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हत्या के दो सजायाफ्ता कैदियों का विवाह जोधपुर की ओपन जेल में होगा

राजस्थान हाई कोर्ट ने हत्या के दो सजायाफ्ता कैदियों मूलाराम और सीमा को अपना आपसी विवाह जोधपुर की ओपन जेल में करने की सहमति दी है। दोनों को उम्रकैद की सजा हुई है। विवाह समारोह में केवल 21 सदस्य शामिल हो सकते हैं और खर्चा मूलाराम ही उठाएगा। सीमा ने अपने पति की हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा प्राप्त की है। X के अनुसार...

ETV Bharat के अनुसार16 जुलाई 2026 को 04:23 am बजे
हत्या के दो सजायाफ्ता कैदियों का विवाह जोधपुर की ओपन जेल में होगा

सौजन्य से:- ETV Bharat

एक विवाह ऐसा भी: जोधपुर की ओपन जेल में सात फेरे लेंगे हत्या के दो सजायाफ्ता कैदी, राजस्थान हाई कोर्ट ने दी मंजूरी

विवाह समारोह में दोनों पक्षों के अधिकतम 21 सदस्य पंडित के साथ ओपन जेल कैंप में आ सकेंगे. विवाह का पूरा खर्चा युवक स्वयं उठाएगा.

Published : July 16, 2026 at 8:42 AM IST

जोधपुर: राजस्थान हाई कोर्ट के एक आदेश पर जोधपुर के मंडोर स्थित ओपन जेल में शहनाई गूंजेगी. यहां हत्या के आरोप में सजा काट रहे मूलाराम और सीमा का विवाह होगा. मूलाराम अपने पड़ोसी की हत्या के आरोप में सजा काट रहा है, जबकि उससे विवाह करने वाली सीमा अपने पति की हत्या के आरोप में जेल में है. दोनों उम्रकैद की सजा काट रहे हैं. हाई कोर्ट के न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी और प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने नागौर निवासी मूलाराम की अस्थाई सजा निलंबन याचिका का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया है.

मूलाराम 16 जनवरी 2017 से आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. वर्तमान में वह मंडोर ओपन जेल में है. मूलाराम के अधिवक्ता कालूराम भाटी ने बताया कि वह सीमा से विवाह करना चाहता है. सीमा भी अपने पति की हत्या के मामले में दोषी साबित हो चुकी है, लेकिन वह अभी 40 दिन की पैरोल पर है. याचिका में कहा गया कि विवाह से दोनों के पुनर्वास और सुधार की प्रक्रिया को बल मिलेगा तथा वे भविष्य में सामान्य पारिवारिक जीवन जी सकेंगे. इस पर हाईकोर्ट ने पूर्व निर्णय का हवाला दिया, जिसमें बंदियों के वैवाहिक और संतानोत्पत्ति से संबंधित अधिकार को अनुच्छेद 21 के दायरे में माना गया था. भाटी के अनुसार विवाह 22 जुलाई को हो सकता है.

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जेल में लिव-इन, सहमति से विवाह: सरकार की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में दोनों के विवाह की इच्छा और उनके बीच लिव-इन संबंध होने की पुष्टि की गई. सुनवाई के दौरान लोक अभियोजकों ने भी कहा कि जेल नियमों के तहत ओपन जेल कैंप में विधि सम्मत विवाह करने पर सरकार को कोई आपत्ति नहीं है. खंडपीठ ने कहा कि विवाह समाज की आधारभूत संस्था है और दोष सिद्ध बंदियों को भी सहमति से विवाह करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता.

खर्चा मूलाराम उठाएगा: हाई कोर्ट की खंडपीठ ने निर्देश दिए कि विवाह समारोह में दोनों पक्षों के अधिकतम 21 सदस्य पंडित के साथ ओपन जेल कैंप में आ सकेंगे. अतिथियों की संख्या बढ़ाने का निर्णय कैंप प्रशासन करेगा. विवाह की तिथि की पूर्व सूचना देनी होगी और समारोह का पूरा खर्चा मूलाराम स्वयं उठाएगा.

जेल में रहते सरपंच बना मूलाराम: मूलाराम नागौर के अडसिंगा का निवासी है. परिवार खेती करता था. उसके पिता का पड़ोसी से विवाद था. वर्ष 2017 में मूलाराम पड़ोसी युवक को बाइक पर बिठाकर ले गया था, लेकिन बाद में उसकी डेड बॉडी टांके से मिली थी. इसके लिए कोर्ट ने मूलाराम को हत्या का दोषी माना था. अगस्त 2023 अगस्त में उसे उम्रकैद की सजा हुई थी. दो साल से वह मंडोर में ओपन और जेल कैंप में सरपंच पद पर काम कर रहा है.

सोते हुए पति की काटी थी नसें: सीमा घड़से मूलतः महाराष्ट्र में मुंबई के पास की है. वर्ष 2016 में उसकी शादी जोधपुर के घंटाघर निवासी कौशलराज अरोड़ा से हुई थी. मर्जी के खिलाफ हुई इस सीमा इस शादी से खुश नहीं थी. शादी के 2 महीने बाद ही सीमा ने सोते हुए पति की दोनों हाथ की नसें धारदार वस्तु से काट दी थीं. इससे कौशलराज की मौत हो गई थी. उसने चोर आने का बहाना बनाया, लेकिन कोर्ट में वर्ष 2019 में सीमा को उम्रकैद की सजा मिली थी.

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