राजस्थान में अब ब्लैक स्पॉट से पहले गूगल करेगाा सावधान! IPS राहुल प्रकाश ने टेक जाइंट के साथ मिल किया कमाल
जयपुर रेंज पुलिस ने सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए गूगल मैप्स के साथ एक अनूठी पहल की है। रेंज आईजी राहुल प्रकाश के नेतृत्व में 8 जिलों के हाईवे पर चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स को 'हाई, मीडियम और लो' रिस्क जोन में बांटकर गूगल…

सौजन्य से:- Navbharat Times
जयपुर रेंज पुलिस ने सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए गूगल मैप्स के साथ एक अनूठी पहल की है। रेंज आईजी राहुल प्रकाश के नेतृत्व में 8 जिलों के हाईवे पर चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स को 'हाई, मीडियम और लो' रिस्क जोन में बांटकर गूगल मैप में जोड़ा गया है।
जयपुर: राजस्थान की जयपुर रेंज पुलिस ने सड़क हादसों को रोकने के लिए एक अनूठी पहल की है। रेंज आईजी राहुल प्रकाश ने नवाचार करते हुए रेंज के सभी जिलों के उन ब्लैक पॉइंट्स को चिह्नित किया जहां बार बार हादसे होते थे। ऐसे ब्लेक स्पॉट को चिह्नित करके गूगल से संपर्क किया। गूगल के प्रतिनिधियों से आग्रह किया गया कि वे गूगल मैप में इन ब्लैक स्पॉट्स को दर्शाएं तो चालक सावधान रहेंगे और हादसों में कमी आईए। गूगल ने इसे गंभीरता से लिया और अपने मैप एप में इसे जोड़ दिया। अब कोई भी वाहन चालक अगर गूगल मैप का इस्तेमाल करते हुए ड्राइविंग करेगा तो ब्लेक स्पॉट आने से 200 मीटर पहले ही अलर्ट का मैसेज आ जाएगा। अलर्ट मिलते ही चालक वाहन की गति धीमी करेंगे तो हादसों से बच सकेंगे।
क्यूआर कोड से की थी नवाचार की शुरुआत
करीब तीन चार महीने पहले रेंज आईजी राहुल प्रकाश ने सड़क हादसों को कम करने का नवाचार शुरू किया था। जयपुर रेंज के सभी जिलों जयपुर ग्रामीण, दौसा, कोटपूतली बहरोड़, अलवर, सीकर, भिवाड़ी, खैरथल तिजारा और झुंझुनूं से गुजरने वाले स्टेट और नेशनल हाईवे पर होने वाले हादसों के स्थानों को चिन्हित किया। उन चिह्नित स्थानों को तीन कैटेगरी में बांटा और फिर उनके अलग अलग क्यूआर कोड जारी किए। क्यूआर कोड स्कैन करने पर हादसों वाले स्थानों की जानकारी मिल जाती थी। अब इस नवाचार को आगे बढाते हुए उन्होंने गूगल के जरिए मैप एप से जुड़वा दिया। अब बिना किसी स्कैन के आपको संभावित हादसों वाले स्थानों की जानकारी गूगल मैप अपने आप दे देगा। अब आप का गूगल मैप ऑन रहना चाहिए।
संदेश के साथ वॉइस मैसेज भी मिलेगा
सीनियर आईपीएस राहुल प्रकाश ने बताया कि कोई भी वाहन मोटर साइकिल, कार, ट्रक, बस, टैंपो, ट्रेलर के चालक अगर गूगल मैप नेविगेशन का इस्तेमाल करेंगे तो नेविगेशन आपको अपने आप जानकारी दे देगा। हादसों वाले संभावित पॉइंट्स आने से दो सौ मीटर पहले ही मोबाइल पर अलर्ट का संदेश मिल जाएगा। साथ ही वॉइस मैसेज भी आएगा ताकि वाहन चालक उसे सुन सके। ऐसे में वाहन चालक अपने आपको अलर्ट कर सकता है। वाहन की गति वह धीमी करेगा या सावधानी बरतेगा तो हादसे की संभावना कम हो जाएगी।
तीन कैटेगरी के स्पॉट नेविगेशन में
जयपुर रेंज आईजी की ओर से पिछले तीन साल में हुए हादसों और हादसों के दौरान होने वाली मृत्यु के आधार पर अलग अलग तीन श्रेणियां लॉ रिस्क जोन, मिडियम रिस्क जोन और हाई रिस्क जोन बनाई गई है। जिस स्थान पर पिछले तीन वर्ष में पांच से ज्यादा और दस से कम मृत्यु हुई, उसे लॉ रिस्क जोन घोषित किया गया। जहां गत तीन वर्ष में 10 से अधिक और 20 से कम मृत्यु हुई, उसे मिडियम रिस्क जोन बनाया और जिस स्थान पर गत तीन वर्षों में 20 से ज्यादा मौतें हुई, उसे हाई रिस्क जोन बनाया गया। तीनों को अलग अलग कलर से प्रदर्शित किया गया है। हाई रिस्क जोन को रेड, मिडियम को ऑरेंज और लॉ रिस्क जोन को येलो कलर से प्रदर्शित किया गया।
लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।
विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।
पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें
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