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डूंगरपुर में निकाय चुनाव से पहले कई बीजेस्‍पी नेताओं ने कांग्रेस में ली सदस्यता

राजस्थान के डूंगरपुर में नगर निकाय चुनाव से पहले, बीजेस्‍पी के बूथ अध्यक्ष और जैन‑पाटीदार समाज के कई प्रमुख नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस कदम से कांग्रेस का स्थानीय दायरा विस्तारित हुआ, पर चुनावी परिणाम पर इसका असर अभी स्पष्ट नहीं है।

ABP News के अनुसार29 अगस्त 2026 को 06:32 pm बजे
डूंगरपुर में निकाय चुनाव से पहले कई बीजेस्‍पी नेताओं ने कांग्रेस में ली सदस्यता

सौजन्य से:- ABP News

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राजस्थान निकाय चुनाव से पहले BJP को झटका, कई नेता कांग्रेस में शामिल

राजस्थान निकाय चुनाव से पहले डूंगरपुर में BJP को बड़ा झटका लगा है. नवाडेरा में पाटीदार और जैन समाज के नेताओं के साथ BJP बूथ अध्यक्ष ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है. चुनावी समीकरणों में बड़ा बदलाव.

राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर सियासी हलचल लगातार तेज होती जा रही है. चुनावी तारीखों के ऐलान के साथ ही राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हैं.वही डूंगरपुर में भी चुनावी माहौल गरमाने लगा है. इसी बीच नवाडेरा क्षेत्र में कांग्रेस को उस समय सियासी मजबूती मिली, जब पाटीदार समाज के कई लोगों ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की. इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा शुरू हो गई है.

नवाडेरा के पूर्व पार्षद डायालाल पाटीदार और पूर्व विकास अधिकारी रामलाल पाटीदार के नेतृत्व में पाटीदार समाज के अनेक सदस्यों ने कांग्रेस का दामन थामा. सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में डूंगरपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोगरा, पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा, पूर्व राज्यमंत्री असरार अहमद खान, संगठन महामंत्री नारायण पंड्या, सभापति प्रत्याशी भरत नागदा और रतनलाल पाटीदार सहित कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे.

बीजेपी से जुड़े लोगों के कांग्रेस में आने से बढ़ी सियासी चर्चा

नवाडेरा में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करने वालों में बीजेपी से जुड़े पदाधिकारी और समाज के प्रमुख लोग भी शामिल रहे. बीजेपी के बूथ अध्यक्ष मोहनलाल जैन, नवाडेरा जैन समाज अध्यक्ष सुरेंद्र जैन और कोषाध्यक्ष दिलीप जैन सहित कई लोगों ने कांग्रेस में विश्वास जताते हुए पार्टी की सदस्यता ग्रहण की.

चुनाव से पहले कांग्रेस का कुनबा बढ़ा

नगरीय निकाय चुनाव से ठीक पहले बीजेपी से जुड़े लोगों का कांग्रेस में शामिल होना स्थानीय राजनीतिक नजरिए से अहम माना जा रहा है. कांग्रेस इसे अपने बढ़ते जनाधार के तौर पर देख रही है, जबकि चुनावी मैदान में इसका असर कितना दिखाई देगा, यह मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा.

पाटीदार समाज के कई लोगों ने जताया कांग्रेस पर भरोसा

सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में पाटीदार समाज के बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही. कांग्रेस में शामिल होने वालों में डायालाल पाटीदार, सुरेश पाटीदार, मोहन पाटीदार, बंसीलाल पाटीदार, अविनाश पाटीदार, रितिक पाटीदार, हिमांशु पाटीदार, संजय पाटीदार, चिराग पाटीदार, प्रेमांशु पाटीदार, जयंती पाटीदार, गहरीलाल पाटीदार और हरीश पाटीदार शामिल रहे.

इसके अलावा मोहनलाल जैन, दिलीप जैन, सुरेंद्र जैन, कांतिलाल जैन, जयदीप जैन और गोरेश्वर ननोमा सहित समाज के कई सदस्यों ने भी कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की.

कांग्रेस नेताओं ने किया नए सदस्यों का स्वागत

कांग्रेस नेताओं ने पार्टी में शामिल हुए सभी नए सदस्यों का स्वागत किया. इस दौरान नेताओं ने कहा कि लगातार लोगों का कांग्रेस से जुड़ना जनता के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है. कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, क्षेत्र की जनता विकास, जनहित और बदलाव के मुद्दों को लेकर पार्टी के साथ जुड़ रही है.

विकास और बदलाव के संकल्प को मिलेगी मजबूती

नेताओं ने कहा कि नवाडेरा से शुरू हुई यह राजनीतिक पहल आने वाले समय में क्षेत्र में बदलाव और विकास के संकल्प को और मजबूत करेगी. कांग्रेस ने सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम को आगामी नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बताया.

चुनाव से पहले बदलते समीकरणों पर नजर

डूंगरपुर में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक दल लगातार अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं. संभावित उम्मीदवारों को लेकर भी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के बीच बैठकों का दौर जारी है. ऐसे में नवाडेरा में कांग्रेस के पक्ष में हुए इस राजनीतिक घटनाक्रम ने चुनावी चर्चा को और तेज कर दिया है.

प्रभावशाली समाजों की भूमिका पर टिकी नजरें

स्थानीय स्तर पर समाजों और प्रभावशाली लोगों की भूमिका नगरीय निकाय चुनाव में महत्वपूर्ण मानी जाती है. ऐसे में पाटीदार और जैन समाज के लोगों का कांग्रेस के साथ आना पार्टी के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा, इस पर सभी की नजर रहेगी. फिलहाल कांग्रेस इस घटनाक्रम को अपने बढ़ते जनाधार और मजबूत होते संगठन के संकेत के तौर पर देख रही है. वहीं, चुनावी मैदान में बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे स्थानीय राजनीतिक समीकरण भी बदलते नजर आ सकते हैं!

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