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जोधपुर के MGH में प्रसूता की मौत, बच्ची को जन्म देने के बाद थम गई मां की सांसें

जोधपुर के MGH में प्रसूता की मौत, बच्ची को जन्म देने के बाद थम गई मां की सांसें जोधपुर में पिछले एक महीने के दौरान प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। अस्पतालों के आंकड़ों के अनुस…

Hindustan के अनुसार20 जुलाई 2026 को 01:32 pm बजे
जोधपुर के MGH में प्रसूता की मौत, बच्ची को जन्म देने के बाद थम गई मां की सांसें

सौजन्य से:- Hindustan

जोधपुर के MGH में प्रसूता की मौत, बच्ची को जन्म देने के बाद थम गई मां की सांसें

जोधपुर में पिछले एक महीने के दौरान प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। अस्पतालों के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में 16 प्रसूताओं की हालत गंभीर हुई है। इनमें अधिकांश महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी

राजस्थान में प्रसूताओं की मौत और डिलीवरी के बाद गंभीर रूप से बीमार होने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। कोटा, बीकानेर और बांसवाड़ा के बाद अब जोधपुर में भी एक प्रसूता की मौत हो गई। महिला ने 24 जून को तिंवरी अस्पताल में सामान्य (नॉर्मल) डिलीवरी के जरिए बच्ची को जन्म दिया था। डिलीवरी के बाद अत्यधिक रक्तस्राव होने पर उसे पहले उम्मेद अस्पताल और फिर महात्मा गांधी अस्पताल रेफर किया गया, जहां करीब एक महीने तक इलाज के बाद रविवार देर रात उसकी मौत हो गई।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, महिला की हालत डिलीवरी के तुरंत बाद बिगड़ने लगी थी। लगातार खून बहने के कारण उसे गंभीर अवस्था में जोधपुर रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन अंततः उसकी जान नहीं बच सकी।

डिलीवरी के बाद नहीं रुका खून, बच्चेदानी निकालनी पड़ी

महात्मा गांधी अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. फतेह सिंह ने बताया कि महिला की 24 जून को तिंवरी अस्पताल में सामान्य डिलीवरी हुई थी और उसने एक बच्ची को जन्म दिया था। डिलीवरी के बाद उसका रक्तस्राव बंद नहीं हुआ, जिसके कारण उसे जोधपुर के उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया।

डॉक्टरों के मुताबिक, जब महिला अस्पताल पहुंची तब तक काफी खून बह चुका था। लगातार ब्लीडिंग होने की वजह से उसकी जान बचाने के लिए बच्चेदानी (यूटेरस) निकालनी पड़ी। इलाज के दौरान उसे लगातार ब्लड, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स चढ़ाए गए, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी किडनी भी प्रभावित हो गई।

किडनी फेल होने के बाद डायलिसिस, फिर आंतों में हुआ गैंगरीन

उम्मेद अस्पताल में चार दिन इलाज के बाद महिला को 27 जून को महात्मा गांधी अस्पताल रेफर किया गया। यहां उसे वेंटिलेटर पर रखा गया और लगातार डायलिसिस किया जाता रहा।

डॉ. फतेह सिंह ने बताया कि 15 जुलाई को सोनोग्राफी और सीटी स्कैन में महिला की आंतों में गैंगरीन होने का पता चला। इसके बाद ऑपरेशन किया गया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं आया। 14 जुलाई से उसकी तबीयत फिर तेजी से बिगड़ने लगी, उल्टियां शुरू हो गईं और रविवार देर रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

हाइपोवॉलेमिक शॉक बना मौत की बड़ी वजह

डॉक्टरों के अनुसार, अत्यधिक रक्तस्राव के कारण महिला हाइपोवॉलेमिक शॉक की स्थिति में पहुंच गई थी। इस स्थिति में शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता, जिससे किडनी सहित कई अंग प्रभावित होने लगते हैं।

महिला की जान बचाने के लिए उसे 6 यूनिट ब्लड, 14 यूनिट प्लाज्मा और 10 यूनिट क्रायोप्रेसिपिटेट चढ़ाया गया, लेकिन हालत लगातार गंभीर बनी रही।

एक महीने में 16 प्रसूताओं की बिगड़ी तबीयत, 7 का इलाज जारी

जोधपुर में पिछले एक महीने के दौरान प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। अस्पतालों के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में 16 प्रसूताओं की हालत गंभीर हुई है। इनमें अधिकांश महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी, जबकि कुछ मामलों में सामान्य प्रसव के बाद भी गंभीर जटिलताएं सामने आईं।

इनमें एक मामला धापू नाम की महिला का भी है, जिसकी 11 जुलाई को बावड़ी में सामान्य डिलीवरी हुई थी। एनीमिया के कारण उसे रेफर किया गया और बाद में कथित तौर पर गलत ब्लड चढ़ाने के बाद उसकी हालत और बिगड़ गई। फिलहाल उसका इलाज जारी है।

वर्तमान में उम्मेद अस्पताल में पांच और महात्मा गांधी अस्पताल में दो प्रसूताओं का उपचार चल रहा है। इनमें धापू भी शामिल है।

लगातार बढ़ रहे मामलों से उठ रहे सवाल

राजस्थान में हाल के महीनों में प्रसूताओं की मौत और डिलीवरी के बाद गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के लगातार सामने आ रहे मामलों ने सरकारी अस्पतालों की मातृ स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जोधपुर की यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब राज्य के अन्य जिलों में भी प्रसूताओं की मौत और गंभीर बीमार होने के मामलों को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग इन मामलों की समीक्षा कर रहा है, जबकि विशेषज्ञ समय पर उपचार, रक्त की उपलब्धता और रेफरल सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत बता रहे हैं।

लेखक के बारे में

Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)

सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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