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ऑपरेशन सेफर रोड: हाईवे पर एक्सीडेंट स्पॉट से पहले गूगल मैप देगा अलर्ट, देश में पहली बार जयपुर रेंज में नवाचार

ऑपरेशन सेफर रोड: हाईवे पर एक्सीडेंट स्पॉट से पहले गूगल मैप देगा अलर्ट, देश में पहली बार जयपुर रेंज में नवाचार आंकड़ों के आधार पर दुर्घटना संभावित स्थानों का किया विश्लेषण, गूगल मैप से जोड़ा. Published : August 25, 2026 a…

ETV Bharat के अनुसार25 अगस्त 2026 को 09:55 am बजे
ऑपरेशन सेफर रोड: हाईवे पर एक्सीडेंट स्पॉट से पहले गूगल मैप देगा अलर्ट, देश में पहली बार जयपुर रेंज में नवाचार

सौजन्य से:- ETV Bharat

ऑपरेशन सेफर रोड: हाईवे पर एक्सीडेंट स्पॉट से पहले गूगल मैप देगा अलर्ट, देश में पहली बार जयपुर रेंज में नवाचार

आंकड़ों के आधार पर दुर्घटना संभावित स्थानों का किया विश्लेषण, गूगल मैप से जोड़ा.

Published : August 25, 2026 at 2:17 PM IST

जयपुर: सड़क हादसों की रफ्तार पर लगाम कसने को जयपुर रेंज में अनूठी पहल की गई है. रेंज में आने वाले हाईवे पर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिह्नित कर डेटा का विश्लेषण किया और इसे गूगल मैप से जोड़ा गया. अब जयपुर रेंज में आने वाले नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे पर दुर्घटना संभावित क्षेत्र के पास पहुंचते ही चालक को गूगल मैप के जरिए अलर्ट मिलेगा. चालक को एक्सीडेंट स्पॉट के बारे में पहले से जानकारी होने पर वह ज्यादा सतर्कता से गाड़ी चलाकर संभावित हादसे के खतरे से बच सकेंगे.

जयपुर रेंज आईजी राहुल प्रकाश ने बताया कि जयपुर रेंज में चलाए जा रहे ऑपरेशन सेफर रोड के तहत यह नवाचार किया गया है. इसका मकसद हादसों और इनमें होने वाली मौतों पर लगाम लगाना है. इस तरह का नवाचार देश में पहली बार जयपुर रेंज में किया गया है. आगे इसे प्रदेश और देशभर में लागू करने के लिए एनएचएआई को पत्र लिखा गया है.

तीन श्रेणियों में बांटा एक्सीडेंट स्पॉट को: उन्होंने कहा, सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली जनहानि को कम करना राजस्थान पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने जयपुर रेंज के तहत आने वाले प्रमुख राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर स्थित दुर्घटना संभावित स्थलों का बीते तीन साल के हादसों और उनमें हुई मौतों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया. इस विश्लेषण के आधार पर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को उनकी जोखिम गंभीरता के अनुसार ए, बी और सी कैटेगरी में वर्गीकरण किया. ए श्रेणी के छह, बी श्रेणी के 32 और सी श्रेणी के 63 स्पॉट्स हैं. इन चिह्नित स्थानों को आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से Google Maps प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है.

समय पर अलर्ट, सावधान होंगे चालक: उनका कहना है, इस पहल का उद्देश्य केवल दुर्घटना स्थलों की पहचान करना नहीं, बल्कि वाहन चालकों को यात्रा के दौरान पूर्व सूचना व सचेत करते हुए सुरक्षित एवं सतर्क ड्राइविंग के लिए प्रेरित करना है. अब जब भी कोई वाहन चालक Google Maps नेविगेशन का उपयोग करते हुए जयपुर रेंज के संबंधित राजमार्गों पर यात्रा करेगा तो चिह्नित दुर्घटना संभावित क्षेत्र के निकट पहुंचने पर उसे उस क्षेत्र के संबंध में सड़क सुरक्षा चेतावनी (Alert) प्राप्त होगी. इससे वह समय रहते अपनी गति नियंत्रित कर आवश्यक एवं यात्रा संबंधी अन्य सावधानी बरत सकेगा.

तकनीक व पुलिसिंग का Google Maps से समन्वय: राहुल प्रकाश बोले, प्रथम चरण में जयपुर रेंज पुलिस की ओर से सड़क दुर्घटनाओं के संबंध में पुलिस रिकॉर्ड, यातायात संबंधी सूचनाओं तथा संबंधित राजमार्गों के दुर्घटना आंकड़ों का विस्तृत अध्ययन किया गया. अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य यह जानना था कि किन स्थानों पर लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं. किन क्षेत्रों में जनहानि की गंभीरता अधिक है. इस तरह से वर्ष 2023 से 2025 तक के दुर्घटना डाटा के अनुसार जयपुर रेंज के जिला जयपुर ग्रामीण में 28, दौसा में 24, कोटपूतली बहरोड में 19, अलवर में 11, सीकर में 10, भिवाड़ी में 5, खैरथल तिजारा 3 व झुंझुनू में 01 सहित कुल 101 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए.

पहले QR कोड किया था जारी: इस विश्लेषण में प्रत्येक दुर्घटना संभावित स्थल का मूल्यांकन केवल दुर्घटनाओं की संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि मुख्य रूप से विगत तीन वर्षों में उस स्थान पर हुई मानव क्षति (Fatality) की गंभीरता के आधार पर किया गया. इससे यह सुनिश्चित किया गया कि सड़क सुरक्षा संसाधनों एवं चेतावनी प्रणाली का उपयोग उन स्थानों पर प्राथमिकता से किया जाए जहां जनहानि का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक है. डेटा विश्लेषण के बाद जयपुर रेंज के विभिन्न राजमार्गों पर स्थित दुर्घटना संभावित स्थलों को डिजिटल मैपिंग के माध्यम से चिह्नितकिया गया. प्रत्येक स्थान का भौगोलिक सत्यापन कर उसे Google Maps पर प्रदर्शित करने के लिए आवश्यक तकनीकी डेटा तैयार किया गया और एक QR Code जनहित में जारी किया गया.

QR Code से भी मिलेगी पूरी जानकारी: अभियान के पहले चरण के दौरान जयपुर रेंज का तैयार डिजिटल डाटा को आमजन तक पहुंचाने के उद्देश्य से QR Code आधारित एक्सेस व्यवस्था भी विकसित की गई है. इसमें कोई भी व्यक्ति इस QR Code को अपने मोबाइल फोन से स्कैन कर जयपुर रेंज के चिह्नित राजमार्गों पर स्थित दुर्घटना संभावित स्थलों की जानकारी प्राप्त कर सकता है. इस डिजिटल सुविधा के माध्यम से संबंधित क्षेत्र में उपलब्ध जोखिम श्रेणी, स्थान एवं सड़क सुरक्षा संबंधी जानकारी सहज रूप से प्राप्त की जा सकेगी. इस प्रकार QR Code आम नागरिक, वाहन चालक, परिवहन व्यवसायी एवं यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक उपयोगी डिजिटल माध्यम सिद्ध होगा. जिसमें दुर्घटना संभावित स्थलों का A, B एवं C श्रेणीवार वर्गीकरण किया गया.

स्कैन करते ही मिलेगी पूरी जानकारी: इस क्यू आर कोड को जैसे ही मोबाइल पर स्कैन करेंगे तो Google Maps पर हमें तीन प्रकार के स्पॉट संकेतक दिखेंगे. यह स्पॉट संकेतक गत तीन वर्षों में दुर्घटना में हुई मृत्युदर के आधार पर दर्शाए गए हैं. मेप में येलो (Low Risk Zone-'C' Type) स्पॉट संकेतक का मतलब है कि उस स्थान पर दस से कम पांच से अधिक घटित जनहानि हुई हैं. ऐसे कुल 63 स्पॉट्स हैं. वहीं, ऑरेंज (Medium Risk Zone-'B' Type) स्पॉट संकेतक उस स्थान पर दिखेगा. जहां 10 से 20 लोगों की जान गई है. ऐसे कुल 32 स्पॉट्स हैं. रेड स्पॉट (High Risk Zone-'A' Type) उस स्थान पर दिखता है. जहां 20 से ज्यादा लोगों की मौत बीते तीन साल में हुई हैं. ऐसे कुल छह स्पॉट्स हैं.

वाहन चालकों से अपील

- यात्रा के दौरान Google Maps नेविगेशन का उपयोग करते समय प्राप्त सड़क सुरक्षा चेतावनियों को गंभीरता से लें.

- गति सीमा का पालन करें.

- सीट बेल्ट एवं हेलमेट का अनिवार्य उपयोग करें.

- मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए वाहन न चलाएं.

- थकान की स्थिति में वाहन चलाने से बचें.

- ओवरस्पीड एवं लापरवाह ड्राइविंग से पूर्णतः बचें.

- सड़क संकेतकों एवं यातायात नियमों का पालन करें.

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