रक्षाबंधन पर अजमेर जेल में छलके आंसू, कलाई पर धागा बांधकर बहनों ने मांगी ऐसी चीज, सुनकर रो पड़े कैदी भाई
देशभर में रक्षाबंधन पर अलग-अलग नेताओं, फिल्मी सितारों और और बड़ी हस्तियों ने राखी कैसे मनाई ये तो आपने देखा ही होगा, लेकिन अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में सलाखों के पीछे जब आंसू छलके तो देखने वालों की आंखें भी नम हो गई। अजम…

सौजन्य से:- Navbharat Times
देशभर में रक्षाबंधन पर अलग-अलग नेताओं, फिल्मी सितारों और और बड़ी हस्तियों ने राखी कैसे मनाई ये तो आपने देखा ही होगा, लेकिन अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में सलाखों के पीछे जब आंसू छलके तो देखने वालों की आंखें भी नम हो गई।
अजमेर: रक्षाबंधन की सुबह जहां पूरा देश खुशियों के रंगों में सराबोर था, वहीं अजमेर केंद्रीय कारागार के लोहे के भारी दरवाजों के पीछे एक अलग ही कहानी लिखी जा रही थी। बाहर कतार में खड़ी सैकड़ों बहनों के हाथों में राखियों की थाली थी, लेकिन मन में एक अनजाना डर और भारीपन। सवाल एक ही था- क्या सलाखों की सख्ती आज भाई-बहन के इस पावन रिश्ते को महसूस होने देगी?
लोहे के दरवाजों के पीछे बदला माहौल
जैसे ही जेल के कड़े सुरक्षा घेरे से गुजरकर बहनें मुलाकात कक्ष में पहुंचीं, वहां की खामोशी अचानक सिसकियों में बदल गई। सलाखों के उस पार खड़े भाइयों को देखते ही बहनों के सब्र का बांध टूट गया। सालों से अपनों से दूर, गुमनामी और अपराध के अंधेरे में जी रहे भाइयों के चेहरे पर भी वही पछतावा साफ नजर आ रहा था। रेशमी धागे जब कलाई पर बंधे, तो सिर्फ राखी नहीं बंधी, सालों से दबा हुआ दर्द आंसुओं के रूप में छलक पड़ा।
बहनों ने भाइयों से मांगा अनूठा उपहार
अक्सर रक्षाबंधन पर बहनें भाइयों से सुरक्षा और उपहार मांगती हैं, लेकिन इस जेल की सलाखों के बीच नजारा बिल्कुल उलट था। रोली-अक्षत लगाने के बाद बहनों ने भाइयों का हाथ अपने हाथों में लिया और एक ऐसी मांग रख दी, जिसने वहां मौजूद हर शख्स गर्व महसूस करने लगा। बहनों ने रुंधे गले से कहा-
हमें कोई तोहफा नहीं चाहिए, बस इतना वादा करो कि जुर्म का रास्ता छोड़ अंधेरी दुनिया से बाहर निकलोगे।
महिलाएं जो जेल में राखी बांधने पहुंची
भाइयों ने कलाई पर बंधे उस धागे की कसम खाते हुए हमेशा के लिए जुर्म की राह छोड़ने और एक नया इंसान बनने का वचन दिया।
जब खाकी के सख्त पहरे में झलकी इंसानियत
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और हैरान कर देने वाला दृश्य सामने आया। जेल की सख्त निगरानी कर रहे सुपरिंटेंडेंट आर. अनंतेश्वर और उनके स्टाफ का रुख आज सख्त नहीं, बल्कि बेहद संवेदनशील था। परिजनों के लिए मिठाई और बैठने का खास इंतजाम देखकर कुछ बंदियों की बहनें इतनी अभिभूत हुईं कि उन्होंने जेल सुपरिंटेंडेंट की कलाई पर भी रक्षासूत्र बांध दिया। सजा और सुरक्षा के बीच अजमेर जेल का यह रक्षाबंधन महज एक रस्म नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा मोड़ बन गया जहां पश्चाताप ने नए जीवन का रास्ता दिखा दिया।
लेखक के बारे मेंपुलकित सक्सेनापुलकित सक्सेना नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वह साल 2022 नवंबर महीने से नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े। वर्तमान में राजस्थान के लिए काम करते हैं। 2019 में पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली के नेशनल टीवी चैनल में इनपुट डेस्क से की। बीते 7 सालों में टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया और अब डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका में कार्यरत हैं।
राजस्थान की राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर्स और ऑफ बीट खबरों पर नजर रखना पुलकित सक्सेना की पहली प्राथमिकता रहती है।
विशेषज्ञता- राजनीति, क्राइम, एनलिसिस, सियासी उठा पटक को कवर करना।
पत्रकारिता अनुभव: 7 साल से कार्यरत
पुलकित सक्सेना ने साल 2017 में जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरी की। साल 2019 में देश की प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से दिल्ली में प्रथम श्रेणी से पोस्ट ग्रेजुएशन पत्रकारिता में किया। इसके बाद साल 2019 में दिल्ली से टीवी 100 न्यूज चैनल से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद राजस्थान के यूट्यूब न्यूज चैनल में एंकरिंग, पैकेज क्रिएशन और सोशल मीडिया हैंडल के लिए सक्रियता से काम किया। साल 2022 के नवंबर महीने में वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में जुड़े। वर्तमान में बीते तीन साल से वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।... और पढ़ें
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