वन स्टेट, वन इलेक्शन पर राजस्थान सरकार का बड़ा प्लान; निकाय और पंचायत चुनाव साथ कराने की तैयारी
वन स्टेट, वन इलेक्शन पर राजस्थान सरकार का बड़ा प्लान; निकाय और पंचायत चुनाव साथ कराने की तैयारी मंत्री के बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब प्रदेश में लंबे समय से निकाय और पंचायत चुनावों की तारीखों को लेक…

सौजन्य से:- Hindustan
वन स्टेट, वन इलेक्शन पर राजस्थान सरकार का बड़ा प्लान; निकाय और पंचायत चुनाव साथ कराने की तैयारी
मंत्री के बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब प्रदेश में लंबे समय से निकाय और पंचायत चुनावों की तारीखों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा चल रही है।
राजस्थान में नगर निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर चल रही अटकलों के बीच प्रदेश के स्वायत्त शासन एवं नगरीय विकास (यूडीएच) मंत्री झाबर सिंह खर्रा के बयान ने चुनावी सियासत को नई दिशा दे दी है। झुंझुनूं दौरे पर पहुंचे मंत्री ने संकेत दिए हैं कि राज्य सरकार ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की तर्ज पर नगर निकाय और पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव एक साथ कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर संभावित उम्मीदवारों तक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
मंत्री के बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब प्रदेश में लंबे समय से निकाय और पंचायत चुनावों की तारीखों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा चल रही है। यदि सरकार वास्तव में दोनों चुनाव एक साथ कराने का फैसला करती है तो यह राजस्थान की स्थानीय राजनीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
झुंझुनूं दौरे के दौरान दिया बड़ा संकेत
यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा शुक्रवार को झुंझुनूं जिले के मंडावा विधानसभा क्षेत्र स्थित कमालसर गांव पहुंचे थे। यहां उन्होंने झुंझुनूं के पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार खीचड़ की माता मोहिनी देवी के निधन पर आयोजित शोक सभा में भाग लिया और शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी। इस दौरान पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार खीचड़, उनके पुत्र अतुल कुमार, भाजपा जिला अध्यक्ष हर्षिनी कुलहरी सहित कई जनप्रतिनिधि और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
शोक सभा के बाद मीडिया से बातचीत में मंत्री खर्रा ने नगर निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर बड़ा राजनीतिक संकेत दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा दोनों चुनावों को एक साथ कराने की है और इस दिशा में आवश्यक तैयारियां भी की जा रही हैं।
मार्च 2026 तक विभागीय तैयारियां पूरी
मंत्री खर्रा ने बताया कि स्वायत्त शासन विभाग चुनाव संबंधी अपनी प्रशासनिक तैयारियां पहले ही पूरी कर चुका है। उनके अनुसार विभाग का काम मार्च 2026 तक पूरा हो गया था। अब आगे की प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के स्तर पर पूरी की जानी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इन आयोगों को किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या अन्य सहायता की आवश्यकता होगी तो राज्य सरकार पूरा सहयोग उपलब्ध कराएगी। इससे संकेत मिलते हैं कि सरकार चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक औपचारिकताओं के पूरा होने का इंतजार कर रही है।
पार्षद चुनाव में बड़ा बदलाव
मंत्री खर्रा ने नगर निकाय चुनाव से जुड़ा एक अहम बदलाव भी बताया। उन्होंने कहा कि पार्षद पद के लिए लागू दो-संतान संबंधी प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है। इस फैसले के बाद बड़ी संख्या में ऐसे संभावित उम्मीदवार चुनाव लड़ सकेंगे, जो पहले इस नियम के कारण अयोग्य हो जाते थे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बदलाव का सीधा असर आगामी निकाय चुनावों में उम्मीदवारों की संख्या और राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल- चुनाव कब होंगे?
मंत्री के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या सरकार निकाय और पंचायत चुनावों की अधिसूचना एक साथ जारी करेगी या केवल मतदान एक ही समय पर कराया जाएगा। फिलहाल इस संबंध में अंतिम निर्णय राज्य निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
हालांकि मंत्री के बयान से इतना साफ माना जा रहा है कि सरकार दोनों चुनावों को एक साथ कराने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है तो प्रदेश में एक साथ व्यापक चुनावी गतिविधियां शुरू हो सकती हैं।
सियासी मायने भी कम नहीं
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार निकाय और पंचायत चुनावों को एक साथ कराने का फैसला केवल प्रशासनिक सुविधा तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इसके व्यापक राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं। एक साथ चुनाव होने की स्थिति में सभी राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति नए सिरे से तैयार करनी होगी। उम्मीदवारों के चयन से लेकर प्रचार अभियान तक पूरा चुनावी प्रबंधन अलग तरीके से करना पड़ेगा।
इसके अलावा पूरे प्रदेश में एक साथ चुनावी माहौल बनने से स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राज्य स्तरीय राजनीतिक मुद्दे भी चुनावी विमर्श का हिस्सा बन सकते हैं। इससे भाजपा, कांग्रेस समेत अन्य दलों की चुनावी रणनीति पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है।
फिलहाल सरकार की ओर से केवल संकेत मिले हैं और अंतिम फैसला राज्य निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। लेकिन मंत्री झाबर सिंह खर्रा के बयान ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि राजस्थान में ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ का मॉडल अब केवल चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार इसे अमल में लाने की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी रहेंगी।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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