सोनम वांगचुक के समर्थन में जयपुर में प्रदर्शन, धरने को पुलिस-प्रशासन ने हटाया
जयपुर में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में लोग सड़कों पर उतरे. उनके धरने को पुलिस-प्रशासन ने हटा दिया, परंतु कार्यकर्ताओं ने सड़क किनारे खड़े होकर विरोध जताया.

सौजन्य से:- ETV Bharat
जयपुर में वांगचुक के समर्थन में उतरे लोग, टेंट हटाया तो सड़क किनारे खड़े होकर जताया विरोध
वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति को दबाने के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए.
Published : July 20, 2026 at 3:02 PM IST
|Updated : July 20, 2026 at 3:17 PM IST
जयपुर : सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में जयपुर में लोग सड़कों पर उतरे. जयपुर में सोमवार को गांधी सर्किल पर प्रस्तावित धरने को पुलिस-प्रशासन के हटा दिया. इसके बाद सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने सड़क किनारे खड़े होकर प्रदर्शन किया. सामाजिक संगठनों ने केंद्र सरकार पर संवाद से बचने और वांगचुक के शांतिपूर्ण आंदोलन को कमजोर करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखने का अधिकार सुरक्षित है. सरकार को आंदोलनकारियों से सार्थक संवाद शुरू करना चाहिए.
समग्र सेवा संस्थान, गांधी विचार मंच सहित कई संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में गांधी सर्किल पर सोमवार सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक शांतिपूर्ण धरने की तैयारी की थी. इसके लिए टेंट लगाए गए, लेकिन पुलिस-प्रशासन ने धरने की अनुमति नहीं देते हुए टेंट हटवा दिए. इसके बाद प्रदर्शनकारी गांधी सर्किल के बस स्टॉप और सड़क किनारे खड़े होकर हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी करते रहे और सोनम वांगचुक के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की.
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संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का आंदोलन: समग्र सेवा संस्थान के सवाई सिंह ने कहा कि सोनम वांगचुक का आंदोलन केवल लद्दाख का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का आंदोलन है. सरकार को आंदोलनकारियों की बात सुननी चाहिए. लोकतंत्र में असहमति को दबाने के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए. शांतिपूर्ण आंदोलन करना हर नागरिक का अधिकार है और सरकार को इसका सम्मान करना चाहिए. उन्होंने केंद्र सरकार से सोनम वांगचुक के साथ शीघ्र सार्थक संवाद शुरू करने, लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करने, शांतिपूर्ण आंदोलनों पर अनावश्यक प्रशासनिक प्रतिबंध नहीं लगाने के साथ लद्दाख से जुड़े जनहित के मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने की मांग की.
हठ छोड़कर तत्काल वार्ता शुरू करें:गांधी विचार मंच के संजय बाफना ने कहा कि महात्मा गांधी के बताए सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर अपनी बात रखने वालों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार शांतिपूर्ण अनशन और जनआंदोलन से भी संवाद नहीं करेगी तो लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का विश्वास कमजोर होगा. सरकार को हठ छोड़कर तत्काल वार्ता शुरू करनी चाहिए. वांगचुक की मांगों पर सकारात्मक पहल करनी चाहिए. युवा प्रशंसा मीणा ने कहा कि देश का युवा लोकतांत्रिक अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर जागरूक है. वांगचुक लगातार पर्यावरण, स्थानीय अधिकारों और जनहित के मुद्दों को उठा रहे हैं. उनका मानना है कि सरकार को उनकी बात गंभीरता से सुननी चाहिए. शांतिपूर्ण विरोध को रोकने के बजाय उसकी भावना को समझना आवश्यक है.
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