Cyber Crime Awareness Campaign : साइबर सुरक्षा का मूल मंत्र, रुको, सोचो फिर एक्शन लो, जागरूकता के लिए एक महीने का विशेष अभियान
Cyber Crime Awareness Campaign : साइबर सुरक्षा का मूल मंत्र, रुको, सोचो फिर एक्शन लो, जागरूकता के लिए एक महीने का विशेष अभियान राजस्थान पुलिस अक्टूबर में साइबर सुरक्षा को लेकर आमजन को लेगी साथ, सुरक्षित डिजिटल स्पेस बनान…

सौजन्य से:- ETV Bharat
Cyber Crime Awareness Campaign : साइबर सुरक्षा का मूल मंत्र, रुको, सोचो फिर एक्शन लो, जागरूकता के लिए एक महीने का विशेष अभियान
राजस्थान पुलिस अक्टूबर में साइबर सुरक्षा को लेकर आमजन को लेगी साथ, सुरक्षित डिजिटल स्पेस बनाने की कवायद.
Published : October 4, 2026 at 12:02 PM IST
जयपुर : साइबर अपराध के लगातार बढ़ते आंकड़े न केवल राजस्थान पुलिस बल्कि देशभर की जांच एजेंसियों के लिए चिंता का सबब बने हुए हैं. साइबर ठगी और डिजिटल दुनिया में अन्य साइबर अपराधों पर प्रभावी रूप से लगाम लगाने के लिए राजस्थान पुलिस पूरे अक्टूबर महीने में एक खास मुहिम चलाएगी. जिसमें साइबर अपराध से बचने के तौर-तरीकों पर खास तौर पर फोकस किया जाएगा. एडीजी, साइबर क्राइम वीके सिंह का कहना है कि डिजिटल दुनिया में साइबर अपराधी हर बार साइबर ठगी और अन्य अपराधों के लिए नए-नए तरीके अपनाते हैं और लोगों को लालच देकर या डर दिखाकर झांसे में लेते हैं. ऐसे में साइबर अपराध से बचाव के लिए एक ही मूल मंत्र है, रुको, सोचो और फिर एक्शन लो.
विद्यार्थी प्रार्थना सभा में ले रहे हैं शपथ : उन्होंने कहा राजस्थान पुलिस ने अक्टूबर महीने में लोगों को जागरूक करने के लिए एक खास मुहिम शुरू की है. जिसका ध्येय है साइबर सुरक्षा की शुरुआत, हमारे युवाओं के साथ. इस साल अक्टूबर में साइबर जागरूकता माह (Cyber Awareness Month) के शुभारंभ के मौके पर, भारत का भविष्य एक सुरक्षित डिजिटल स्पेस बनाने की दिशा में नेतृत्व कर रहा है. जिसके तहत कोटा (राजस्थान), उधमपुर, चेन्नई और कोलकाता के केंद्रीय विद्यालयों सहित देशभर के विद्यार्थी सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान जिम्मेदार डिजिटल आदतों को अपनाने की शपथ ले रहे हैं.
साइबर सुरक्षा की शुरुआत, हमारे युवाओं के साथ! इस अक्टूबर, साइबर जागरूकता माह (Cyber Awareness Month) के शुभारंभ पर, भारत का भविष्य एक सुरक्षित डिजिटल स्पेस बनाने की दिशा में नेतृत्व कर रहा है! कोटा (राजस्थान), उधमपुर, चेन्नई और कोलकाता के केंद्रीय विद्यालयों सहित देश भर के छात्रों ने सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान जिम्मेदार डिजिटल आदतों को अपनाने की शपथ ली। I4C(Indian Cyber Crime Coordination Centre) साइबर सुरक्षा प्रतिज्ञा के मुख्य बिंदु: * सुरक्षित डाउनलोड: केवल आधिकारिक वेबसाइटों या भरोसेमंद ऐप स्टोर से ही मोबाइल ऐप्स इंस्टॉल करें। * विश्वास करने से पहले जांचें: सोशल मीडिया ग्रुप्स या ऑनलाइन विज्ञापनों पर विश्वास करने से पहले जानकारी की सत्यता जांचें। * सतर्क रहें: अज्ञात नंबरों से आने वाले कॉल या मैसेज पर कभी भी आंख मूंदकर भरोसा न करें। * गोल्डन रूल: "रुकें। सोचें। फिर एक्शन लें।" अब आपकी बारी है! आज ही साइबर सुरक्षा प्रतिज्ञा लें और राजस्थान पुलिस के साथ मिलकर एक साइबर-जागरूक और साइबर-सुरक्षित राष्ट्र के निर्माण में भागीदार बनें। यदि आपके साथ किसी भी तरह का Cyber Fraud होता है तो बिना देर किए तुरंत साइबर Helpline नंबर 1930, WhatsApp नंबर: 9256001930, 9257510100 या https://t.co/rXsEeqY0uF पर शिकायत दर्ज कराएं। राजस्थान पुलिस - आमजन में विश्वास, अपराधियों में डर। #Rajasthanpolice #Cybercrime #1930 #digitalsafety #cyberawareness
— Rajasthan Police (@PoliceRajasthan) October 2, 2026
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आंख मूंदकर भरोसा करना पड़ सकता है भारी : उन्होंने बताया, इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने साइबर सुरक्षा प्रतिज्ञा के चार प्रमुख बिंदु तय किए हैं. यह शपथ देश के साथ ही राजस्थान के स्कूलों में विद्यार्थियों को दिलवाई जा रही है. इसका पहला बिंदु है कि सुरक्षित डाउनलोड है. दूसरा बिंदु है कि डिजिटल दुनिया में आने वाले किसी भी कंटेंट (मैसेज, वीडियो, फोटो या अन्य सामग्री) पर विश्वास करने से पहले उसकी जांच कर लेनी चाहिए. तीसरा बिंदु है कि हमेशा सतर्क रहें. अनजान नंबर से आने वाले कॉल या मैसेज पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए. चौथा बिंदु साइबर सुरक्षा का गोल्डन रूल है. जिसमें कहा गया है कि रुको, सोचो और फिर एक्शन लो. उन्होंने आमजन से आग्रह करते हुए कहा, अब आपकी बारी है. आज ही साइबर सुरक्षा प्रतिज्ञा लें और राजस्थान पुलिस के साथ मिलकर एक साइबर-जागरूक और साइबर-सुरक्षित राष्ट्र के निर्माण में भागीदार बनें.
लालच या डर दिखाकर शिकार बनाते हैं साइबर अपराधी : साइबर अपराध के मूल में दो ही प्रवृत्ति काम करती है. पहला लालच और दूसरा डर. साइबर अपराधी इन्वेस्टमेंट पर मोटा मुनाफा, लॉटरी निकलने जैसे लालच देकर निजी और गोपनीय जानकारी हासिल करते हैं और ठगी की वारदातों को अंजाम देते हैं. इसके अलावा, डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाओं को लोगों को डराकर अंजाम दिया जाता है. किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर साइबर अपराधी कॉल करते हैं और बैंक अकाउंट या सिम का आपराधिक वारदात में इस्तेमाल होने की बात कहकर डराते हैं. जब उन्हें लगता है कि शिकार उनके चंगुल में फंस गया है तो वे मोटी रकम अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लेते हैं. इसके अलावा भ्रामक विज्ञापनों में लालच देकर भी शिकार बनाया जाता है.
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यह हैं साइबर सुरक्षा के चार मूल मंत्र :-
- सुरक्षित डाउनलोड: केवल आधिकारिक वेबसाइटों या भरोसेमंद एपस्टोर से ही मोबाइल एप्स इंस्टॉल करें.
- विश्वास करने से पहले जांचें: सोशल मीडिया ग्रुप्स या ऑनलाइन विज्ञापनों पर विश्वास करने से पहले जानकारी की सत्यता जांचें.
- सतर्क रहें: अज्ञात नंबरों से आने वाले कॉल या मैसेज पर कभी भी आंख मूंदकर भरोसा न करें.
- गोल्डन रूल: "रुकें, सोचें, फिर एक्शन लें."
ठगी या ठगी की आशंका होने पर तत्काल करें शिकायत : एडीजी वीके सिंह का कहना है कि साइबर ठगी की वारदातों में शुरुआत का एक घंटा गोल्डन पीरियड होता है. जिसमें शिकायत होने पर ठगी की रकम को फ्रिज करवाना आसान होता है. इसलिए ठगी होने या ठगी की आशंका होने पर तत्काल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करवानी चाहिए. अपने निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन पर भी शिकायत दी जा सकती है. इसके साथ ही पुलिस मुख्यालय की वॉट्सएप हेल्पलाइन नंबर 9256001930 या 9257510100 पर कॉल कर भी मदद ली जा सकती है.
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