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जोधपुर जेल में विचाराधीन बंदी की मौत का मामला : हाईकोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई FIR, पत्नी ने लगाए थे गंभीर आरोप

जोधपुर जेल में विचाराधीन बंदी की मौत का मामला : हाईकोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई FIR, पत्नी ने लगाए थे गंभीर आरोप पत्नी की ओर से दी गई रिपोर्ट में बताया गया कि जब परिवार मोर्चरी पहुंचा तो बॉडी पर कई जगह पर चोट के निशान थे. P…

ETV Bharat के अनुसार24 अगस्त 2026 को 04:54 am बजे
जोधपुर जेल में विचाराधीन बंदी की मौत का मामला : हाईकोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई FIR, पत्नी ने लगाए थे गंभीर आरोप

सौजन्य से:- ETV Bharat

जोधपुर जेल में विचाराधीन बंदी की मौत का मामला : हाईकोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई FIR, पत्नी ने लगाए थे गंभीर आरोप

पत्नी की ओर से दी गई रिपोर्ट में बताया गया कि जब परिवार मोर्चरी पहुंचा तो बॉडी पर कई जगह पर चोट के निशान थे.

Published : August 24, 2026 at 10:05 AM IST

जोधपुर : राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर जोधपुर सेंट्रल जेल में इस वर्ष फरवरी माह में पाली जिला निवासी विचाराधीन बंदी रूपाराम की हुई मौत के मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ रातानाड़ा थाने में एफआईआर दर्ज हो गई है. रूपाराम की पत्नी लीला देवी की और दर्ज करवाई गई इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गए है कि उसके पति की हत्या जेल प्रशासन की मिलीभगत से वहां रह रहे अन्य बंदियों ने की है.

रिपोर्ट में बताया गया कि जेल से लीला देवी को दो फरवरी को कॉल आया था कि उसके पति की हार्ट अटैक से मौत हुई है. इस मामले को दायर याचिका पर हाल ही में हाईकोर्ट के न्यायाधीश फरजंद अली ने विचाराधीन बंदी रूपाराम की मौत को प्रथम दृष्टया न तो प्राकृतिक माना और न आत्महत्या. उन्होंने इस घटना की जांच के लिए 48 घंटे में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे.

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शरीर पर मिली चोटें, अन्य बंदियों को धमकाने का आरोप : पत्नी की ओर से दी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि जब परिवार मोर्चरी में पहुंचा तो बॉडी पर कई जगह पर चोट के निशान थे. गर्दन के पास धारदार हथियार का भी निशान था, लेकिन तत्कालीन जेलर से लेकर सभी अधिकारी हार्ट अटैक की बात ही करते रहे. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि न्यायिक अधिकारी ने अन्य बंदियों के बयान लेने से पहले उन्हें जेल कर्मियों ने धमकाया था.

मुआवजा और आरपीएस से जांच करने के भी निर्देश : कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार को उसके परिवार को 25 लाख रुपए मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं. न्यायाधीश फरजंद अली की एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि रूपाराम की मौत जेल प्रशासन और राज्य के नियंत्रण में हुई, इसीलिए प्रशासन अपनी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष जिम्मेदारी से बच नहीं सकता. हत्या हुई या नहीं और किसी की आपराधिक जिम्मेदारी बनती है या नहीं, इसका फैसला निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच से तय होगा. जांच आरपीएस अधिकारी को करनी होगी. इसके तहत जांच एसीपी हरजीराम को दी गई है.

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