नया किसान सहायता ऐप: AI से जल्दी पता चलेगी फसलों की बीमारी और उपचार का मार्ग - Aaj Tak
नई तकनीकी प्रणाली के उपयोग से अब किसान अपनी फसलों में होने वाली बीमारी का पता लगाने के लिए AI ऐप का उपयोग कर सकते हैं। यह ऐप बिना इंटरनेट के ही कुछ ही सेकंड में फसलों की बीमारी और उसका उपचार बता सकेगा। X के अनुसार, इस ऐप को बनाने में IIIT कोटा के वैज्ञानिकों ने काम किया है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
IIIT कोटा के फेकल्टी का कमाल: किसानों के लिए बनाया AI ऐप, बिना इंटरनेट के भी बताएगा फसलों की बीमारी और इलाज
डॉ. राजेंद्र कच्छावा ने ऐसा ऐप बनाया है, जो सेकंडों में फसल की बीमारी पहचानकर सटीक उपचार बताता है. पढ़िए मनीष गौतम की स्पेशल रिपोर्ट.
Published : July 24, 2026 at 6:34 AM IST
कोटा: भारतीय कृषि और तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ा क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT) कोटा के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र कच्छावा ने किसानों के लिए एक ऐसा अनोखा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मोबाइल ऐप तैयार किया है, जो बिना इंटरनेट के कुछ ही सेकंड में फसलों की बीमारियों को पहचानकर उसका सटीक वैज्ञानिक उपचार बता देगा.
इस ऐप के जरिए किसान अपनी फसलों में लगने वाली बीमारियों का पता आसाना से लगा सकेंगे. यह सब मोबाइल के जरिए कुछ ही सेकंड में होगा. किसान को बीमारी के साथ उपचार, कारण और आगे के मैनेजमेंट की जानकारी भी इस ऐप के जरिए मिल जाएगी. शुरुआती तौर पर केवल पत्ता गोभी की फसल में ही 7 बीमारियों का पता लगाया जा सकता है. इसके साथ यह भी देखा जा सकता है कि उनकी उपज सटीक है या नहीं.
इसे भी पढ़ें- अजमेर IACR ने तैयार किया बिना रसायन कीटनानशक, बेहतर फसल के साथ मिल रहे अच्छे दाम - Ajmer IACR
इंजीनियरिंग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर: असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र कच्छावा ने बताया कि फिलहाल अभी यह ऐप एंड्रॉयड वर्जन पर तैयार किया गया है. बाद में इसे आईओएस के लिए भी लागू करने की योजना है. रिसर्च के बाद एआई मॉड्यूल ऐप तैयार करने वाले डॉ. राजेंद्र कच्छावा मूल रूप से भीलवाड़ा के रहने वाले हैं. वे ट्रिपल आईटी में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. डॉ. राजेंद्र कच्छावा ने राजस्थान यूनिवर्सिटी से बीटेक किया है और राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी से एमटेक की पढ़ाई पूरी की है.
1600 से ज्यादा फोटो लिए गए: डॉ. राजेंद्र कच्छावा ने बताया कि शुरुआती तौर पर हाड़ौती में सब्जी के लिए उगाई जाने वाली पत्ता गोभी को उन्होंने इस ऐप में शामिल किया है. इसके लिए 27 से अधिक खेतों से 1600 से ज्यादा फोटो लिए गए हैं, जिनमें अलग-अलग मिट्टी, पानी और क्षेत्र का चयन किया गया है. यह हाड़ौती के कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़ के साथ-साथ भीलवाड़ा जिले के बिगोद क्षेत्र से लिए गए हैं, जहां पत्ता गोभी की उपज किसान ज्यादा उगाते हैं. यह पूरी रिसर्च उन्होंने ट्रिपल आईटी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग अध्यक्ष डॉ. ज्ञान सिंह यादव के निर्देशन में की है. उनका यह शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल में भी प्रकाशित हुआ है. डॉ. कच्छावा को 21-22 अक्टूबर को नीदरलैंड में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ग्लोबल समिट में विशेष वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया है.
इसे भी पढ़ें- अजमेर के युवकों ने बनाया 'माय साथी ऐप'...पैनिक बटन दबाते 5 लोगों के पास पहुंचेगा सुरक्षा मैसेज
ड्रोन को भी इस सिस्टम से जोड़ेंगे: डॉ. राजेंद्र कच्छावा का कहना है कि फिलहाल इस सिस्टम में सिंगल फोटो लेना होता है, लेकिन आगे जाकर ड्रोन से भी यह किया जा सकेगा, ताकि ड्रोन पूरे खेत का फोटो ले लेगा और पता लगा लेगा कि किस क्षेत्र में फसल में खराबी हुई है. इससे पूरे क्षेत्र में पेस्टिसाइड का छिड़काव किया जा सकेगा. इस पर भी काम चल रहा है. शुरुआती तौर पर जिन 7 बीमारियों को इसमें कवर किया गया है, उनमें अल्टरनरिया लीफ स्पॉट, ब्लैक रॉट, डाउन मिल्ड्यू, बैक्टीरिया सॉफ्ट रॉट, फ्यूजेरियम येलो, बैक्टीरियल लीफ स्पॉट और क्लब रूट शामिल हैं. इसके अलावा स्वस्थ पत्ती को भी पहचाना जा सकता है. इससे समय पर उपचार मिल जाएगा और उत्पादन में नुकसान भी कम होगा.
95 प्रतिशत सटीकता, बीमारी मैनेजमेंट भी: उन्होंने इस मॉड्यूल की टेस्टिंग भी कर ली है, जिसमें करीब 95 प्रतिशत के आसपास सटीकता हासिल हुई है. इसमें कम मेमोरी और उच्च गति वाले हल्के एआई मॉडल का विकास किया गया है. इस पूरे मॉड्यूल का नाम लाइट सेपरेबल कॉन्वोल्यूशनल नेचुरल नेटवर्क (LS-CNN) है. ऐप के जरिए किसान अपनी बीमारी का रिकॉर्ड रख सकता है. बीमारी की हिस्ट्री भी ऐप पर मिल जाती है. इसके साथ ही यह बिना नेटवर्क के ऑफलाइन भी काम करती है. इस ऐप में आगे एक्सपर्ट से संपर्क का सिस्टम भी जोड़ा जाएगा.
इसे भी पढ़ें- ग्रामीण छात्रों के लिए शिक्षक ने बनाया टार्गेट-100 मोबाइल ऐप
किसान सीधे एक्सपर्ट से बात कर सकेंगे: डॉ. राजेंद्र कच्छावा का कहना है कि यह एप्लिकेशन बीमारी पहचान के साथ-साथ उसका समाधान भी बता देती है. इसमें उन बीमारियों का उपचार और सुझाव दिए जाते हैं. किस तरह से मैनेजमेंट करना है, यह भी बताया जाता है. किस दवा (पेस्टिसाइड) का छिड़काव करना है और फसल को आगे कैसे बचाना है, रोग का कारण भी इसमें बताया जाता है. डॉ. राजेंद्र कच्छावा का कहना है कि हम इसके लिए पूरा डेटा बैंक बना रहे हैं, जिसमें काफी मेहनत कर रहे हैं. इसमें यह सिस्टम भी जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं कि किसान सीधे एक्सपर्ट से बात कर सकें. इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र की मदद ली जाएगी.
किसानों के फ्रेंडली बना रहे ऐप व सिस्टम: डॉ. राजेंद्र कच्छावा का कहना है कि अभी वह इस एप्लिकेशन पर काफी काम कर रहे हैं. उनके साथ भीलवाड़ा की डॉ. स्नेहलता मालू व अवनीत कुमार भी काम कर रहे हैं, फिलहाल केवल पत्ता गोभी के रोग इसमें डाले गए हैं. इसे आगे बढ़ाकर काफी कुछ करना है. अन्य फसलों के संबंध में भी जानकारी देनी है, जिनमें टमाटर, मिर्च, गेहूं, सरसों सहित अन्य शामिल हैं, जिन पर काम चल रहा है. इस एप्लिकेशन को काफी आगे ले जाना है. इस क्रांतिकारी रिसर्च का सबसे बड़ा उद्देश्य इस पूरी तकनीक को किसानों के लिए "यूजर-फ्रेंडली" यानी बेहद सरल और सुलभ बनाना है.
इसे भी पढ़ें- Explainer: अलवर के लाल प्याज को मिला सेंटर फॉर एक्सीलेंस का 'बूस्टर डोज', जानिये कैसे बदल जाएगी किसानों की किस्मत
उन्होंने बताया कि आमतौर पर तकनीकी ऐप्स में अंग्रेजी या बहुत कठिन हिंदी शब्दों का उपयोग होता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के किसान भ्रमित हो जाते हैं. उदाहरण के लिए ऐप में जब कंप्यूटर पूरी तरह शुद्ध हिंदी अनुवाद करता है, तो वह 'कंप्यूटर' को 'संगणक' और 'बैक्टीरिया' को 'जीवाणु' लिख देता है. इसी समस्या को दूर करने के लिए डॉ. कच्छावा और उनकी टीम इसकी टर्मिनोलॉजी (शब्दावली) को स्थानीय बोलचाल के शब्दों में ढाल रही है, ताकि कम पढ़ा-लिखा किसान भी बिना किसी झिझक के इस एआई टूल का उपयोग कर सके. उनका कहना है कि अन्य भाषाओं गुजराती, मराठी, उड़िया, तमिल व तेलुगु में भी इसे पहुंचाना चाहते हैं. इस पर काम भी चल रहा है, क्योंकि ज्यादातर किसान क्षेत्रीय भाषाओं का ही उपयोग करते हैं.
इसे भी पढ़ें- हाड़ौती में धान किसानों की मेहनत पर फिरा 'पानी', दामों में भारी गिरावट, रोजाना करोड़ों का नुकसान
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

Jodhpur AIIMS : रेजिडेंट डॉक्टर का आरोप- रैगिंग की शिकायत करने पर तीन बार किया फेल, केंद्रीय मंत्री से न्याय की अपील

मानव मस्तिष्क के रहस्यों को समझने के लिए IIT जोधपुर की दूरगामी शोध

जोजरी-नदी-मामला: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के मुख्य-सचिव को ठहराया जिम्मेदार: अगली सुनवाई में होंगे पेश, हाई लेवल कमेटी बोली- प्रदूषित पानी से कम हुए वन्यजीव - Jodhpur News


