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कॉकरोच पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका के घर आने-जाने वालों पर नजर रख रही राजस्थान पुलिस?

कॉकरोच पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका के घर आने-जाने वालों पर नजर रख रही राजस्थान पुलिस? इस सवाल का संबंध सीधे रामपुरा-कंवरपुरा स्कूल विवाद से जुड़ता है। 21 अगस्त को CJP की टीम सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची थी। इ…

Hindustan के अनुसार26 अगस्त 2026 को 08:22 am बजे
कॉकरोच पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका के घर आने-जाने वालों पर नजर रख रही राजस्थान पुलिस?

सौजन्य से:- Hindustan

कॉकरोच पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका के घर आने-जाने वालों पर नजर रख रही राजस्थान पुलिस?

इस सवाल का संबंध सीधे रामपुरा-कंवरपुरा स्कूल विवाद से जुड़ता है। 21 अगस्त को CJP की टीम सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची थी। इस दौरान ग्रामीणों और CJP कार्यकर्ताओं के बीच विवाद बढ़ गया। धक्का-मुक्की, मारपीट और वाहनों को नुकसान पहुंचाने के आरोप सामने आए।

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि राजस्थान पुलिस उनके घर आने-जाने वाले लोगों पर नजर रख रही है और उनकी निगरानी की जा रही है।

पुलिस की निगरानी किए जाने का दावा फिलहाल पुष्ट नहीं होता। जयपुर पुलिस की ओर से दी गई सफाई के मुताबिक पुलिस रांका की निगरानी के लिए उनके घर नहीं पहुंची थी। पुलिस एक दूसरे पते पर तस्दीक करने गई थी और संयोग से वह स्थान रांका के घर के पास था। ऐसे में रांका के दावे और पुलिस के आधिकारिक पक्ष में स्पष्ट अंतर नजर आता है।

राजस्थान में CJP के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। जयपुर के बगरू इलाके के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में सरकारी स्कूल के निरीक्षण के दौरान हुए विवाद के कुछ दिन बाद CJP के सह-संयोजक और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने पुलिस पर निगरानी का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर राजस्थान पुलिस को टैग करते हुए कहा कि उनके घर आने-जाने वाले हर व्यक्ति पर नजर रखी जा रही है।

रांका ने यह भी कहा कि अगर पुलिस उन्हें गिरफ्तार करना चाहती है तो सीधे आकर गिरफ्तार कर सकती है। उन्होंने अपने और अपनी टीम के स्कूल अभियान को जारी रखने की बात कही। उनका यह पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगा कि क्या स्कूल विवाद के बाद पुलिस वास्तव में रांका की निगरानी कर रही है?

पुलिस का क्या कहना है?

इस दावे की पड़ताल में सबसे महत्वपूर्ण पक्ष पुलिस की सफाई है। DCP ईस्ट रंजिता शर्मा के मुताबिक पुलिस किसी दूसरे पते पर तस्दीक करने के लिए गई थी। जिस स्थान पर पुलिस पहुंची, उसी इलाके में आशुतोष रांका का घर भी था। पुलिस का कहना है कि इसे रांका की निगरानी से जोड़ना सही नहीं है।

यानी अभी तक ऐसा कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि पुलिस ने रांका के घर आने-जाने वाले लोगों की निगरानी के लिए विशेष तौर पर कोई टीम लगाई थी।

रांका का आरोप एक दावा है, लेकिन पुलिस की तरफ से उसका खंडन किया गया है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे तथ्य के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा। फिलहाल दावा अप्रमाणित/पुलिस के अनुसार गलत है।

फिर पुलिस रांका के इलाके में क्यों पहुंची?

इस सवाल का संबंध सीधे रामपुरा-कंवरपुरा स्कूल विवाद से जुड़ता है। 21 अगस्त को CJP की टीम सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची थी। इस दौरान ग्रामीणों और CJP कार्यकर्ताओं के बीच विवाद बढ़ गया। धक्का-मुक्की, मारपीट और वाहनों को नुकसान पहुंचाने के आरोप सामने आए। रांका ने आरोप लगाया था कि हमले के पीछे BJP से जुड़े लोग थे, जबकि ग्रामीणों की ओर से भी CJP टीम पर आरोप लगाए गए।

मामला सिर्फ सोशल मीडिया आरोपों तक नहीं रहा। दोनों पक्षों की ओर से पुलिस में शिकायतें दर्ज हुईं और क्रॉस FIR का मामला सामने आया। ग्रामीण पक्ष की शिकायत में CJP टीम पर आरोप लगाए गए, जबकि CJP की ओर से भी ग्रामीणों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई।

यही वजह है कि पुलिस की किसी जांच या तस्दीक को लेकर इलाके में मौजूदगी को सीधे ‘निगरानी’ मान लेना जल्दबाजी होगी।

क्या स्कूल विवाद सच था?

यहां भी तस्वीर एकतरफा नहीं है। CJP ने स्कूल की बदहाल स्थिति को मुद्दा बनाया था और टीम निरीक्षण के लिए पहुंची थी। मीडिया रिपोर्टों में स्कूल की स्थिति को लेकर भी पड़ताल हुई। NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट में स्कूल परिसर और वहां बच्चों के पहुंचने की स्थिति का उल्लेख किया गया।

विवाद के बाद स्कूल को दूसरी जगह शिफ्ट किए जाने और नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने की खबर भी सामने आई है।

असली सवाल क्या है?

इस पूरे मामले में दो अलग-अलग मुद्दों को अलग रखना जरूरी है पहला, स्कूल की स्थिति और CJP टीम के साथ हुआ विवाद; दूसरा, आशुतोष रांका की पुलिस निगरानी का दावा।

पहले मामले में दोनों पक्षों की शिकायतें और FIR दर्ज होने की जानकारी मौजूद है। लेकिन दूसरे मामले में पुलिस ने निगरानी के आरोप को खारिज किया है और कहा है कि पुलिस की मौजूदगी किसी अन्य पते पर जांच के लिए थी।

आशुतोष रांका का यह कहना कि पुलिस उनके घर आने-जाने वालों पर नजर रख रही है, फिलहाल साबित नहीं हुआ है। पुलिस ने इसे गलत बताया है और अपनी मौजूदगी की दूसरी वजह बताई है। इसलिए इस दावे को ‘पुलिस निगरानी का सबूत’ बताकर पेश करना भ्रामक होगा। हां, स्कूल विवाद और दोनों पक्षों की FIR के कारण पुलिस जांच चल रही है।

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