बंदरों से डरकर महिला की मौत, एक साल से पिंजरा बंद पड़ा, क्या नगर निगम का जवाब?
जयपुर में बंदरों के आतंक की शिकायतें कई साल से हो रही हैं, लेकिन इलाके में स्थायी समाधान नहीं निकला। नगर निगम ने एक साल पहले पिंजरा रखा था, लेकिन यह बंद पड़ा है। क्या नगर निगम अपने जवाब के साथ आगे आएगा?

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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दो बेटियों की सगाई से पहले मां की मौत:जयपुर में बंदरों के डर से छत से गिरी थी महिला; एक साल से रखा पिंजरा बंद पड़ा
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जयपुर में बंदरों से डरकर महिला की छत से गिरने से मौत हो गई थी। शादी के घर में मां की अर्थी उठने से शोक हो गया। परकोटा क्षेत्र के हीदा की मोरी इलाके में मंडी खटीकान मोहल्ला निवासी सुशीला मल्होत्रा (42) की दो बेटियों डिंपल मल्होत्रा और पूजा मल्होत्रा की 14 अगस्त को सगाई होनी है।
सुशीला 22 जुलाई को छत पर कपड़े सुखाने गई थीं। तभी बंदरों का झुंड अचानक उनकी ओर दौड़ पड़ा। बंदरों से बचने के लिए वह पीछे हटीं, दीवार से टकराईं और संतुलन बिगड़ने से दूसरी मंजिल से सड़क पर गिर गईं। लहूलुहान हालत में सुशीला को हॉस्पिटल लेकर गए थे, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई साल से बंदरों के आतंक की शिकायत की जा रही है। लेकिन जिम्मेदार एजेंसियां सिर्फ आश्वासन देती रहीं।
मामले की पड़ताल करने जब भास्कर टीम सुशीला के घर की छत पर पहुंची तो चौंकाने वाला मंजर दिखा। पड़ोसी के घर की छत पर बंदरों को पकड़ने के लिए पिंजरा रखा था, लेकिन यह बंद था।
नगर निगम ने इस पिंजरे को करीब एक साल पहले रखा था। भास्कर टीम जब सुशीला के घर थी, तब गुरुवार सुबह भी गली में बंदरों का झुंड नजर आया।
पहले देखें क्षेत्र में घूमते बंदरों और पिंजरे के PHOTOS…
आवाज सुनकर बेटी बाहर आई, मां को घायल देखा
सुशीला के परिजनों ने बताया- हादसे के समय दोनों बेटी और दोनों बेटे घर में ही मौजूद थे। जोरदार आवाज सुनकर एक बेटी बाहर पहुंची तो मां सड़क पर खून से लथपथ पड़ी थीं।
घर में मौजूद अन्य लोग छत पर भागे। आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। परिवार ने घायल को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
छतों-गलियों में बंदर करते हैं परेशान
बड़े बेटे शुभम ने बताया- इलाके में बंदरों का आतंक कोई नई बात नहीं है। रोजाना बंदरों के झुंड छतों और गलियों में उत्पात मचाते हैं। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा डर के साए में रहते हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।
छोटे बेटे सौरव और बेटी डिंपल की आंखों में मां को खोने का दर्द दिखाई देता है। सौरभ ने कहा- 14 अगस्त को मेरी दो बहनों की सगाई है। घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन अब उसी घर में मातम पसरा है। खुशियों की जगह अब सिर्फ सिसकियां सुनाई दे रही हैं।
ड्यूटी के लिए निकले थे पति, हादसे की सुनकर अस्पताल पहुंचे
सुशीला के पति गजेंद्र मल्होत्रा नगर निगम में होमगार्ड के सिपाही हैं। हादसे से कुछ देर पहले ही गजेंद्र ड्यूटी के लिए घर से निकले थे। करीब आधे घंटे बाद फोन आया कि उनकी पत्नी छत से गिर गई हैं।
जब तक SMS हॉस्पिटल पहुंचे, तब तक पत्नी सुशीला की मौत हो चुकी थी। परिवार बताता है कि एक-दो महीने पहले ही गजेंद्र मल्होत्रा के पिता का निधन हुआ था। अब हादसे ने परिवार को फिर गहरे सदमे में डाल दिया।
नगर निगम ने एक साल पहले रखा था पिंजरा
सुशीला के पति गजेंद्र मल्होत्रा ने बताया- एक साल पहले बंदरों से परेशान होकर शिकायत की थी। तब नगर निगम ने पिंजरा यहां रखा था, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ।
घरों में घुसकर खाना उठा ले जाते बंदर
सुशीला के जेठ ब्रजमोहन मल्होत्रा ने कहा- बंदरों के आतंक की शिकायत कई साल से नगर निगम, पार्षद और विधायक तक कर चुके हैं। बंदर घरों में घुसकर खाना उठा ले जाते हैं।
लोगों पर हमला करते हैं और आए दिन हादसों का कारण बनते हैं। अगर समय रहते कार्रवाई होती तो शायद आज सुशीला जिंदा होतीं।
क्षेत्र में जगह-जगह बंदरों का डेरा
स्थानीय लोगों ने बताया- सुशीला के घर के सामने मंदिर के पास नीम का पेड़ है। इसे थोड़ा कटवा दिया था, क्योंकि यहां बंदरों का झुंड नजर आता है। स्थानीय लोगों और बच्चों को बंदरों के काटने का भय रहता है।
मामले की पड़ताल के बाद भास्कर टीम वार्ड 115 (पूर्व में 66) के निवर्तमान पार्षद घनश्याम टेपन के पास पहुंची तो उन्होंने कहा- इलाके में बंदरों की समस्या गंभीर है। कई बार पिंजरे लगाकर बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई की गई, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर बंदर वापस आ जाते हैं।
उन्होंने निगम अधिकारियों पर भी आरोप लगाते हुए कहा- नगर निगम के जोन उपायुक्त से लेकर उच्च अधिकारियों को क्षेत्र की समस्याएं बताईं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाया।
बता दें कि पास ही गलता की पहाड़ियां पास होने की वजह से हीदा की मोरी, मंडी खटीकान, लक्ष्मणपुरी और ऋषि कॉलोनी सहित स्थानीय इलाकों में बंदरों का आतंक बना हुआ है।
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