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CM भजनलाल थे सरपंच, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा प्रधान: किरोड़ी, जूली और विश्वेंद्र सिंह जिला प्रमुख; पंचायत चुनावों से कई दिग्गज चढ़े सत्ता की सीढ़ी - Rajasthan News

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Dainik Bhaskar के अनुसार4 अक्टूबर 2026 को 05:04 am बजे
CM भजनलाल थे सरपंच, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा प्रधान:  किरोड़ी, जूली और विश्वेंद्र सिंह जिला प्रमुख; पंचायत चुनावों से कई दिग्गज चढ़े सत्ता की सीढ़ी - Rajasthan News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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भास्कर एक्सक्लूसिवCM भजनलाल थे सरपंच, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा प्रधान:किरोड़ी, जूली और विश्वेंद्र सिंह जिला प्रमुख; पंचायत चुनावों से कई दिग्गज चढ़े सत्ता की सीढ़ी

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27 साल के युवक ने छोटे से गांव में पंचायत का चुनाव लड़ा और सरपंच बन गया। वो शख्स आज राजस्थान के मुख्यमंत्री हैं…भजनलाल शर्मा।

साल 2005 में एक व्यक्ति ने पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। बाद में प्रधान चुने गए। आज वही व्यक्ति राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष हैं…गोविंद सिंह डोटासरा।

सिर्फ ये 2 नाम ही नहीं, लिस्ट में डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा, डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, टीकाराम जूली, विश्वेंद्र सिंह, परसराम मदेरणा, शीशराम ओला, हरेंद्र मिर्धा जैसे कई दिग्गजों के नाम हैं।

राजस्थान में तारीखों की घोषणा के साथ पंचायत चुनाव का आगाज हो गया है। अब गांवों में राजनीतिक पकड़ दिखाने के लिए बीजेपी-कांग्रेस पूरी ताकत झोंक देंगी।

भास्कर ने इन दिग्गजों के जरिए समझने की कोशिश की कि राजस्थान की राजनीति में पंचायत चुनाव इतना महत्वपूर्ण पायदान क्यों है…

- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 34 साल से राजनीति में सक्रिय हैं। जन्म भरतपुर के अटारी गांव में हुआ था। 27 साल की उम्र में अटारी गांव में ही सरपंच का चुनाव जीतकर राजनीति में आए। इसके बाद भाजपा युवा मोर्चा के नदबई मंडल अध्यक्ष भी रहे।

- भजनलाल शर्मा युवा मोर्चा भरतपुर के जिला मंत्री, जिला उपाध्यक्ष, जिला महामंत्री और 3 बार जिला अध्यक्ष भी रहे। इसके बाद भाजपा में जिला मंत्री, जिला महामंत्री और जिला अध्यक्ष भी रहे।

- 1990 में एबीवीपी के कश्मीर मार्च में भी सक्रिय रूप से जुड़े और उधमपुर तक मार्च किया था। इस दौरान उन्होंने गिरफ्तारी भी दी थी। 1992 में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में जेल भी जा चुके हैं।

- भजनलाल शर्मा पार्टी में अशोक परनामी, मदन लाल सैनी, सतीश पूनिया और सीपी जोशी के साथ महामंत्री बने रहे। शर्मा प्रदेश महामंत्री के 3-3 साल के दो कार्यकाल पूरे करने के बाद लगातार तीसरी बार भी महामंत्री बने। वे प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे हैं।

- पिछले विधानसभा चुनाव में सांगानेर से टिकट मिला और वे पहली बार विधायक बने। इसके बाद पार्टी ने उन्हें सीएम बनाया। पंचायत राज से शुरू हुए सफर में वे प्रदेश सत्ता के नंबर वन पद पर आसीन हैं।

- राजस्थान के उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने साल 2000 में दूदू के वार्ड 15 से जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ा और जीता। जिला परिषद सदस्य बनने के बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के बीच मजबूत पकड़ बनाई।

- बीजेपी ने वर्ष 2013 में दूदू विधानसभा सीट से बैरवा को प्रत्याशी बनाया। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को साढ़े 33 हजार से अधिक वोटों से हराया। इसके बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। फिर, 2023 में उन्होंने विधानसभा चुनाव जीत लिया। इसके बाद उन्हें राजस्थान का उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया।

- कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा भी दौसा जिला परिषद में जिला प्रमुख रह चुके हैं। हालांकि वे जिला प्रमुख बनने से पहले एक बार विधायक बन चुके थे। डॉ. मीणा ने अपना पहला विधानसभा चुनाव 1985 में महवा (सवाई माधोपुर) से जीता था। इसके बाद वे साल 1995 से 98 के बीच दौसा जिला परिषद में जिला प्रमुख रहे। डॉ. मीणा 6 बार विधानसभा, 2 बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। एक बार राज्यसभा में सांसद भी रहे।

- बतौर अध्यक्ष प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे गोविंद सिंह डोटासरा ने अपनी राजनीतिक शुरुआत पंचायत चुनाव से की थी। उन्होंने 2005 में कांग्रेस के टिकट पर सीकर जिले की लक्ष्मणगढ़ पंचायत समिति के सदस्य का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। बाद में लक्ष्मणगढ़ पंचायत समिति के प्रधान चुने गए।

- प्रधान रहते उन्होंने क्षेत्र में काफी पकड़ बना ली। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने उन्हें 2008 के विधानसभा चुनाव में लक्ष्मणगढ़ सीट से विधानसभा प्रत्याशी बनाया। पहला ही चुनाव डोटासरा ने जीत लिया। इसके बाद से लगातार चुनाव जीत रहे हैं। पिछली सरकार में शिक्षा मंत्री भी रहे।

- राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली अलवर के जिला प्रमुख रहे हैं। उन्होंने 2005 में जिला परिषद का चुनाव जीता और 2008 तक अलवर जिले के जिला प्रमुख के पद पर रहे। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें वर्ष 2008 में अलवर ग्रामीण सीट से टिकट दिया। वे अपना पहला चुनाव जीतकर विधायक बने। तीन बार विधायक रहने वाले जूली पिछली सरकार में मंत्री भी रहे।

- इन दिनों कांग्रेस से नाराज चल रहे पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने भी अपनी राजनीतिक शुरुआत पंचायत चुनाव से ही की थी। भरतपुर राजघराने से ताल्लुक रखने वाले विश्वेंद्र सिंह ने मुख्यधारा की चुनावी राजनीति में पहला कदम 1988 में भरतपुर के जिला प्रमुख के रूप में रखा था। जिला प्रमुख बनने के बाद वे जनता के बीच लोकप्रिय हुए। 3 बार विधायक और 3 बार सांसद बने।

मदेरणा परिवार : सरपंच से राजनीति की शुरुआत

- मारवाड़ के कद्दावर जाट नेता रहे परसराम मदेरणा ने भी पंचायती राज से ही अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। वे साल 1953 में जोधपुर जिले में अपने पैतृक गांव चाड़ी से सरपंच बने। इसके बाद उन्होंने 1957 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और जीते। 9 बार विधायक रहे। इस दौरान वे कैबिनेट मंत्री, नेता प्रतिपक्ष और विधानसभा अध्यक्ष पद पर भी रहे।

- मदेरणा परिवार का पंचायती राज चुनाव में खासा दखल रहा है। परसराम मदेरणा के बेटे महिपाल मदेरणा 1982 से 2003 तक लगातार जोधपुर के जिला प्रमुख रहे। वर्तमान में महिपाल मदेरणा की पत्नी लीला मदेरणा जोधपुर की जिला प्रमुख हैं।

ओला परिवार : 78 साल पहले शुरुआत

- शेखावाटी के कद्दावर नेता रहे शीशराम ओला 8 बार विधायक और 5 बार सांसद रहे। इससे पहले वो 2 बार झुंझुनूं जिला प्रमुख रहे। वे झुंझुनूं जिला परिषद के इतिहास में सबसे लंबे समय तक इस पद पर रहने वाले नेता हैं। इससे भी पहले ओला साल 1948 में अपने पैतृक गांव अरड़ावता के सरपंच बने थे।

- सरपंच, प्रमुख रहने के बाद वे केंद्रीय मंत्री पद तक पहुंचे थे। जब शीशराम ओला ने जिला प्रमुख पद छोड़ा, तो उनके बेटे बृजेन्द्र ओला भी दो बार जिला प्रमुख बने। इसके बाद बृजेंद्र ओला की पत्नी डॉ. राजबाला ने भी 5 साल तक झुंझुनूं जिला प्रमुख का पद संभाला।

मिर्धा परिवार : जिला प्रमुख रहे हरेंद्र मिर्धा

- राजस्थान के दिग्गज राजनीतिक परिवारों में से एक नागौर का मिर्धा परिवार का भी पंचायत चुनाव में अच्छा दखल रहा है। किसान केसरी कहे जाने वाले बलदेव राम मिर्धा के पोते और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामनिवास मिर्धा के बेटे हरेन्द्र मिर्धा नागौर के जिला प्रमुख रह चुके हैं। वर्तमान में वे नागौर विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक हैं।

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