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यमुना जल परियोजना: धरातल पर उतरने को तैयार सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट, डीपीआर और निर्माण प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार

यमुना जल परियोजना: धरातल पर उतरने को तैयार सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट, डीपीआर और निर्माण प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार यमुना जल परियोजना को गति देते हुए राजस्थान सरकार ने हाइड्रोलॉजी स्वीकृतियां हासिल कर चूरू में जलाशय की निवि…

ETV Bharat के अनुसार25 अगस्त 2026 को 01:55 am बजे
यमुना जल परियोजना: धरातल पर उतरने को तैयार सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट, डीपीआर और निर्माण प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार

सौजन्य से:- ETV Bharat

यमुना जल परियोजना: धरातल पर उतरने को तैयार सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट, डीपीआर और निर्माण प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार

यमुना जल परियोजना को गति देते हुए राजस्थान सरकार ने हाइड्रोलॉजी स्वीकृतियां हासिल कर चूरू में जलाशय की निविदा जारी की है.

Published : August 25, 2026 at 7:01 AM IST

जयपुर : लंबे समय से बहुप्रतीक्षित और रणनीतिक रूप से अहम मानी जा रही 'यमुना जल परियोजना' को अमलीजामा पहनाने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के लिए जरूरी हाइड्रोलॉजी और अंतरराज्यीय स्वीकृतियां औपचारिक रूप से जारी कर दी गई हैं. इन अहम मंजूरियों के बाद अब डीपीआर के अंतिम अनुमोदन और तकनीकी प्रक्रियाओं को गति मिलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है.

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को परियोजना की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को सभी प्रक्रियाएं तय समय सीमा में पूरी करने के निर्देश दिए. राजनीतिक तौर पर भी यह परियोजना भजनलाल सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. राजस्थान में लंबे समय से पानी को विकास और राजनीतिक मुद्दे के तौर पर देखा जाता रहा है. ऐसे में यमुना जल परियोजना को आगे बढ़ाना सरकार के लिए केवल एक बड़ी जल परियोजना नहीं, बल्कि पूर्वी राजस्थान के जल संकट को दूर करने के अपने वादे को जमीन पर उतारने की दिशा में अहम उपलब्धि के रूप में पेश करने का अवसर है.

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दिल्ली में हुई डीपीआर की विस्तृत समीक्षा : समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री भजन लाल ने बताया गया कि 21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित केंद्रीय जल आयोग में यमुना जल परियोजना की डीपीआर की विस्तृत समीक्षा की गई. इसके बाद मुख्यमंत्री ने परियोजना के कंसल्टेंट नेबकॉन (NABCONS) के विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों को लगातार समन्वय करते हुए डीपीआर अनुमोदन की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए. सरकार का फोकस अब परियोजना से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों को तेजी से दूर करने पर है, ताकि निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके. हाइड्रोलॉजी और अंतरराज्यीय स्वीकृतियां जारी होने को इसी दिशा में बड़ी प्रगति माना जा रहा है.

पानी की राजनीति में सरकार के लिए बड़ा प्रोजेक्ट : यमुना जल परियोजना का राजनीतिक महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि राजस्थान के कई इलाकों में पानी की उपलब्धता लंबे समय से बड़ा चुनावी और जनसरोकार का मुद्दा रही है. परियोजना के जरिए राज्य सरकार यह संदेश देने की स्थिति में होगी कि पूर्वी और उत्तरी राजस्थान में जल उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराज्यीय समन्वय, डीपीआर और निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है. बीजेपी के लिए यह परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा और आगामी निकाय-पंचायत चुनावों में पानी, सिंचाई और पेयजल जैसे स्थानीय मुद्दे प्रमुख रहने वाले हैं. परियोजना की प्रगति को सरकार अपने विकास एजेंडे और जल प्रबंधन की उपलब्धि के तौर पर जनता के सामने रख सकती है.

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चूरू के धनोटी जलाशय के साथ निर्माण का पहला चरण शुरू : कागजी औपचारिकताओं के बीच जमीनी स्तर पर भी काम दिखने लगा है. परियोजना की रूपरेखा के तहत चूरू जिले के हॉसियावास क्षेत्र में कुल तीन जलाशयों का निर्माण प्रस्तावित है. इनमें से पहले 'धनोटी जलाशय' की तकनीकी निविदा जारी की जा चुकी है, जिसे 27 अगस्त को खोला जाएगा. मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को कड़े शब्दों में कहा कि निविदा आवंटन और उससे जुड़े सभी जमीनी काम तय समय पर पूरे होने चाहिए. इस कदम से स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार अब केवल बैठकों और योजनाओं तक सीमित न रहकर फील्ड में निर्माण कार्य शुरू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

एमओए के बाद अब एसपीवी गठन पर जोर : 29 जून 2026 को हुए एमओए के बाद अब परियोजना के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के गठन की प्रक्रिया भी तेज की जा रही है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एसपीवी गठन के लिए प्रस्ताव जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. एसपीवी का गठन परियोजना के क्रियान्वयन को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा. इससे परियोजना से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच समन्वय और निर्माण कार्यों की निगरानी को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी.

अब अगली नजर डीपीआर और निर्माण पर : फिलहाल परियोजना के लिए हाइड्रोलॉजी और अंतरराज्यीय स्वीकृतियां मिलने के बाद अगला बड़ा पड़ाव डीपीआर का अनुमोदन और एसपीवी का गठन है. इसके बाद निर्माण कार्यों को गति देने की राह और आसान होगी. बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव जल संसाधन अभय कुमार ने परियोजना की प्रगति की जानकारी दी. अतिरिक्त मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय अखिल अरोड़ा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे.

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रक्षाबंधन पर भाई-बहन के नाम एक पौधा : उधर, एक अन्य बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हरियालो राजस्थान अभियान की. रक्षाबंधन के पावन पर्व को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से ‘एक पेड़ भाई-बहन के नाम’ लगाने का भावनात्मक आह्वान किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहारों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर प्रदेश में हरियाली का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाए. उन्होंने पौधारोपण करने वाले भाई-बहनों को सम्मानित करने के भी निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान के तहत इस वर्ष 10 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है और अब तक 7 करोड़ 58 लाख से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं. उन्होंने विभागों को आपसी समन्वय से पौधारोपण करने के साथ लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. लापरवाही बरतने वाले कार्मिकों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए

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