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पंचायतीराज चुनाव: जयपुर कमिश्नरेट में निषेधाज्ञा लागू, बिना अनुमति जुलूस, सभा, धरना-प्रदर्शन पर रोक

पंचायतीराज चुनाव: जयपुर कमिश्नरेट में निषेधाज्ञा लागू, बिना अनुमति जुलूस, सभा, धरना-प्रदर्शन पर रोक संबंधित डीसीपी की अनुमति के बिना सार्वजनिक स्थान पर राजनीतिक प्रयोजन के लिए सभा, जुलूस, धरना और भाषण का आयोजन नहीं किया…

ETV Bharat के अनुसार4 अक्टूबर 2026 को 09:04 am बजे
पंचायतीराज चुनाव: जयपुर कमिश्नरेट में निषेधाज्ञा लागू, बिना अनुमति जुलूस, सभा, धरना-प्रदर्शन पर रोक

सौजन्य से:- ETV Bharat

पंचायतीराज चुनाव: जयपुर कमिश्नरेट में निषेधाज्ञा लागू, बिना अनुमति जुलूस, सभा, धरना-प्रदर्शन पर रोक

संबंधित डीसीपी की अनुमति के बिना सार्वजनिक स्थान पर राजनीतिक प्रयोजन के लिए सभा, जुलूस, धरना और भाषण का आयोजन नहीं किया जा सकेगा.

Published : October 4, 2026 at 2:08 PM IST

जयपुर: राजस्थान में गांवों की सरकार चुनने के लिए होने वाले पंचायतीराज के चुनावों का बिगुल बज चुका है. जयपुर कमिश्नरेट के झोटवाड़ा, आमेर, चाकसू, कोटखावदा, सांगानेर, बस्सी और तुंगा के इलाकों में जिला परिषद और पंचायत समिति के सदस्यों के चुनाव चार चरण में होने हैं. निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव करवाने के लिए लेकर जयपुर कमिश्नरेट में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई है. जयपुर के एडिशनल कमिश्नर अजय सिंह ने इस संबंध में रविवार को एक आदेश जारी किया है. जिसमें विस्फोटक पदार्थ, रासायनिक पदार्थ, रिवॉल्वर, पिस्टल, बंदूक, एमएल गन, बीएल गन, गंडासा, फर्सी, तलवार, भाला, कृपाण, चाकू, छुरी, गुप्ती और कटार के साथ ही लाठी लेकर सार्वजनिक स्थानों पर घूमने या उनका प्रदर्शन करने पर रोक लगाई गई है. बिना अनुमति रैली, जुलूस, धरना-प्रदर्शन पर भी रोक रहेगी.

इन पर लागू नहीं होंगे आदेश : एडिशनल कमिश्नर (कानून-व्यवस्था) अजय सिंह ने बताया कि यह आदेश ड्यूटी पर तैनात सीमा सुरक्षा बल, राजस्थान सशस्त्र पुलिस, राजस्थान सिविल पुलिस, चुनाव ड्यूटी में तैनात अर्द्धसैनिक बल, होमगार्ड और चुनाव ड्यूटी में मतदान दलों में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा. इसके साथ ही सिख समुदाय के लोगों को धार्मिक परंपरा के अनुसार निर्धारित कृपाण रखने की छूट होगी. यह आदेश शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण करवाने और पुलिस थाने में शस्त्र जमा करवाने ले जाने पर लागू नहीं होगा. निशक्तजन और बीमार व्यक्तियों को लाठी या बैसाखी का उपयोग करने की छूट होगी. वहीं, राष्ट्रीय राइफल एसोसिएशन के सदस्य जो प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे हैं या प्रतियोगिता में शामिल होने जा रहे हैं. उन पर भी यह नियम लागू नहीं होगा.

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बिना अनुमति नहीं बजा सकेंगे लाउड स्पीकर : उन्होंने कहा, संबंधित डीसीपी की अनुमति के बिना सार्वजनिक स्थान पर राजनीतिक प्रयोजन के लिए सभा, जुलूस, धरना और भाषण का आयोजन नहीं किया जा सकेगा. बिना अनुमति लाउड स्पीकर का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा. अनुमति के बाद भी सुबह 6 से रात 10 बजे तक ही किया जा सकेगा. यातायात व्यवस्था, जन व्यवस्था और जनशांति को प्रभावित करने वाले कार्यक्रम नहीं होंगे. जबकि शवयात्रा पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होंगे.

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इंटरनेट और सोशल मीडिया पर भी नजर : उन्होंने बताया, सांप्रदायिक सद्भाव को प्रभावित करने वाले उत्तेजक नारे लगाने पर भी पाबंदी रहेगी. उत्तेजक भाषण या ऐसी सामग्री से युक्त पैम्फलेट, पोस्टर या अन्य चुनाव सामग्री छपवाने पर भी रोक रहेगी. रेडियो, टेप रिकॉर्डर, लाउड स्पीकर के जरिए आपत्तिजनक नारे लगाने या लगवाने पर भी रोक रहेगी. इंटरनेट, सोशल मीडिया पर भी धार्मिक उन्माद फैलाने, जातिगत द्वेष फैलाने या विघटनकारी दुष्प्रचार पर पुलिस की नजर रहेगी.

सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर रोक : कोई भी व्यक्ति किसी के भी समर्थन या विरोध में सार्वजनिक एवं राजकीय संपत्तियों पर किसी भी प्रकार के नारे, लेख या प्रतीक का चित्रण नहीं करेगा. किसी भी तरह के पोस्टर, होर्डिंग या बैनर लगाकर सार्वजनिक या राजकीय संपत्ति का विरूपण भी नहीं किया जाएगा. सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने या पिलाने वालों पर सख्ती की जाएगी. निजी उपभोग के अलावा सार्वजनिक स्थानों पर शराब लेकर आवाजाही पर भी पाबंदी रहेगी. सूखा दिवस (ड्राई डे) पर शराब की बिक्री पर रोक रहेगी.

पूजास्थलों का प्रचार में नहीं होगा उपयोग : चुनाव प्रचार के लिए वाहनों से यातायात बाधित नहीं किया जा सकेगा. लिखित अनुमति के बिना वाहनों पर ध्वनि प्रसारण यंत्रों के उपयोग पर भी पाबंदी रहेगी. मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघरों, गुरुद्वारों या अन्य पूजा स्थल का चुनाव प्रचार के लिए उपयोग नहीं किया जा सकेगा. इसके साथ ही मतदान केंद्र या आसपास पहचान स्लिप के रूप में पोस्टर, झंडे, चुनाव चिह्न या अन्य विज्ञापन सामग्री का प्रदर्शन और उपयोग करने पर भी रोक रहेगी. निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी.

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