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रक्षाबंधन पर जयपुर सेंट्रल जेल में भाई को राखी बांधते ही छलक पड़े बहनों के आंसू

रक्षाबंधन पर जयपुर सेंट्रल जेल में भाई को राखी बांधते ही छलक पड़े बहनों के आंसू मुलाकात का समय भले ही महज दो मिनट का था, लेकिन इन दो मिनटों में भाई-बहन के बीच कई महीनों की दूरी जैसे सिमटती नजर आई। बहनों ने अपने भाइयों की…

Hindustan के अनुसार28 अगस्त 2026 को 11:32 am बजे
रक्षाबंधन पर जयपुर सेंट्रल जेल में भाई को राखी बांधते ही छलक पड़े बहनों के आंसू

सौजन्य से:- Hindustan

रक्षाबंधन पर जयपुर सेंट्रल जेल में भाई को राखी बांधते ही छलक पड़े बहनों के आंसू

मुलाकात का समय भले ही महज दो मिनट का था, लेकिन इन दो मिनटों में भाई-बहन के बीच कई महीनों की दूरी जैसे सिमटती नजर आई। बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और मिठाई खिलाई। कुछ पल दोनों ने एक-दूसरे से बात की।

रक्षाबंधन के मौके पर शुक्रवार को जयपुर सेंट्रल जेल का माहौल कुछ देर के लिए बेहद भावुक हो गया। आम दिनों में जहां जेल के मेन गेट पर सुरक्षा और सख्ती नजर आती है, वहीं शुक्रवार को इसी गेट के पास बहनों की भीड़ दिखाई दी। हाथों में राखी, मिठाई और आंखों में भाई से मिलने की उम्मीद लिए बहनें जेल पहुंचीं। सामने सलाखों के पीछे खड़े भाइयों को देखते ही कई बहनों की आंखें नम हो गईं।

सुबह से ही बड़ी संख्या में बहनें अपने जेल में बंद भाइयों को राखी बांधने पहुंचने लगी थीं। जेल प्रशासन की ओर से रक्षाबंधन के मौके पर भाई-बहनों की मुलाकात के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। मेन गेट के पास सुरक्षा के बीच मुलाकात का इंतजाम किया गया, ताकि ज्यादा भीड़ के बावजूद बहनों को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।

दो मिनट की मुलाकात… लेकिन भावनाएं हजारों

मुलाकात का समय भले ही महज दो मिनट का था, लेकिन इन दो मिनटों में भाई-बहन के बीच कई महीनों की दूरी जैसे सिमटती नजर आई। बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और मिठाई खिलाई। कुछ पल दोनों ने एक-दूसरे से बात की। हालचाल पूछा और फिर मिलने का समय खत्म हो गया।

जिस पल बहनें राखी बांध रही थीं, उस दौरान कई चेहरों पर खुशी और भावुकता एक साथ नजर आई। भाई की कलाई पर राखी बांधने के बाद कुछ बहनें खुद को रोक नहीं सकीं। आंखों से आंसू छलक पड़े। भाई भी बहनों को ढांढस देते नजर आए।

चेहरे पर मुस्कान लेकर आईं, आंखों में आंसू लेकर लौटीं

सुबह जेल पहुंचने वाली बहनों के चेहरों पर भाई से मिलने की खुशी साफ दिखाई दे रही थी। किसी के हाथ में रंग-बिरंगी राखियां थीं तो कोई मिठाई लेकर पहुंची थी। कई बहनें लंबे समय बाद अपने भाई को सामने देखकर भावुक हो गईं।

राखी बांधने के बाद जब लौटने का वक्त आया तो माहौल और ज्यादा भावुक हो गया। कुछ बहनें भाई को बार-बार देखती रहीं। मुलाकात खत्म होने के बाद वे नम आंखों से जेल के बाहर निकलती दिखाई दीं।

रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के रिश्ते और एक-दूसरे की सुरक्षा के वादे का पर्व माना जाता है। ऐसे में जेल में बंद भाइयों के लिए यह दिन बाकी दिनों से अलग था। सलाखों के पीछे रहने वाले भाइयों की कलाई पर भी बहनों ने राखी बांधी और रिश्ते की डोर को मजबूत किया।

सलाखों के दोनों तरफ तैनात रहे प्रहरी

रक्षाबंधन को देखते हुए जेल प्रशासन ने सुरक्षा के साथ-साथ मुलाकात की व्यवस्था को भी व्यवस्थित रखा। जेल के मेन गेट के पास सुरक्षा व्यवस्था के तहत प्रहरी तैनात किए गए थे। मुलाकात के दौरान सलाखों के दोनों तरफ सुरक्षाकर्मी मौजूद रहे।

जेल में राखी बंधवाने वाले बंदियों को पहले ही गेट के पास बुला लिया गया था। इससे बहनों को ज्यादा देर तक इंतजार नहीं करना पड़ा और मुलाकात की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी होती रही।

कुछ पल का मिलना, लंबे समय की याद

जेल में शुक्रवार को हुए ये छोटे-छोटे मिलन भले ही कुछ मिनट के रहे, लेकिन भाई-बहनों के लिए इनका भावनात्मक महत्व बहुत बड़ा था। किसी बहन ने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र की कामना की तो किसी ने मिठाई खिलाकर कुछ पल साथ बिताए।

जेल की ऊंची दीवारों और सलाखों के बीच रक्षाबंधन का यह दृश्य भाई-बहन के रिश्ते की उस भावना को दिखा रहा था, जिसे दूरी और हालात भी कमजोर नहीं कर पाए। बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर लौट गईं, लेकिन जाते-जाते उनकी आंखों में वही सवाल और भावनाएं थीं—अगली मुलाकात कब होगी?

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