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राजस्थान में जेल के अंदर शादी: हाईकोर्ट ने दी अनुमति, समाज के साथ जुड़ने का मौका

राजस्थान की मंडोर ओपन जेल में उम्रकैद के दो दोषियों के बीच विवाह होने वाला है। राज्य हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जेल का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि उन्हें समाज में सम्मानपूर्वक दोबारा स्थापित करना भी है। विवाह जैसे सामाजिक संस्थान कैदी के पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Hindustan के अनुसार16 जुलाई 2026 को 11:02 am बजे
राजस्थान में जेल के अंदर शादी: हाईकोर्ट ने दी अनुमति, समाज के साथ जुड़ने का मौका

सौजन्य से:- Hindustan

उम्रकैद के दो दोषियों की शादी अब जेल के अंदर होगी; राजस्थान में पहली बार जेल में गूंजेंगी शहनाइयां

हाल ही में सीमा को 40 दिन की पैरोल मिली। इसी दौरान दोनों ने विवाह करने का निर्णय लिया और हाईकोर्ट में अनुमति के लिए याचिका दायर की।

राजस्थान की जेल व्यवस्था में पहली बार ऐसा नजारा देखने को मिलेगा, जब किसी जेल परिसर में शहनाई बजेगी, सात फेरे होंगे और विवाह की रस्में पूरी की जाएंगी। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि राजस्थान हाईकोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद हकीकत बनने जा रहा है। 22 जुलाई को जोधपुर की मंडोर ओपन जेल में दो दोषसिद्ध कैदी विवाह बंधन में बंधेंगे। इसे राजस्थान की जेल सुधार व्यवस्था और कैदियों के पुनर्वास की दिशा में एक बड़ा और अनोखा कदम माना जा रहा है।

राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उम्रकैद की सजा काट रहे बंदी मूलाराम भाटी और पैरोल पर बाहर चल रही दोषसिद्ध महिला सीमा को विवाह की अनुमति देते हुए कहा कि जेल का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर देना भी है।

खेती करते-करते हुई मुलाकात, फिर रिश्ते ने लिया जीवनभर के साथ का रूप

जानकारी के अनुसार, नागौर जिले के अडसिंगा निवासी 33 वर्षीय मूलाराम भाटी वर्ष 2017 से न्यायिक अभिरक्षा में हैं। करीब दो साल पहले उन्हें अजमेर जेल से जोधपुर की मंडोर ओपन जेल में स्थानांतरित किया गया था।

दूसरी ओर, मुंबई निवासी 31 वर्षीय सीमा को करीब डेढ़ साल पहले महिला जेल से मंडोर ओपन जेल भेजा गया। ओपन जेल के नियमों के तहत दोनों खेती और अन्य श्रम कार्यों में लगे हुए थे। इसी दौरान दोनों के बीच परिचय हुआ। धीरे-धीरे यह परिचय दोस्ती में और फिर जीवनसाथी बनने के फैसले तक पहुंच गया।

हाल ही में सीमा को 40 दिन की पैरोल मिली। इसी दौरान दोनों ने विवाह करने का निर्णय लिया और हाईकोर्ट में अनुमति के लिए याचिका दायर की।

22 जुलाई को जेल परिसर में गूंजेंगी शहनाइयां

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब 22 जुलाई को मंडोर ओपन जेल परिसर में जेल प्रशासन की निगरानी में दोनों का विवाह संपन्न कराया जाएगा। यह राजस्थान के इतिहास में पहली बार होगा, जब किसी ओपन जेल के भीतर विधिवत विवाह समारोह आयोजित होगा।

शादी की एक और भावुक तस्वीर भी सामने आई है। सीमा के परिवार की ओर से उनकी सहेली के पिता कन्यादान करेंगे। विवाह निमंत्रण पत्र में भी पिता के स्थान पर उन्हीं का नाम दर्ज किया गया है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने अपने आदेश में वर्ष 2022 के ‘नंदलाल बनाम राज्य’ मामले का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक व्यक्ति को गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है। यह अधिकार केवल जेल की दीवारों के बाहर रहने वालों तक सीमित नहीं है।

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि आधुनिक जेल व्यवस्था का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि अपराधियों का सुधार, पुनर्वास और उन्हें समाज में सम्मानपूर्वक दोबारा स्थापित करना भी है। विवाह जैसे सामाजिक संस्थान कैदी के पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सरकार ने भी नहीं किया विरोध

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कालूराम भाटी और अधिवक्ता स्वप्न चौहान ने पक्ष रखा। वहीं राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक सी.एस. ओझा और श्रवण सिंह राठौड़ अदालत में उपस्थित रहे। राज्य सरकार ने विवाह की अनुमति पर कोई आपत्ति नहीं जताई, जिसके बाद हाईकोर्ट ने अनुमति प्रदान कर दी।

क्या होती है ओपन जेल?

ओपन जेल ऐसी सुधारात्मक जेल होती है, जहां अच्छे आचरण वाले दोषियों को अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्र वातावरण में रहने का अवसर दिया जाता है। यहां कैदी खेती, पशुपालन और अन्य कार्य कर सकते हैं तथा समाज के साथ सीमित रूप से जुड़े रहते हैं। इसका उद्देश्य उन्हें सामान्य जीवन के लिए तैयार करना होता है।

जेल सुधार की दिशा में नई मिसाल

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल एक विवाह की अनुमति भर नहीं है, बल्कि यह भारतीय न्याय व्यवस्था के मानवीय दृष्टिकोण को भी मजबूत करता है। यह संदेश देता है कि सजा भुगताने वाले व्यक्ति के भी संवैधानिक अधिकार होते हैं और यदि उसका आचरण सुधारात्मक है, तो उसे सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत का अवसर मिलना चाहिए।

22 जुलाई को जब मंडोर ओपन जेल में विवाह की रस्में पूरी होंगी, तब यह केवल दो लोगों का मिलन नहीं होगा, बल्कि राजस्थान की जेल सुधार व्यवस्था के इतिहास में दर्ज होने वाला एक ऐसा अध्याय होगा, जो यह बताएगा कि न्याय व्यवस्था में दंड के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास की भी बराबर अहमियत है।

लेखक के बारे में

Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)

सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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