिर्फ जुलाई के पहले 11 दिनों में हुई हैं. वहीं, बांसवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय में भी 7 से 10 जुलाई के बीच एक नाबालिग समेत चार प्रसूताओं की मौत हो चुकी है.
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