कौन होते हैं CLG सदस्य? पुलिस थानों में अब नेताओं और कार्यकर्ताओं की एंट्री, गृह विभाग ने बदले नियम
गृह विभाग ने नियमों में बड़ा संशोधन कर राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के कम्युनिटी लाइजन ग्रुप (CLG) सदस्य बनने पर लगी रोक हटा दी है। हालांकि, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को अब भी दूर रखा जाएगा। जयपुर: रा…

सौजन्य से:- Navbharat Times
गृह विभाग ने नियमों में बड़ा संशोधन कर राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के कम्युनिटी लाइजन ग्रुप (CLG) सदस्य बनने पर लगी रोक हटा दी है। हालांकि, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को अब भी दूर रखा जाएगा।
जयपुर: राजस्थान के पुलिस थानों में अब राजनैतिक दलों के नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की एंट्री होने वाली है। यह एंट्री सीएलजी सदस्य यानी समुदाय संपर्क समूह के सदस्य के रूप में होने जा रही है। नियमों के मुताबिक अब तक किसी भी राजनैतिक पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता के सीएलजी सदस्य बनने पर रोक थी लेकिन गृह विभाग ने नियमों में संशोधन कर दिया है। इस संबंध में गृह विभाग के सचिव मनीष गोयल ने आदेश भी जारी कर दिए हैं।
क्या है सीएलजी?
पुलिस और जनता के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए समुदाय संपर्क समूह का गठन किया गया था। जनता के साथ सकारात्मक संवाद करने के लिए प्रत्येक थाना, बीट, वृत्त और जिला स्तर पर सीएलजी स्थापित है। पुलिस के अधिकारी सीएलजी सदस्यों के साथ दो महीने में एक बार मीटिंग करते हैं और इलाके कानून व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में विचार विमर्श करते हैं।
क्या काम होता है सीएलजी सदस्यों का?
सीएलजी सदस्य एक तरह से पुलिस के सहयोग के रूप में कार्य करते हैं। जैसे क्षेत्र में कही सामुदायिक विवाद हो जाए। दो समुदायों के लोग आमने सामने हो जाए। ऐसी स्थिति में सीएलजी सदस्य दोनों समुदायों के लोगों के साथ बैठकर संवाद स्थापित करते हैं और शांति बनाने में मदद करते हैं। बड़े आयोजनों जैसे मेले, त्यौहार, जुलूस, धरना और बड़े कार्यक्रमों में भी सीएलजी के सदस्य पुलिस की सहायता करते हैं।
कोई मानदेय नहीं, 3 साल का होता है कार्यकाल
किसी भी व्यक्ति को जब सीएलजी का सदस्य बनाया जाता है तो उसे वह अधिकतम तीन साल तक कार्य कर सकता है। तीन साल बाद थाना प्रभारी की सिफारिश पर उसकी सदस्यता का नवीनीकरण किया जाता है या उसकी सदस्यता समाप्त कर दी जाती है। सीएलजी सदस्यों को कोई मानदेय नहीं दिया जाता है। ये लोग मुफ्त में पुलिस की मदद करते हैं।
आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों से दूरी
सीएलजी सदस्य बनाये जाने के दौरान व्यक्ति का चरित्र सत्यापन कराया जाता है। यह देखा जाता है कि वह आपराधिक पृष्ठभूमि तो नहीं है। आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों को सदस्य नहीं बनाया जाता है। अब तक राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को भी सीएलजी का सदस्य नहीं बनाया जाता था लेकिन अब राजस्थान पुलिस अधिनियम में बदलाव करके राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को सीएलजी सदस्य बनने की राह खोल दी है।
लेखक के बारे मेंपुलकित सक्सेनापुलकित सक्सेना नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वह साल 2022 नवंबर महीने से नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े। वर्तमान में राजस्थान के लिए काम करते हैं। 2019 में पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली के नेशनल टीवी चैनल में इनपुट डेस्क से की। बीते 7 सालों में टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया और अब डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका में कार्यरत हैं।
राजस्थान की राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर्स और ऑफ बीट खबरों पर नजर रखना पुलकित सक्सेना की पहली प्राथमिकता रहती है।
विशेषज्ञता- राजनीति, क्राइम, एनलिसिस, सियासी उठा पटक को कवर करना।
पत्रकारिता अनुभव: 7 साल से कार्यरत
पुलकित सक्सेना ने साल 2017 में जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरी की। साल 2019 में देश की प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से दिल्ली में प्रथम श्रेणी से पोस्ट ग्रेजुएशन पत्रकारिता में किया। इसके बाद साल 2019 में दिल्ली से टीवी 100 न्यूज चैनल से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद राजस्थान के यूट्यूब न्यूज चैनल में एंकरिंग, पैकेज क्रिएशन और सोशल मीडिया हैंडल के लिए सक्रियता से काम किया। साल 2022 के नवंबर महीने में वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में जुड़े। वर्तमान में बीते तीन साल से वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।... और पढ़ें
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