IIT बॉम्बे की रिपोर्ट में खुलासा: जोधपुर हाईकोर्ट के नए भवन के ढहने का खतरा...कोर्ट ने लिया संज्ञान, CS समेत कई आला अधिकारी तलब
IIT बॉम्बे की रिपोर्ट में खुलासा: जोधपुर हाईकोर्ट के नए भवन के ढहने का खतरा...कोर्ट ने लिया संज्ञान, CS समेत कई आला अधिकारी तलब रिपोर्ट में सेंट्रल डोम के गिरने की आशंका जताई गई. कोर्ट ने 24 अगस्त को अधिकारियों को निजी त…

सौजन्य से:- ETV Bharat
IIT बॉम्बे की रिपोर्ट में खुलासा: जोधपुर हाईकोर्ट के नए भवन के ढहने का खतरा...कोर्ट ने लिया संज्ञान, CS समेत कई आला अधिकारी तलब
रिपोर्ट में सेंट्रल डोम के गिरने की आशंका जताई गई. कोर्ट ने 24 अगस्त को अधिकारियों को निजी तौर पर उपस्थित होने को कहा.
Published : August 10, 2026 at 8:43 PM IST
जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर स्थित मुख्य पीठ के भव्य और अत्याधुनिक माने जाने वाले नए भवन को लेकर बेहद गंभीर व चिंताजनक खबर सामने आई है. वर्ष 2019 में उद्घाटन हुए इस मुख्य परिसर का विशाल सेंट्रल डोम (मध्य गुंबद- लगभग 21 मीटर ऊंचा) ढहने की कगार पर है. आईआईटी बॉम्बे की एक्सपर्ट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है. रिपोर्ट में कहा गया कि यह गुंबद बेहद जर्जर है और कभी भी गिर सकता है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधीश डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी एवं न्यायाधीश प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने सोमवार को इस पर स्वतः संज्ञान लिया. अदालत ने इसे मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा और संवैधानिक संस्था की साख पर धब्बा माना. कोर्ट ने राज्य सरकार, सार्वजनिक निर्माण विभाग तथा राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम शीर्ष अधिकारियों पर कड़ा रुख अपनाया है. हाईकोर्ट ने 24 अगस्त को राज्य के मुख्य सचिव, वित्त सचिव, सावर्जनिक निर्माण विभाग के प्रमुख शासन सचिव, RSRDC के प्रबंध निदेशक, पुलिस महानिदेशक, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी जोधपुर और स्ट्रक्चरल ऑडिट फर्म के प्रतिनिधियों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए. फिलहाल हाईकोर्ट में गुंबद ढक दिया गया है. इसके नीचे लोगों की आवाजाही रोक दी गई है. खंडपीठ ने कोर्ट के सीनियर एडवोकेट की टीम बनाई, जो इस केस की सुनवाई के दौरान कोर्ट का सहयोग करेगी.
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6 साल नहीं हुए और दिखने लगे गंभीर दोष: कोर्ट ने आदेश में कहा कि हाईकोर्ट की नई इमारत की नींव 20 अप्रैल 2007 को रखी गई थी. मुख्य भवन का निर्माण 2011 में शुरू हुआ. वर्ष 2013 के अंत तक स्ट्रक्चरल कार्य पूरा हो गया. दिसंबर 2019 में भवन को सुपुर्द किया और उद्घाटन राष्ट्रपति, केंद्रीय कानून मंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य लोगों की मौजूदगी में हुआ था. इसके बावजूद कुछ ही वर्षों में भवन में गंभीर संरचनात्मक समस्याएं सामने आने लगीं. कोर्ट ने कई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा, विभिन्न कोर्ट रूम, जजों के चैंबर और अन्य हिस्सों में छत व फॉल्स सीलिंग गिरने की घटनाएं हुईं. 29 अप्रैल 2023 को डोम का एक हिस्सा गिरा. इसके अलावा वर्ष 2024 और 2025 में भी अलग-अलग हिस्सों में छत, प्लास्टर और फॉल्स सीलिंग गिरने की घटनाएं सामने आईं.
IIT की रिपोर्ट में जंग और कंक्रीट की गुणवत्ता पर सवाल: IIT जोधपुर की विशेषज्ञ समिति ने 2023 की रिपोर्ट में स्लैब के कंक्रीट कवर के टूटने और स्टील रीबार में भारी जंग की बात कही थी. जांच में स्टील में जंग, कंक्रीट में जंग के कारण दरारें, छत के किनारे के कॉलम में गंभीर रूप से जंग लगे सरिए और वाटरप्रूफिंग से जुड़ी कमियां सामने आई थीं. समिति ने भवन का व्यापक थर्ड पार्टी स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की सिफारिश की थी. इसके बाद कराए गए स्ट्रक्चरल ऑडिट में भी कई चिंताजनक तथ्य सामने आए. जांच में कंक्रीट की गुणवत्ता से संबंधित कुछ रीडिंग संदिग्ध पाई गईं और पानी के नमूनों में क्लोराइड की मात्रा अनुमत सीमा से अधिक बताई गई.
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मरम्मत पर 57 करोड़ रुपए का अनुमान: RSRDC की रिपोर्ट के अनुसार, भवन में स्ट्रक्चरल रिपेयर और रेट्रोफिटिंग के लिए करीब 57.65 करोड़ रुपए का अनुमान लगाया गया. इसे हाई, मीडियम और लॉ क्रिटिकलिटी के तीन स्तरों में बांटा गया था. हाई क्रिटिकलिटी में बीम, कॉलम और स्लैब से जुड़े संरचनात्मक दोष शामिल किए गए थे.
IIT बॉम्बे की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता: हालिया स्ट्रक्चरल ऑडिट के दौरान IIT बॉम्बे ने पाया कि भवन के खराब होने के पीछे मुख्य कारण रीइन्फोर्समेंट में जंग, कार्बोनेशन और कुछ हिस्सों में क्लोराइड प्रदूषण है. निरीक्षण किए क्षेत्रों में करीब 40 प्रतिशत हिस्से को कंक्रीट स्पॉलिंग के लिहाज से संवेदनशील पाया गया. रिपोर्ट के अनुसार, नमी और जंग की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर कंक्रीट का हिस्सा अचानक गिर सकता है. इसके लिए सतह पर पहले से दिखने वाली दरारें होना जरूरी नहीं है. IIT बॉम्बे ने तत्काल इंजीनियरिंग हस्तक्षेप की जरूरत बताते हुए डोम के खुले गोलाकार हिस्से को घेरने, पूरे भवन में केवल ड्राई मॉपिंग करने और सीपेज व प्लंबिंग लीकेज को तत्काल दूर करने की अंतरिम सिफारिशें कीं. कोर्ट के आदेश के अनुसार डोम क्षेत्र को पहले ही घेर दिया गया.
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24 अगस्त को आला अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों को 24 अगस्त तक विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए. इसमें भवन की सुरक्षा ऑडिट, स्ट्रक्चरल हेल्थ मॉनिटरिंग, भार वहन क्षमता, मरम्मत की स्थिति, निर्माण व रखरखाव में जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका और भविष्य की कार्ययोजना की पूरी जानकारी मांगी गई है. कोर्ट ने अंतरिम तौर पर प्रभावित क्षेत्रों में जरूरत पड़ने पर प्रवेश प्रतिबंधित करने, प्रॉपिंग, शोरिंग, स्टील स्कैफोल्डिंग और प्रोटेक्टिव नेटिंग जैसी व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए. साथ ही सेंट्रल डोम और अन्य महत्वपूर्ण संरचनात्मक हिस्सों की 24 घंटे निगरानी, दैनिक रिपोर्टिंग, सुरक्षा एवं निकासी प्रोटोकॉल और 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित करने के भी निर्देश दिए गए.
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