Explainer : एक दशक में जयपुर मेट्रो के नहीं आए 'अच्छे दिन', घाटा हर दिन 8 लाख से अधिक, अब कोच से लेकर स्टेशन मिल रहे किराए पर
Explainer : एक दशक में जयपुर मेट्रो के नहीं आए 'अच्छे दिन', घाटा हर दिन 8 लाख से अधिक, अब कोच से लेकर स्टेशन मिल रहे किराए पर मेट्रो कोच से लेकर रेलवे स्टेशन तक को सेलिब्रेशन तक पर किराए पर देने की व्यवस्था भी की गई है.…

सौजन्य से:- ETV Bharat
Explainer : एक दशक में जयपुर मेट्रो के नहीं आए 'अच्छे दिन', घाटा हर दिन 8 लाख से अधिक, अब कोच से लेकर स्टेशन मिल रहे किराए पर
मेट्रो कोच से लेकर रेलवे स्टेशन तक को सेलिब्रेशन तक पर किराए पर देने की व्यवस्था भी की गई है. पढ़िये अंकुर जाकड़ की रिपोर्ट.
Published : August 10, 2026 at 8:01 PM IST
जयपुरः राजधानी में पिछले एक दशक से जयपुर मेट्रो हर दिन घाटे की ट्रैक पर दौड़ रही है. जयपुर मेट्रो के शुरू होने से लेकर अब तक औसत रूप से कमाई और लागत के बीच का अंतर हर साल 32 करोड़ रुपए से अधिक ही रहा है. ये नुकसान हर महीने 2.7 करोड़ रुपए तो हर दिन करीब 8 लाख 90 हजार का है.
लगातार घाटे में चल रही मेट्रो को 'फायदे के ट्रैक' पर दौड़ाने के लिए जयपुर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन तमाम कवायद कर रहा है. कॉर्पोरेशन जहां नॉन फेयर रेवन्यू को बढ़ाने पर फोकस कर रहा है. वहीं, मेट्रो के फेज द्वितीय से भी बड़ी उम्मीद लगी हुई है. इस बीच मेट्रो कोच से लेकर रेलवे स्टेशन तक को सेलिब्रेशन तक पर किराए पर देने की व्यवस्था भी की गई है. इसका सीधा सा मकसद जयपुर मेट्रो को घाटे से ऊबारना ही है. मेट्रो के मौजूदा नेटवर्क की शुरुआत 3 जून 2015 को मानसरोवर से चांदपोल तक फेज-1A के संचालन के साथ हुई थी. इसके बाद से ही लागत और कमाई के बीच का अंतर कभी खत्म नहीं हो पाया.
पढ़ेंः जयपुर मेट्रो फेज-2 को मंजूरी: बनेगा 41 किमी नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर, 36 स्टेशनों का होगा निर्माण
मेट्रो संचालन की लागत और आय का गणितः मेट्रो सीएमडी वैभव गालरिया के मुताबिक जयपुर मेट्रो को फेयर रेवेन्यू से करीब 40 करोड़ और दुकानों, प्रॉपर्टी, ऑफिस स्पेस, विज्ञापन सहित अन्य गतिविधियों से करीब 20 करोड़ की आय हो रही है. इसके हिसाब से मेट्रो का कुल ऑपरेशनल आय करीब 60 करोड़ रुपए है. इसके मुकाबले जयपुर मेट्रो का 2023-24 में रेवेन्यू एक्सपेंस 92.47 करोड़ रहा था.
इस हिसाब से आय और रनिंग कॉस्ट के बीच करीब 32.47 करोड़ रुपए का सालाना घाटा मेट्रो को रहा है. मेट्रो प्रशासन के मुताबिक लगभग हर साल रनिंग कोस्ट और आय के बीच अंतर औसतन इसी तरह का रहा है. इसे देखें तो मेट्रो को हर महीने 2 करोड़ 70 लाख तो हर दिन 8 लाख 90 हजार रुपए का घाटा हो रहा है.
2015 में शुरू हुआ सफर : जयपुर मेट्रो के मौजूदा नेटवर्क की शुरुआत 3 जून 2015 को मानसरोवर से चांदपोल तक फेज-1A के संचालन के साथ हुई थी. इसके बाद 23 सितंबर 2020 को चांदपोल से बड़ी चौपड़ तक फेज-1B शुरू हुआ. दोनों चरणों को मिलाकर मौजूदा फेज-1 की लंबाई करीब 12 किलोमीटर है. जयपुर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार फेज-1 की कुल कंप्लीशन कॉस्ट करीब 3 हजार 149 करोड़ रही.
कम यात्री और छोटा नेटवर्कः जयपुर मेट्रो के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीमित नेटवर्क और अपेक्षाकृत कम यात्री संख्या है. मौजूदा कॉरिडोर शहर के सीमित हिस्से को ही जोड़ता है. इसके चलते मेट्रो की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. दूसरी ओर ट्रेन, स्टेशन, सुरक्षा, स्टाफ, बिजली और रखरखाव जैसे कई खर्च यात्री संख्या कम होने के बावजूद लगातार बने रहते हैं. मेट्रो की कई लागतें ऐसी हैं, जिन्हें यात्रियों की संख्या के अनुपात में कम नहीं किया जा सकता. यही वजह है कि मेट्रो अब विज्ञापन, दुकान, प्रॉपर्टी, ऑफिस स्पेस और कोच बुकिंग जैसे माध्यमों से नॉन-फेयर रेवेन्यू बढ़ाने पर जोर दे रही है.
मेट्रो में कर सकते हैं सेलिब्रेशनः आय को बढ़ाने के लिए जयपुर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन अब मेट्रो स्टेशन से लेकर कोच तक को सेलिब्रेशन के लिए किराए पर दे रहा है. राजधानी में मेट्रो के कोच और स्टेशन परिसर को बर्थडे पार्टी, एनिवर्सरी, किटी पार्टी, प्री-वेडिंग शूट, फिल्म शूटिंग, विज्ञापन शूट और ब्रांड प्रमोशन जैसी गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराने की व्यवस्था है. मेट्रो कोच को निर्धारित समय के लिए बुक कराकर उसमें जन्मदिन या एनिवर्सरी सेलिब्रेशन किया जा सकता है. इसके लिए कोच में डेकोरेशन, बैनर, केक कटिंग, पैक्ड फूड और म्यूजिक जैसी व्यवस्थाएं की जा सकती हैं.
मेट्रो सीएमडी वैभव गालरिया ने बताया कि परिवार या दोस्तों के साथ जन्मदिन मनाने के लिए होटल या रेस्तरां के अलावा मेट्रो कोच भी एक विकल्प है. इस दौरान मेट्रो प्रशासन की ओर से तय सुरक्षा और परिचालन संबंधी नियमों का पालन करना होता है. उन्होंने बताया कि बर्थडे- एनिवर्सरी सेलिब्रेशन के दौरान डेकोरेशन की व्यवस्था व्यक्ति खुद के स्तर पर भी करवा सकता है और यहां एक फर्म भी हायर कर रखी है, जो इसमें मदद करती है. इसके अलावा यदि कोई एक कोच हायर करता है तो उसमें बैनर-डेकोरेशन के जरिए पार्टीशन करते हुए एक गार्ड तैनात कर दिया जाता है, ताकि प्राइवेसी बनी रहे.
प्री-वेडिंग से फिल्म शूट तक : मेट्रो के कोच और स्टेशन केवल प्राइवेट आयोजनों के लिए ही नहीं, बल्कि प्री-वेडिंग शूट, विज्ञापन फिल्म, फिल्म, म्यूजिक वीडियो और अन्य व्यावसायिक शूटिंग के लिए भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं. प्रोडक्शन हाउस या व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेकर मेट्रो के कोच या फिर स्टेशन परिसर का इस्तेमाल कर सकता है. व्यावसायिक शूटिंग के लिए शुल्क आयोजन के प्रकार, स्थान और अवधि के आधार पर निर्धारित किया जाता है.
यह है शुल्कः मेट्रो सीएमडी वैभव गालरिया ने बताया कि फिल्म शूटिंग जैसी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए 40 हजार रुपए प्रति कोच प्रति घंटे तक का शुल्क निर्धारित है. वहीं, छोटे प्राइवेट आयोजनों के लिए मेट्रो के एक कोच को चार घंटे के लिए 5 हजार में बुक करने का प्रावधान है. इसके बाद अतिरिक्त समय के लिए 1 हजार रुपए प्रति घंटे का शुल्क है. चार कोच को चार घंटे के लिए बुक करने पर 20 हजार रुपए शुल्क है. अतिरिक्त समय के लिए प्रति घंटे 5 हजार रुपए शुल्क निर्धारित है.
स्टेशन भी बनेंगे कमाई का जरियाः मेट्रो की कमाई की रणनीति केवल ट्रेन तक सीमित नहीं है. स्टेशन परिसर में बैनर, स्टैंडिज, कैनोपी और अन्य विज्ञापन माध्यमों के जरिए भी कमाई की जा रही है. इसके अलावा मेट्रो की दुकानों, प्रॉपर्टी और ऑफिस स्पेस को किराए या लाइसेंस पर देकर भी राजस्व जुटाया जा रहा है. मेट्रो अपनी पूरी संपत्ति को केवल यात्री परिवहन के लिए इस्तेमाल करने के बजाय उससे अधिकतम कमाई करने की दिशा में काम कर रही है.
मेट्रो को सपोर्ट करने के लिए मनाया जन्मदिन : हाल में बीजेपी महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौड़ ने मेट्रो में जन्मदिन मनाया था. इस दौरान उन्होने कहा कि कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री ने जयपुर मेट्रो फेज-2 का शिलान्यास किया है. करीब 42 किलोमीटर लंबा ये प्रोजेक्ट सही मायने में जयपुर शहर की लाइफलाइन बनेगा. उन्होंने कहा कि जयपुर मेट्रो की ओर से लोगों को अपने स्पेशल डे मेट्रो के कोच में मनाने का इनिशिएटिव शुरू किया गया है, इसी के तहत महिला मोर्चा की टीम ने मेट्रो कोच में जन्मदिन मनाने की पहल की है. उन्होंने जयपुरवासियों से अपील की कि वे अपने बर्थडे, एनिवर्सरी और अन्य स्पेशल ओकेजन मेट्रो के कोच में मनाएं और इस पहल के जरिए जयपुर मेट्रो को सपोर्ट करें.
फेज-2 से बड़ी उम्मीद: अब जयपुर मेट्रो की पूरी उम्मीद फेज-2 पर टिकी है. केंद्र सरकार ने करीब 41.64 किलोमीटर लंबे नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर को मंजूरी दी है. इस प्रोजेक्ट पर करीब 13 हजार 37 करोड़ खर्च होंगे और इसमें 36 स्टेशन प्रस्तावित हैं. ये कॉरिडोर शहर के महत्वपूर्ण औद्योगिक, व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों के साथ जयपुर एयरपोर्ट, टोंक रोड, एसएमएस अस्पताल, सीतापुरा इंडस्ट्रियल एरिया, वीकेआईए और विद्याधर नगर जैसे क्षेत्रों को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा. सरकार का मानना है कि बड़े नेटवर्क और बेहतर कनेक्टिविटी से यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ सकती है और सार्वजनिक परिवहन में मेट्रो की हिस्सेदारी बढ़ेगी.
फेज-2 से जयपुर मेट्रो के लिए सबसे बड़ी उम्मीद यात्रीभार बढ़ने और प्रति किलोमीटर ऑपरेशन्स की क्षमता बेहतर होने की है. वर्तमान में जहां छोटा नेटवर्क होने के कारण यात्रियों की संख्या सीमित है. वहीं, करीब 41 किलोमीटर के नए कॉरिडोर के शुरू होने से मेट्रो शहर के बड़े हिस्से को जोड़ सकेगी. इससे टिकट से होने वाली आय बढ़ने के साथ स्टेशन, विज्ञापन, दुकान और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से नॉन-फेयर रेवेन्यू बढ़ने की भी संभावना है.
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