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राजस्थान निकाय चुनाव: कांग्रेस का किसने बिगाड़ा खेल, भाजपा का सामने क्या है नई चुनौती? Inside Story - rajasthan election result who played spoiler for congress and what new challenge for bjp inside story

राजस्थान निकाय चुनाव: कांग्रेस का किसने बिगाड़ा खेल, भाजपा का सामने क्या है नई चुनौती? Inside Story Rajasthan Election Result 2026 राजस्थान निकाय चुनाव में भाजपा ने बढ़त बनाई, लेकिन कांग्रेस ने भी कई शहरों में मजबूत ...औ…

Jagran के अनुसार15 सितंबर 2026 को 01:05 pm बजे
राजस्थान निकाय चुनाव: कांग्रेस का किसने बिगाड़ा खेल, भाजपा का सामने क्या है नई चुनौती? Inside Story
 - rajasthan election result who played spoiler for congress and what new challenge for bjp inside story

सौजन्य से:- Jagran

राजस्थान निकाय चुनाव: कांग्रेस का किसने बिगाड़ा खेल, भाजपा का सामने क्या है नई चुनौती? Inside Story

Rajasthan Election Result 2026 राजस्थान निकाय चुनाव में भाजपा ने बढ़त बनाई, लेकिन कांग्रेस ने भी कई शहरों में मजबूत ...और पढ़ें

HighLights

- भाजपा ने जयपुर, कोटा, उदयपुर, भीलवाड़ा में स्पष्ट बहुमत हासिल किया

- कांग्रेस ने बीकानेर, अजमेर, पाली, टोंक में मजबूत प्रदर्शन किया

- निर्दलीयों ने भरतपुर में दबदबा बनाया, मेयर चुनाव में अहम भूमिका

डिजिटल डेस्क, जयपुर। राजस्थान निकाय चुनाव रिजल्ट में भाजपा ने बढ़त तो बनाई है, लेकिन सीटों का विश्लेषण करें तो तस्वीर केवल भाजपा की एकतरफा जीत की नहीं है। बल्कि कांग्रेस ने भी कई महत्वपूर्ण शहरों में अपनी पकड़ मजबूत की है। हालांकि बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत ने भाजपा-कांग्रेस के पारंपरिक मुकाबले का सियासी गणित बदल दिया है।

309 शहरी निकायों में हुए ये चुनाव दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद उसका पहला बड़ा राज्यव्यापी चुनावी परीक्षण था। विधानसभा चुनाव में अभी दो साल से अधिक का समय बाकी है। ऐसे में इन नतीजों को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए अहम संकेत माना जा रहा है।

भाजपा ने कई प्रमुख शहरों में दर्ज की जीत

भाजपा ने 10 नगर निगमों में से चार- जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा में स्पष्ट बहुमत हासिल किया। खास तौर पर कोटा में पार्टी ने बहुमत के साथ अपना दबदबा कायम रखा। कोटा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का राजनीतिक आधार माना जाता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नतीजों को अपनी सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर बताया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी परिणाम को पार्टी और सरकार के समर्थन के तौर पर पेश किया।

कांग्रेस ने इन इलाकों में बढ़ाई ताकत

कांग्रेस ने भी कई महत्वपूर्ण शहरी क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन किया। बीकानेर, अजमेर, पाली, झालावाड़ और टोंक में पार्टी ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। यह केंद्रीय कानून मंत्री और बीकानेर से भाजपा सांसद अर्जुन राम मेघवाल का गृह जिला है। अजमेर नगर निगम में भी कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। अजमेर उत्तर से विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी विधायक हैं।

पाली में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का गृह क्षेत्र होने के बावजूद कांग्रेस नगर निगम में सबसे बड़ी पार्टी बनी। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक प्रभाव वाले झालावाड़ में भी कांग्रेस ने नगर परिषद चुनाव में बढ़त बनाई। राजे झालरापाटन से विधायक हैं, जबकि उनके बेटे दुष्यंत सिंह झालावाड़-बारां से लोकसभा सांसद हैं।

टोंक नगर परिषद में भी कांग्रेस ने बहुमत हासिल किया। टोंक विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट करते हैं। हालांकि टोंक जिले की कई अन्य नगरपालिकाओं में भाजपा ने भी मजबूत प्रदर्शन किया।

मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र भरतपुर में निर्दलीयों का दबदबा

सबसे दिलचस्प तस्वीर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर में सामने आई। यहां निर्दलीय उम्मीदवारों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को पीछे छोड़ते हुए नगर निगम में मजबूत स्थिति बनाई। भरतपुर-डीग क्षेत्र के कई हिस्सों में भी निर्दलीयों का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा। मुख्यमंत्री ने भरतपुर में भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में व्यक्तिगत रूप से प्रचार किया था और रोड शो भी किया था। इसके बावजूद पार्टी को यहां अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

इन नतीजों का राजनीतिक महत्व काफी अधिक है, क्योंकि यह इलाका मुख्यमंत्री का गढ़ है। यहां की सात विधानसभा सीटों में से पांच पर BJP का कब्जा है और नगर से विधायक जवाहर सिंह बेढम, शर्मा की कैबिनेट में गृह राज्य मंत्री हैं। सीएम भजनलाल शर्मा भरतपुर के रहने वाले हैं लेकिन जयपुर की सांगानेर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।

राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भरतपुर के नतीजों को लेकर मुख्यमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में जीत दर्ज नहीं कर सकी। डोटासरा के मुताबिक मुख्यमंत्री को खुद रोड शो करना पड़ा, जो वहां भाजपा के सामने चुनौती का संकेत था।

निर्दलीयों ने बदला पूरा समीकरण

निकाय चुनाव में बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत ने दोनों प्रमुख दलों के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। कई नगर निकायों में भाजपा और कांग्रेस में से किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में 21 सितंबर को होने वाले मेयर और सभापति के चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अब निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर सकते हैं। यही वजह है कि निकाय चुनाव का अंतिम सियासी समीकरण 21 सितंबर को मेयर और सभापति के चुनाव के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगा।

छोटे दलों ने भी छोड़ी छाप

इन चुनावों में छोटे दलों को भी कुछ इलाकों में राजनीतिक जगह मिली है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने बारां नगर परिषद में बहुमत हासिल किया। वहीं बीकानेर जिले की नोखा नगरपालिका में माकपा (CPI-M) ने निर्णायक जीत दर्ज की।

भविष्य के लिए अहम संकेत

अगर रिजल्ट का विश्लेषण करें तो नतीजे सत्तारूढ़ भाजपा के लिए पूरी तरह उत्साहजनक नहीं हैं। कांग्रेस ने मजबूत मुकाबला किया है और कई स्थानों पर निर्दलीय भी बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं। ऐसे में भाजपा को अगले विधानसभा चुनाव में सत्ता बरकरार रखने के लिए और अधिक मेहनत करनी होगी। क्योंकि इसका असर आगामी पंचायती राज चुनावों के साथ-साथ अगले विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है।

2028 के विधानसभा चुनाव के लिए क्या संकेत?

राजस्थान विधानसभा चुनाव में अभी दो साल से अधिक का समय है। इसलिए दोनों प्रमुख दल इन नतीजों का अपने-अपने तरीके से विश्लेषण करेंगे। भाजपा के लिए सरकार के खिलाफ स्थानीय स्तर पर उभरती नाराजगी को पहचानना और संगठन को मजबूत करना चुनौती होगी। वहीं कांग्रेस के सामने निकाय चुनाव में मिली बढ़त को व्यापक राज्यव्यापी राजनीतिक समर्थन में बदलने की चुनौती होगी।

इन नतीजों ने यह भी संकेत दिया है कि राजस्थान में कई क्षेत्रों में मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस तक सीमित नहीं रह गया है। निर्दलीय उम्मीदवारों की मजबूत मौजूदगी आने वाले चुनावों में दोनों दलों के लिए चुनौती बन सकती है। 21 सितंबर को मेयर और सभापति के चुनाव के बाद यह तस्वीर और स्पष्ट होगी कि किस पार्टी ने निर्दलीयों को अपने साथ जोड़कर निकायों में सत्ता का समीकरण अपने पक्ष में किया।

यह भी पढ़ें- राजस्थान निकाय चुनाव: भाजपा की जीत और कांग्रेस की हार का फैक्टर, क्या है 2028 की चुनौती?

सोर्स- पीटीआई के इनपुट के साथ

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